ओबीसी कार्यकर्ताओं ने आरक्षण बरकरार रखे जाने के सरकार के आश्वासन पर धरना समाप्त किया
नेत्रपाल मनीषा
- 04 Sep 2025, 01:52 PM
- Updated: 01:52 PM
नागपुर, चार सितंबर (भाषा) महाराष्ट्र सरकार से यह आश्वासन मिलने के बाद कि मराठा आरक्षण पर फैसले से उनका आरक्षण प्रभावित नहीं होगा, ओबीसी समुदायों का प्रतिनिधित्व करने वाले एक संगठन ने बृहस्पतिवार को छह दिन पुराना अपना धरना समाप्त कर दिया।
राज्य के ओबीसी कल्याण मंत्री अतुल सावे ने प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की और उन्हें आश्वासन दिया कि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) का आरक्षण ‘‘अछूता रहेगा’’।
उन्होंने कहा, ‘‘सरकार ओबीसी समुदाय के मौजूदा आरक्षण की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।’’
सावे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्रियों की ओर से आंदोलन स्थल का दौरा किया।
राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ ने 30 अगस्त को नागपुर के संविधान चौक पर क्रमिक भूख हड़ताल शुरू की थी। इससे एक दिन पहले कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने मराठा आरक्षण की मांग को लेकर मुंबई के आजाद मैदान में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी।
मंगलवार को सरकार द्वारा मराठाओं को कुनबी जाति प्रमाणपत्र देने सहित उनकी अधिकतर मांगों को स्वीकार किए जाने के बाद जरांगे ने पांच दिन पुराना अपना अनशन समाप्त कर दिया। कुनबी प्रमाणपत्र से उन्हें शिक्षा और नौकरियों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को मिलने वाले आरक्षण का लाभ मिल सकेगा।
सरकार ने मराठा समुदाय के सदस्यों को उनकी कुनबी विरासत के ऐतिहासिक साक्ष्य के साथ कुनबी जाति प्रमाणपत्र जारी करने के लिए एक समिति गठित करने की घोषणा की है।
राष्ट्रीय ओबीसी संघ मराठा समुदाय को ओबीसी श्रेणी में शामिल करने का विरोध कर रहा था।
इसने मराठाओं को ओबीसी श्रेणी में शामिल न करने और मराठा समुदाय के सभी सदस्यों को कुनबी प्रमाण पत्र जारी न करने सहित 14 मांगें रखी थीं।
प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए सावे ने कहा, ‘‘ओबीसी कोटा अछूता रहेगा। सरकार ओबीसी समुदाय के मौजूदा आरक्षण की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।’’
सावे ने राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ को आश्वासन दिया कि उनकी 14 में से 12 मांगों पर सरकार विचार करेगी तथा अन्य दो मांगों पर अगले सप्ताह मुंबई में होने वाली बैठक में विचार किया जाएगा और इसका भी समाधान निकाला जाएगा।
मंत्री के आश्वासन के बाद ओबीसी संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बबन तायवाड़े ने कहा कि उन्होंने धरना समाप्त कर दिया है।
भाषा नेत्रपाल