गुरु जी झारखंड के गांधी और मंडेला थे: समर्थक
संतोष
- 04 Aug 2025, 11:59 PM
- Updated: 11:59 PM
(संजॉय कुमार डे)
रांची, चार अगस्त (भाषा) बीरू मांझी (60) ने पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन को झारखंड का गांधी बताया, जिन्होंने अपना जीवन गरीबों, वंचितों, उत्पीड़ितों और आदिवासी समुदायों के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया।
सोरेन की विचारधारा के समर्थक मांझी झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के सह-संस्थापक के पार्थिव शरीर को रांची के बिरसा मुंडा हवाई अड्डे से उनके हजारों समर्थकों और पार्टी समर्थकों के साथ यहां स्थिति उनके आवास तक लेकर आए।
उन्होंने कहा, "मैं शिबू सोरेन की विचारधारा का कट्टर समर्थक रहा हूं, जिन्होंने वर्षों से उत्पीड़ित लोगों को आवाज़ दी है। वह न केवल झारखंड आंदोलन के योद्धा थे, बल्कि एक समाज सुधारक भी थे। सोरेन ने हज़ारों गरीब लोगों को साहूकारों के चंगुल से छुड़ाया। वह सिर्फ़ एक नेता नहीं, बल्कि झारखंड के महात्मा गांधी थे।"
सोरेन के मोरबाड़ी स्थित आवास के बाहर उनकी एक झलक पाने के लिए इंतजार कर रहे एक अन्य समर्थक फागू मुंडा (55) ने कहा कि सुबह उनके निधन की खबर सुनने के बाद वह दुमका से यहां आए हैं।
उन्होंने कहा, "दुमका में शिबू सोरेन के बड़ी संख्या में समर्थक हैं। एक समय था जब दूरदराज के गांवों के पुरुष और महिलाएं उन्हें सुनने के लिए 20-30 किलोमीटर पैदल चलकर आते थे और पृथक झारखंड की लड़ाई में उन्हें अपना पूरा समर्थन भी देते थे।"
मुंडा ने कहा, "जैसे नेल्सन मंडेला ने दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद व्यवस्था के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी, वैसे ही सोरेन ने साहूकारों के खिलाफ लड़ाई लड़ी, जो गरीबों और आदिवासियों को लूट रहे थे। उन्होंने शराब के खिलाफ भी आंदोलन चलाया ताकि आदिवासी इसके चंगुल से मुक्त हो सकें। इसलिए हम उन्हें झारखंड का मंडेला भी कह सकते हैं।"
शिबू सोरेन ‘दिशोम गुरु’ के नाम से प्रसिद्ध थे। शिबू सोरेन (81) का गुर्दे संबंधी समस्या के कारण एक महीने से अधिक समय से दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में उपचार किया जा रहा था। उनका सोमवार सुबह निधन हो गया।
झामुमो सूत्रों ने बताया कि शिबू सोरेन का पार्थिव शरीर मंगलवार को रामगढ़ जिले में उनके पैतृक गांव नेमरा ले जाया जाएगा और अंतिम संस्कार वहीं किया जाएगा।
भाषा नोमान