रेलवे से दस साल पहले समाप्त किए गए सहायक गार्ड पदों को हटाने का आग्रह
पारुल सुरेश
- 17 Nov 2025, 09:03 PM
- Updated: 09:03 PM
नयी दिल्ली, 17 नवंबर (भाषा) ऑल इंडिया गार्ड्स काउंसिल (एआईजीसी) ने रेलवे बोर्ड से आग्रह किया है कि वह सहायक गार्ड के सभी पदों को हटाकर अपने सेवा रिकार्ड को दुरुस्त करे। इन पदों को 2012 में समाप्त कर दिया गया था।
एआईजीसी ने रेलवे बोर्ड को लिखे पत्र में कहा है कि उसने व्यापक जनशक्ति युक्तिकरण और लागत बचत पहल के तहत 2012 में प्रत्येक जोन को सहायक गार्ड के सभी पदों को खत्म करने का निर्देश दिया था।
पत्र में कहा गया है कि हालांकि, आधिकारिक रिकॉर्ड में यह पद अब भी दर्शाया जा रहा है और बोर्ड को इसकी वास्तविक कैडर संख्या के बारे में जानकारी नहीं है।
एआईजीसी के सामान्य अध्यक्ष एसपी सिंह ने कहा कि रेल मंत्रालय ने नवंबर 1991 में एक योजना शुरू की थी, जिसके तहत पार्सल परिवहन के लिए सीटिंग-कम-लगेज रेक (एसएलआर कोच) को पट्टे पर दिया गया था।
सिंह के मुताबिक, अधिकारियों ने बताया कि उन दिनों यात्री ट्रेन में इंजन से दूसरा कोच सहायक गार्ड के लिए होता था, जिसे एसएलआर कोच या वैन भी कहा जाता था, जबकि अंतिम कोच गार्ड के लिए निर्धारित होता था।
उन्होंने कहा, “पार्सल चढ़ाए जाने के बाद एसएलआर कोच में सहायक गार्ड के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध होती थी, लेकिन 1991 में इस योजना की शुरुआत के बाद, मंत्रालय को एहसास हुआ कि इससे अच्छी-खासी कमाई हो रही है।”
सिंह ने कहा, “इसकी सफलता को देखते हुए और कमाई बढ़ाने के लिए यात्री ट्रेन के एसएलआर कोच के पार्सल स्थान का अधिकतम इस्तेमाल सुनिश्चित करने के लिए रेलवे ने 2006 में सहायक गार्ड का पद हटा दिया तथा उस स्थान को भी पार्सल सेवाओं के लिए पट्टे पर दे दिया।”
उन्होंने कहा कि इसके परिणामस्वरूप भारतीय रेलवे में सहायक गार्ड का पद निरर्थक हो गया।
सिंह ने कहा कि 2012 में रेलवे बोर्ड ने एक पत्र जारी कर प्रत्येक जोन को व्यापक जनशक्ति युक्तिकरण और लागत बचत पहल के तहत सहायक गार्ड पदों को समाप्त करने का निर्देश दिया था।
उन्होंने कहा, “दुर्भाग्य से, आधिकारिक रिकॉर्ड अब भी इसी पद को दर्शा रहे हैं और शीर्ष कार्यकारी अधिकारी को इसके कैडर की संख्या का भी पता नहीं है। हम आपसे विनम्र अनुरोध करते हैं कि कृपया इस अनावश्यक पद को हटाकर रिकॉर्ड को सही करने की व्यवस्था करें।”
भाषा पारुल