पटियाला में 18 महीने बाद बीएसएनएल टावर से नीचे उतारे गए खालसा ने कहा ''हम जीत गए''
नरेश
- 24 Apr 2026, 05:43 PM
- Updated: 05:43 PM
(तस्वीरों सहित)
समाना (पंजाब), 24 अप्रैल (भाषा) पंजाब में बेअदबी की घटनाओं के लिए सख्त कानूनों की मांग को लेकर करीब 560 दिनों से 400 फुट ऊंचे मोबाइल टावर पर बैठे कार्यकर्ता गुरजीत सिंह खालसा को आखिरकार शुक्रवार सुबह नीचे उतार लिया गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
इस घटनाक्रम के साथ ही गुरु ग्रंथ साहिब के अपमान के लिए कड़ी सजा की मांग कर रहे खालसा (43) के अनूठे ढंग से किए जा रहे विरोध प्रदर्शन का समापन हो गया। उन्होंने 12 अक्टूबर 2024 को पटियाला के समीप समाना में स्थित टावर पर चढ़कर अपना विरोध प्रदर्शन शुरू किया था।
पटियाला के एक दमकल अधिकारी ने बताया कि दमकलकर्मियों, पुलिस और नगर निकाय के अधिकारियों की एक टीम ने विशेष 'क्रेन-लिफ्ट' की मदद से उन्हें नीचे उतारा।
कार्यकर्ता को टावर से उतारते समय उन्होंने हाथ हिलाकर अपने उन समर्थकों का अभिवादन किया जो नीचे खड़े थे। इस बीच एक समर्थक ने चिल्लाकर कहा कि खालसा ''चढ़दी कला'' (जोश) में है।
खालसा को 'सिख जयकारा' और 'जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल' के नारों के बीच टावर से उतारने के बाद चिकित्सा जांच के लिए एम्बुलेंस में अस्पताल ले जाया गया। इस बीच उनके समर्थकों ने उन पर फूल बरसाए।
कई स्थानीय लोगों को अपने घरों की छतों से इस पूरी प्रक्रिया को देखते हुए देखा गया।
पटियाला जिले के खेड़ी नगैयां गांव के निवासी कार्यकर्ता ने जमीन पर कदम रखते हुए कहा, ''हम जीत गए हैं।''
खालसा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान और विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां को बेअदबी विरोधी कानून लागू करने के लिए धन्यवाद देते हुए कहा, ''गुरु की कृपा से मैं 18 महीने और 12 दिन बाद सुरक्षित वापस आ गया हूं। मैं पंजाब सरकार का आभारी हूं।''
पंजाब सरकार ने गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के खिलाफ संशोधित कानून 'जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026' को हाल ही में अधिसूचित कर दिया है, जिसमें गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के किसी भी कृत्य के लिए आजीवन कारावास और 25 लाख रुपये तक के जुर्माने समेत कठोर दंड का प्रावधान है।
इसे अधिसूचित किए जाने के बाद खालसा ने प्रदर्शन समाप्त करने का फैसला किया।
उनके समर्थकों में से एक उन्हें प्रतिदिन रस्सी की मदद से आवश्यक सामग्री भेजता था।
दमकल विभाग ने खालसा को वहां से उतारने के लिए सावधानीपूर्वक अभियान चलाया, जिसमें लगभग 30-40 मिनट लगे। हालांकि, अधिकारियों ने बताया कि पूर्वाभ्यास समेत पूरी तैयारी में लगभग दो घंटे लगे।
पटियाला के सहायक अग्निशमन अधिकारी हरिंदरपाल सिंह ने बताया कि लगभग 110 किलोग्राम वजनी खालसा को पहले एक सीढ़ी की मदद से 125 फुट नीचे एक विशेष रूप से बनाए गए प्लेटफॉर्म पर उतारा गया।
नीचे उतारे जाने के बाद खालसा ने कहा कि उनके मन में केवल एक ही विचार था - या तो वे 'शहीद' होंगे या 'मोर्चा' (विरोध) विजयी होगा।
टावर के ऊपर लंबे समय तक रहने के बारे में पूछे जाने पर, खालसा ने कहा कि यह एक अच्छा अनुभव रहा।
हालांकि, कार्यकर्ता ने कहा कि शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण अब उन्हें 'ब्लड शुगर' की समस्या हो रही है। उन्होंने यह भी बताया कि उनका रक्तचाप कभी-कभी घटता-बढ़ता रहता है।
खालसा की मां परमजीत कौर ने कहा कि उन्हें अपने बेटे पर गर्व है।
भाषा यासिर नरेश
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2404 1743 समाना