कर्नाटक उपचुनाव विवाद: कुछ मुस्लिम नेताओं ने कांग्रेस के खिलाफ 'दुर्भावनापूर्ण अभियान' का आरोप लगाया
मनीषा
- 21 Apr 2026, 01:48 PM
- Updated: 01:48 PM
बेंगलुरु, 21 अप्रैल (भाषा) कांग्रेस की कर्नाटक इकाई के कुछ पदाधिकारियों एवं मुस्लिम नेताओं ने आरोप लगाया है कि पार्टी पर समुदाय के नेतृत्व के खिलाफ काम करने का आरोप लगाकर उसके खिलाफ ''दुर्भावनापूर्ण अभियान'' चलाया जा रहा है।
इन नेताओं ने इस घटनाक्रम को ''बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और भ्रामक'' बताया।
नेताओं ने नौ अप्रैल को दावणगेरे दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में कांग्रेस के आधिकारिक उम्मीदवार समर्थ मल्लिकार्जुन के खिलाफ पार्टी के भीतर ''साजिश'' के आरोपों के बाद, समुदाय के नेताओं के विरुद्ध की गई कार्रवाई का भी बचाव किया।
उन्होंने एक संयुक्त बयान जारी कर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) से ''दबाव की ऐसी रणनीति या राजनीतिक ब्लैकमेल'' के आगे नहीं झुकने का आग्रह किया और ''पार्टी विरोधी गतिविधियों'' के दोषी पाए जाने वाले सभी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
सत्तारूढ़ कांग्रेस ने विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) के. अब्दुल जब्बार को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया है और मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने एक अन्य एमएलसी नसीर अहमद को मुख्यमंत्री के राजनीतिक सचिव पद से हटा दिया है।
यह कार्रवाई मुस्लिम नेताओं के एक समूह के आरोपों के बाद की गई। इस समूह में विधान परिषद के मुख्य सचेतक सलीम अहमद और विधायक रिजवान अरशद एवं यासिर अहमद शामिल हैं। इन नेताओं ने आरोप लगाया था कि पार्टी के कुछ सदस्यों ने दावणगेरे दक्षिण में आधिकारिक उम्मीदवार को हराने की साजिश रची।
इस कार्रवाई के बाद यह अटकलें तेज हैं कि आवास मंत्री बी जेड जमीर अहमद खान को भी अगले मंत्रिमंडल फेरबदल के दौरान कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
खान, जब्बार और नसीर अहमद ने दावणगेरे दक्षिण से किसी मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट देने की कथित तौर पर मांग की थी, लेकिन पार्टी ने विधायक शामनूर शिवशंकरप्पा के पोते समर्थ मल्लिकार्जुन को उम्मीदवार चुना।
केपीसीसी के कुछ पदाधिकारियों एवं समुदाय के नेताओं ने सोमवार को जारी संयुक्त बयान में कहा, ''दावणगेरे दक्षिण उपचुनाव को लेकर हालिया विवाद और यह दुर्भावनापूर्ण अभियान कि कांग्रेस पार्टी मुस्लिम नेतृत्व के खिलाफ काम कर रही है, बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और भ्रामक है।''
बयान पर हस्ताक्षर करने वालों में केपीसीसी के उपाध्यक्ष उबेदुल्ला शरीफ, वाई सईद अहमद, महबूब सौदागर और ए आर मुजम्मिल हुसैन सहित कई अन्य नेता शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि तथ्य साफ तौर पर दिखाते हैं कि यह स्थिति मुस्लिम नेतृत्व के एक वर्ग की विफलता का नतीजा है जो अल्पसंख्यक समुदाय के उम्मीदवार के लिए प्रभावी ढंग से टिकट सुनिश्चित नहीं कर सका। उन्होंने कहा कि कांग्रेस दावणगेरे दक्षिण में कई मुस्लिम दावेदारों में से किसी एक के नाम पर विचार करने को तैयार थी लेकिन संबंधित नेतृत्व ने केवल अब्दुल जब्बार का नाम विचार के लिए प्रस्तावित किया, जबकि निर्वाचन क्षेत्र के कई अन्य सक्षम मुस्लिम दावेदारों की अनदेखी की गई।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दावणगेरे दक्षिण में पार्टी कार्यकर्ता व्यापक रूप से यह बात जानते हैं कि कुछ लोग प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल थे।
उन्होंने कहा, ''इन गुटों ने मुस्लिम मतदाताओं के वोट बांटने, जानबूझकर भ्रम फैलाने और कांग्रेस समर्थकों को गुमराह करने का काम किया, जिससे अन्य छोटे दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों को मदद मिली और अंततः भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को चुनाव में फायदा हुआ।''
नेताओं ने कहा, ''इस संदर्भ में, हम पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए अब्दुल जब्बार को निलंबित करने के एआईसीसी के फैसले का पूरा समर्थन करते हैं।''
उन्होंने नसीर अहमद के बारे में कहा कि यह स्पष्ट रूप से कहा जाना चाहिए कि उन्हें हटाने का फैसला पूरी तरह प्रशासनिक था और यह फैसला सिद्धरमैया ने तब लिया जब उन्होंने उनके निर्देशों का पालन करने से इनकार कर दिया।
नेताओं ने कहा कि राजनीतिक सचिव का पद पार्टी द्वारा नियुक्त पद नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह मुख्यमंत्री के विवेक पर निर्भर करता है।
उन्होंने कहा, ''इसलिए इस मामले में पार्टी के स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। नसीर अहमद अब भी कांग्रेस के सक्रिय सदस्य हैं और कांग्रेस पार्टी से विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) हैं।''
उन्होंने कहा, ''पार्टी के भीतर एक छोटे गुट द्वारा चुनिंदा धार्मिक हस्तियों को शामिल कर अशांति फैलाने की मौजूदा कोशिशें बेहद चिंताजनक हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि ये प्रयास पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल लोगों को बचाने और नेतृत्व पर अनुशासनहीनता को नजरअंदाज करने का दबाव बनाने के लिए किए जा रहे हैं।''
उन्होंने एआईसीसी से आग्रह किया कि वह ''दबाव की ऐसी रणनीति या राजनीतिक ब्लैकमेल'' के आगे नहीं झुके।
कर्नाटक में उलेमा के एक प्रतिनिधि संगठन ने इससे पहले दावणगेरे विधानसभा उपचुनाव से जुड़े हालिया राजनीतिक घटनाक्रम पर असंतोष जताया था और अल्पसंख्यक समुदाय के प्रतिनिधित्व को लेकर चिंता व्यक्त की थी।
भाषा
सिम्मी मनीषा
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