चक्रवात ‘मोंथा’ के कारण दो लोगों की मौत हुई, पर एहतियाती उपायों से नुकसान कम हुआ: मुख्यमंत्री नायडू
संतोष रंजन
- 29 Oct 2025, 07:04 PM
- Updated: 07:04 PM
अमरावती, 29 अक्टूबर (भाषा) आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने बुधवार को कहा कि भीषण चक्रवाती तूफान ‘मोंथा’ के कारण राज्य में दो लोगों की मौत हो गई, लेकिन एहतियाती उपायों से ‘नुकसान कम से कम हुआ है’।
नायडू ने पूरी सरकारी मशीनरी से चक्रवात प्रभावित लोगों को और राहत पहुंचाने के लिए अगले दो दिनों तक अपने प्रयास जारी रखने का आह्वान किया।
नायडू ने एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, ‘‘अगर हम अगले दो दिन तक इसी तरह काम करते हैं तो हम लोगों को बहुत राहत दे सकते हैं। चक्रवात के कारण दो लोगों की मौत हुई है।’’
विज्ञप्ति में कहा गया है कि मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को जल्द से जल्द सामान्य स्थिति बहाल करने का निर्देश दिया और मंत्रियों व अधिकारियों से कहा कि वे प्रभावित स्थानों का दौरा करके लोगों की शिकायतों का समाधान करें।
मुख्यमंत्री ने विभागों से चक्रवात से हुए नुकसान का आकलन करने और केंद्र सरकार को विवरण प्रस्तुत करने को भी कहा।
उन्होंने प्रभावित परिवारों को आवश्यक चीजें वितरित करने के आदेश दिए। मुख्यमंत्री ने चक्रवात के दौरान उखड़े हुए पेड़ों को हटाने और क्षतिग्रस्त बिजली लाइनों को ठीक करने के लिए युद्ध स्तर पर काम करने की खातिर राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), पुलिस और अग्निशमन विभाग के अधिकारियों की विशेष रूप से सराहना की।
नायडू ने कहा कि क्षतिग्रस्त बिजली अवसंरचना को बहाल करने के लिए 10,000 लोगों को तैयार रखा गया है और वादा किया कि बुधवार दोपहर तक सामान्य स्थिति बहाल कर दी जाएगी।
इस बीच मुख्यमंत्री ने चक्रवात प्रभावित स्थानों का हवाई दौरा शुरू किया। विज्ञप्ति में कहा गया है कि उन्होंने बापटला, पालनाडू, कृष्णा, कोनासीमा और एलुरु जिलों का दौरा किया।
दौरे के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि चक्रवात के तट से टकराने पर तेज हवाएं चलीं, जबकि प्रकाशम और नेल्लोर जिलों में भारी बारिश हुई।
उन्होंने कहा, ‘‘हवा की गति 75 किमी प्रति घंटे तक पहुंच गई। अगर यह इससे अधिक होती, तो कोनासीमा जिले में नारियल के पेड़ों को नुकसान पहुंचता।’’
नायडू ने कहा कि घरों और मवेशियों को कम से कम नुकसान हुआ है, लेकिन जल निकासी व्यवस्था के अवरुद्ध होने जैसी बार-बार होने वाली नागरिक समस्याएं बनी हुई हैं।
भाषा संतोष