गुरुवायूर शुद्धीकरण अनुष्ठान सभ्य केरल के लिए उपयुक्त नहीं: स्वामी सचिदानंद
जितेंद्र नेत्रपाल
- 30 Aug 2025, 08:11 PM
- Updated: 08:11 PM
तिरुवनंतपुरम, 30 अगस्त (भाषा) श्री नारायण धर्म संगम ट्रस्ट के अध्यक्ष स्वामी सचिदानंद ने शुक्रवार को कहा कि गुरुवायूर स्थित प्रसिद्ध श्री कृष्ण मंदिर में दूसरे धर्म की एक ‘इन्फ्लुएंसर’ द्वारा पवित्र कुंड पर वीडियो फिल्माए जाने के बाद किया गया शुद्धीकरण अनुष्ठान सभ्य केरल के अनुरूप नहीं है।
सचिदानंद ने एक बयान में त्रिशूर जिले के गुरुवायूर मंदिर के पुजारियों से बड़ा दिल और व्यापक सोच रखने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा, “एक अलग धर्म से ताल्लुक रखने वाली सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के कृत्य को एक बड़े अपराध के रूप में चित्रित करना और मंदिर में एक सप्ताह तक चलने वाला शुद्धीकरण अनुष्ठान करना सभ्य केरल के अनुरूप नहीं है।”
सचिदानंद ने बताया कि वंचित लोगों को मोक्ष प्रदान करने वाले ‘भगवान गुरुवायुरप्पन’ इस रवैये को स्वीकार नहीं करेंगे कि किसी अन्य धर्म के व्यक्ति को मंदिर के कुंड को नहीं छूना चाहिए।
गुरुवायुर देवस्वम ने ‘फेसबुक’ पर एक पोस्ट में कहा था कि शुद्धीकरण अनुष्ठान इसलिए किया गया क्योंकि एक ‘गैर-हिंदू महिला ने फिल्मांकन के लिए मंदिर के कुंड में प्रवेश किया’, जिसे ‘धार्मिक मानदंडों’ का उल्लंघन माना गया।
यह अनुष्ठान गैर हिंदू महिला द्वारा मंदिर के कुंड में अपने पैर धोते हुए एक वीडियो पोस्ट किए जाने के बाद किया गया था।
सार्वजनिक आक्रोश के बाद महिला ने कथित तौर पर पोस्ट हटा दिया और माफी मांगी।
स्वामी सचिदानंद ने कहा कि सैकड़ों गैर-हिंदू गुरुवायुर मंदिर आते हैं और मंदिर प्रशासकों की जानकारी के बिना ही घर लौट जाते हैं।
उन्होंने कहा, “इससे मंदिर की महत्ता कम नहीं होती, बल्कि बढ़ती है।”
सचिदानंद ने यह भी कहा कि पुराने जमाने में यह अंधविश्वास था कि अगर पिछड़े वर्ग के लोग मंदिरों में प्रवेश करेंगे, तो मंदिरों की महत्ता कम हो जाएगी। उन्होंने बयान में कहा कि जब मंदिर प्रवेश की उद्घोषणा के जरिए इस ‘कुप्रथा’ को हटाया गया तो इससे हिंदू धर्म और हिंदू पूजा-अर्चना का ही विकास हुआ। सचिदानंद ने कहा, “इसी तरह हिंदू धर्म के शिक्षकों, देवस्वम बोर्ड और सरकार को गैर-हिंदुओं को मंदिरों के बोर्ड में प्रवेश की अनुमति देने पर विचार करना चाहिए।”
भाषा जितेंद्र