गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की
पवनेश
- 24 Apr 2026, 03:32 PM
- Updated: 03:32 PM
गुवाहाटी, 24 अप्रैल (भाषा) गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। यह याचिका असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा की पत्नी के पास कई पासपोर्ट और विदेश में अघोषित संपत्तियां होने के उनके आरोपों से जुड़े मामले में दायर की गई थी।
न्यायमूर्ति पार्थिव ज्योति सैकिया की एकल पीठ ने सोमवार को खेड़ा द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया। इससे पहले उच्चतम न्यायालय ने कांग्रेस नेता को गुवाहाटी उच्च न्यायालय का रुख करने के लिए कहा था।
एक संवाददाता सम्मेलन में खेड़ा द्वारा लगाए इन आरोपों के बाद मुख्यमंत्री शर्मा की पत्नी रिंकी भुइयां शर्मा ने कांग्रेस नेता और अन्य लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत गुवाहाटी अपराध शाखा पुलिस थाने में आपराधिक मामले दर्ज कराए थे।
न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि जो आरोप उन्होंने लगाए हैं, वे कुछ दस्तावेजों पर आधारित हैं, जो उनके पास हैं जबकि पुलिस ने दावा किया कि उन दस्तावेजों को पहले ही फर्जी साबित किया जा चुका है।
अदालत ने कहा कि मामला दर्ज होने के बाद याचिकाकर्ता ने यह कहीं नहीं कहा कि पुलिस ने झूठे या मनगढ़ंत दावे किए हैं।
न्यायाधीश ने कहा, ''महाधिवक्ता का यह दावा कि याचिकाकर्ता का मामला बीएनएस की धारा 339 (जाली दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड रखने) की श्रेणी में आता है, प्रथम दृष्टया सही प्रतीत होता है।''
उन्होंने कहा कि रिंकी भुइयां शर्मा असम के मुख्यमंत्री की पत्नी हैं, लेकिन स्वयं मुख्यमंत्री नहीं हैं।
आदेश में कहा गया है, ''यदि खेड़ा ने ये आरोप मुख्यमंत्री के खिलाफ लगाए होते, तो यह मामला राजनीतिक बयानबाजी माना जा सकता था। लेकिन राजनीतिक लाभ लेने के लिए उन्होंने एक निर्दोष महिला को विवाद में घसीट लिया।''
न्यायाधीश ने कहा कि खेड़ा अब तक यह संदेह से परे साबित नहीं कर पाए हैं कि रिंकी शर्मा के पास तीन अन्य देशों के पासपोर्ट हैं। वह यह भी साबित नहीं कर पाए हैं कि उन्होंने अमेरिका में कोई कंपनी खोली और उसमें भारी निवेश किया।
अदालत ने कहा कि उसकी राय में मौजूदा परिस्थितियों में इस मामले को केवल साधारण मानहानि का मामला नहीं कहा जा सकता, यानी ऐसा मामला जिसमें दुर्भावना या साजिश जैसे अतिरिक्त तत्व न हों।
अदालत ने कहा कि बीएनएस की धारा 339 के तहत प्रथमदृष्टया मामला बनता है, जो जाली दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड रखने से संबंधित है। साथ ही याचिकाकर्ता पुलिस जांच से बचते रहे हैं।
अदालत ने कहा कि यह जानने के लिए हिरासत में पूछताछ जरूरी है कि उनके सहयोगी कौन हैं, जिन्होंने उनके लिए ये दस्तावेज जुटाए, कैसे जुटाए और कहां से जुटाए।
न्यायाधीश ने यह भी कहा कि मामले में ऐसी कोई सामग्री नहीं है जिससे लगे कि याचिकाकर्ता को गिरफ्तार कर अपमानित या नुकसान पहुंचाने के इरादे से आरोप लगाए गए हैं।
अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता अग्रिम जमानत के विशेषाधिकार के हकदार नहीं हैं।
उच्च न्यायालय ने मंगलवार को खेड़ा की याचिका पर सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था।
खेड़ा की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी के नेतृत्व में वकीलों की टीम ने पैरवी की, जबकि असम के महाधिवक्ता देवजीत सैकिया ने जमानत याचिका का विरोध किया।
मामला दर्ज होने के बाद खेड़ा ने तेलंगाना उच्च न्यायालय का रुख किया था क्योंकि कांग्रेस नेता हैदराबाद के निवासी हैं।
तेलंगाना उच्च न्यायालय ने उन्हें सात दिन की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी, लेकिन असम पुलिस ने इसके खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख किया।
उच्चतम न्यायालय ने अंतरिम आदेश पारित कर ट्रांजिट अग्रिम जमानत पर रोक लगा दी और खेड़ा को गुवाहाटी उच्च न्यायालय जाने को कहा।
भाषा गोला पवनेश
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