छत्तीसगढ़ में एसीबी/ईओडब्ल्यू ने कथित सीजीएमएससी घोटाले में चार लोगों के खिलाफ पूरक चालान पेश किया
खारी
- 16 Apr 2026, 11:51 PM
- Updated: 11:51 PM
रायपुर, 16 अप्रैल (भाषा) छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो/आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (एसीबी/ईओडब्ल्यू) ने कथित सीजीएमएससी घोटाला मामले में बृहस्पतिवार को चार लोगों के खिलाफ पूरक चालान दाखिल किया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
अधिकारियों के अनुसार, यह पूरक चालान वर्ष 2023 में मेडिकल उपकरणों और 'रिएजेंट केमिकल्स' की खरीद में कथित अनियमितताओं के मामले में दाखिल किया गया है, जिससे राज्य के खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ।
जांच एजेंसी ने पूरक चालान में पंचकूला स्थित रिकॉर्ड्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक अभिषेक कौशल, रायपुर स्थित श्री शारदा इंडस्ट्रीज के प्रोपराइटर राकेश जैन, रिकॉर्ड्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड के लाइजनर प्रिंस कोचर तथा नवी मुंबई स्थित डायसिस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के मार्केटिंग हेड कुंजल शर्मा को नामजद किया है।
अधिकारियों ने बताया कि राज्य में आम जनता को नि:शुल्क जांच उपलब्ध कराने के लिए जिला अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों और उप-स्वास्थ्य केंद्रों में 'हमर लैब' योजना के तहत मेडिकल उपकरण और 'रिएजेंट्स' की खरीद के लिए निविदा प्रक्रिया अपनाई गई थी। इस प्रक्रिया में 'पूल टेंडरिंग' के माध्यम से मोक्षित कॉर्पोरेशन को निविदा प्राप्त हुई।
जांच में सामने आया है कि रिकॉर्ड्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड और श्री शारदा इंडस्ट्रीज ने भविष्य में छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (सीजीएमएससीएल) में अपनी आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करने के उद्देश्य से मोक्षित कॉर्पोरेशन को सहयोग किया। प्रिंस कोचर इस पूरी प्रक्रिया में समन्वय का कार्य कर रहा था।
अधिकारियों के मुताबिक, तीनों कंपनियों ने अपनी पात्रता सुनिश्चित करने के लिए निविदा की शर्तों के अनुरूप वास्तविक क्षमता से अलग उत्पादक क्षमता, सेवा, रखरखाव और स्थापन से संबंधित फर्जी दस्तावेज तैयार कर निविदा में उपयोग किए।
जांच में यह भी पाया गया कि निविदा प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करने के उद्देश्य से कंपनियों के बीच आपसी समन्वय और कार्टेलाइजेशन किया गया। निविदा में यही तीन कंपनी चुनी गई और इनके वित्तीय प्रस्ताव खोले गए।
तीनों ने उत्पाद, पैक साइज, रिएजेंट और कंज्यूमेबल्स का विवरण एक जैसे पैटर्न में भरा और दरें भी समान तरीके से भरीं—सबसे कम दर मोक्षित कॉर्पोरेशन, उसके बाद आरएमएस और श्री शारदा इंडस्ट्रीज द्वारा दी गई।
अधिकारियों ने बताया कि जांच में यह भी सामने आया कि मेडिकल उपकरणों के रिएजेंट और कंज्यूमेबल्स के लिए डायसिस कंपनी ने निश्चित अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) तय किया था। आरोपी कुंजल शर्मा ने मोक्षित कॉर्पोरेशन के साझेदार शशांक चोपड़ा के साथ मिलकर कथित रूप से साजिश के तहत सीजीएमएससी को वास्तविक एमआरपी से कहीं अधिक दर भेजी, जिसे निविदा में स्वीकार कर लिया गया।
अधिकारियों ने बताया कि इसके परिणामस्वरूप मोक्षित कॉर्पोरेशन ने सीजीएमएससी को रिएजेंट और कंज्यूमेबल्स वास्तविक एमआरपी से तीन गुना तक अधिक कीमत पर आपूर्ति किए, जिससे सरकारी राशि का दुरुपयोग हुआ और शासन को लगभग 550 करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति पहुंची।
अधिकारियों ने बताया कि इस प्रकरण में अब तक 10 आरोपियों के खिलाफ चालान प्रस्तुत किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि 'हमर लैब' योजना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच जारी है और साक्ष्यों के आधार पर जिम्मेदारी तय कर आगे भी संबंधितों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
एसीबी/ईओडब्ल्यू ने 22 जनवरी 2025 को सीजीएमएससीएल (रायपुर) और स्वास्थ्य सेवा संचालनालय के अधिकारियों के साथ-साथ चार कंपनियों एवं अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया था। उस प्राथमिकी में किसी का नाम शामिल नहीं था।
जांच एजेंसी के अनुसार, इस कथित घोटाले में स्वास्थ्य केंद्रों में उपलब्धता सुनिश्चित किए बिना ही रिएजेंट और उपकरणों की खरीद की गई थी।
भाषा संजीव खारी
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1604 2351 रायपुर