ममता ने यादवपुर विश्वविद्यालय के बारे में प्रधानमंत्री मोदी की कथित टिप्पणियों की आलोचना की
नरेश
- 24 Apr 2026, 06:06 PM
- Updated: 06:06 PM
कोलकाता, 24 अप्रैल (भाषा) पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने यादवपुर विश्वविद्यालय के बारे में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कथित टिप्पणियों की शुक्रवार को कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि ऐसी टिप्पणियां अकादमिक उत्कृष्टता के लिए जाने जाने वाले एक प्रमुख संस्थान की प्रतिष्ठा को धूमिल करती हैं।
ममता ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में लिखा कि वह यादवपुर विश्वविद्यालय के छात्रों के एक वर्ग को "अराजकता" से जोड़ने के प्रधानमंत्री के प्रयास से "दुखी" हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या इस तरह की टिप्पणियां देश के सर्वोच्च पद से अपेक्षित मर्यादा के अनुरूप हैं।
तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ने कहा, "यादवपुर विश्वविद्यालय ने भारत सरकार के एनआईआरएफ (राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग ढांचा) में लगातार शीर्ष स्थान हासिल किया है। यह संस्थान अपनी अकादमिक उत्कृष्टता के लिए जाना जाता है। इसके छात्रों का अपमान करना योग्यता, विद्वता और शिक्षा की भावना का अपमान करने के समान है।"
ममता ने छात्रों का समर्थन करते हुए कहा कि सवाल उठाना और विरोध-प्रदर्शनों में हिस्सा लेना लोकतांत्रिक ढांचे का अभिन्न अंग है।
उन्होंने कहा, "योग्यता के बल पर अपनी पहचान बनाने वाले छात्रों का सत्ता पर सवाल उठाना अराजकता नहीं, बल्कि शिक्षा और उत्कृष्टता का संकेत है।"
ममता ने लोकतांत्रिक असहमति और "वास्तविक अराजकता" के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि सरकारी ताकत का दुरुपयोग, विरोध-प्रदर्शनों का दमन और जवाबदेही की कमी लोकतंत्र के लिए अधिक बड़ा खतरा है।
उन्होंने कहा, "छात्रों का विरोध-प्रदर्शन लोकतंत्र के पतन का नहीं, बल्कि उसके गतिशील होने का संकेत है।"
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि वह बंगाल की बौद्धिक और राष्ट्रवादी विरासत में निहित संस्थान को बदनाम न करें।
उन्होंने श्री अरबिंदो जैसी हस्तियों से विश्वविद्यालय को मिली ऐतिहासिक प्रेरणा का जिक्र करते हुए कहा कि बंगाल की शैक्षणिक विरासत का सम्मान किया जाना चाहिए, न कि तिरस्कार।
मोदी ने बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस पर शुक्रवार को तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि ममता नीत पार्टी ने भ्रष्टाचार और घुसपैठ की अनुमित देकर राज्य की पहचान को नष्ट कर दिया है तथा यादवपुर विश्वविद्यालय जैसे प्रमुख संस्थानों को अराजकता और राजनीतिक धमकियों के प्रतीक में बदल दिया है।
उन्होंने विश्वविद्यालय में लगातार हो रहे विरोध-प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कहा कि यह प्रमुख संस्थान, जो कभी अपनी शैक्षणिक विरासत के लिए वैश्विक स्तर पर सम्मानित था, वर्तमान शासन के तहत अराजकता का प्रतीक बन गया है।
प्रधानमंत्री ने कहा, "यादवपुर विश्वविद्यालय को कभी बड़े सम्मान की दृष्टि से देखा जाता था। इसकी नींव मजबूत शैक्षणिक मूल्यों पर रखी गई थी। लेकिन आज लोगों को धमकियां दी जा रही हैं और छात्रों को विरोध-प्रदर्शन करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। हम अराजकता नहीं चाहते; हम एक स्वस्थ शैक्षणिक वातावरण चाहते हैं। हम यहां संवाद चाहते हैं, धमकियां नहीं।"
भाषा पारुल नरेश
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