बंगाल विधानसभा चुनाव: छिटपुट हिंसा के बीच शाम पांच बजे तक करीब 90 प्रतिशत मतदान
माधव
- 29 Apr 2026, 06:49 PM
- Updated: 06:49 PM
(फोटो के साथ)
कोलकाता, 29 अप्रैल (भाषा) पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण में छिटपुट हिंसा के बीच शाम पांच बजे तक 3.21 करोड़ मतदाताओं में से करीब 90 प्रतिशत ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया।
भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में कुछ समय के लिए तनाव का माहौल दिखा जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और भाजपा के शुभेंदु अधिकारी, जो इस प्रतिष्ठित सीट पर चुनाव लड़ रहे थे, ने एक ही बूथ क्षेत्र में एक-दूसरे पर जमकर आरोप-प्रत्यारोप लगाए।
शाम पांच बजे तक राज्य में 89.99 प्रतिशत मतदान हुआ। राज्य के पूर्वी बर्धमान में सबसे अधिक 92.46 प्रतिशत मतदान हुआ, उसके बाद हुगली में 90.34 प्रतिशत मतदान हुआ।
नदिया में 90.28 प्रतिशत, उत्तर 24 परगना में 89.74 प्रतिशत, दक्षिण 24 परगना में 89.57 प्रतिशत, हावड़ा में 89.44 प्रतिशत, उत्तर कोलकाता में 87.77 प्रतिशत और दक्षिण कोलकाता में 86.11 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।
शाम छह बजे तक मतदान जारी रहा। राजनीतिक पर्यवेक्षकों ने कहा कि मतदान के अंतिम आंकड़े पहले चरण में देखी गई रिकॉर्ड 93.19 प्रतिशत भागीदारी के करीब पहुंच सकते हैं या उसे पार कर सकते हैं।
कोलकाता के भवानीपुर और दक्षिण 24 परगना के बसंती से लेकर नदिया के छपरा और हावड़ा के बल्ली तक, दिन भर बंगाल के जाने-माने चुनावी परिदृश्य के अनुरूप ही माहौल छाया रहा – मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें, बूथ स्तर पर झड़पें और राजनीतिक खींचतान।
इन सबके बीच, यह देखना बाकी है कि सत्ता-विरोधी लहर और मतदाता सूची में संशोधन से राज्य सचिवालय, नबन्ना में सत्ता के समीकरण में कोई बदलाव आएगा या नहीं।
इस चरण में जिन 142 सीट के लिए मतदान होगा उनमें से 123 सीट पर सत्तारूढ़ पार्टी ने वर्ष 2021 के चुनाव में जीत दर्ज की थी।
कोलकाता, हावड़ा, हुगली, नादिया, उत्तर और दक्षिण 24 परगना और पूर्वी बर्धमान के इस क्षेत्र में पैठ बनाए बिना भाजपा के लिए सरकार बनाना संभव नहीं है।
मतदान सुबह सात बजे शुरू हुआ तथा कोलकाता, हावड़ा, उत्तर और दक्षिण 24 परगना, नदिया, हुगली और पूर्व बर्धमान जिलों में मतदान केंद्रों के बाहर मतदाताओं की कतारें दिखीं। ये क्षेत्र बंगाल के चुनावी राजनीतिक केंद्र माने जाते हैं।
इस चरण में मतदान के लिए पात्र कुल मतदाताओं में से 1.57 करोड़ महिलाएं हैं और 792 ट्रांसजेंडर हैं।
टीएमसी ने मतदान को इस बात का प्रमाण माना कि उसकी कल्याणकारी नीतियां और ममता बनर्जी की दक्षिण बंगाल पर पकड़ बरकरार है।
इसके विपरीत, भाजपा ने इसे इस बात का संकेत माना कि कथित भ्रष्टाचार, भर्ती घोटालों, कानून-व्यवस्था संबंधी चिंताओं और सत्ता विरोधी लहर को लेकर लोगों का गुस्सा सत्तारूढ़ दल के खिलाफ एक मौन लामबंदी में तब्दील हो गया है।
एक निर्वाचन अधिकारी ने कहा, ''कुछ इलाकों में मामूली घटनाओं को छोड़कर मतदान शांतिपूर्ण ढंग से जारी है। हमने संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है।''
चक्रबेड़िया में एक ही बूथ क्षेत्र पर बनर्जी और अधिकारी सुबह-सुबह पहुंचे जिसने मुख्यमंत्री के चुनावी गढ़ भवानीपुर को केंद्र बिंदु बना दिया। इससे प्रतिष्ठा की इस लड़ाई का प्रतीकात्मक महत्व और बढ़ गया जिसे पिछले विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम सीट पर चुनाव के दोहराव के रूप में देखा जा रहा है, जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता ने उन्हें 2021 में हराया था।
स्थानीय तृणमूल कांग्रेस नेताओं को कथित तौर पर धमकाने की शिकायतें मिलने के बाद बनर्जी पहले से ही बूथ के बाहर बैठी दिखीं, तभी केंद्रीय बलों की भारी तैनाती के बीच अधिकारी भी वहां पहुंचे।
अपनी कार से उतरते हुए अधिकारी ने घोषणा की, ''मैं किसी भी तरह की गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं करूंगा।''
बनर्जी ने भाजपा पर केंद्रीय बलों, पुलिस पर्यवेक्षकों और निर्वाचन अधिकारियों का इस्तेमाल करके चुनाव में धांधली करने का आरोप लगाया।
उन्होंने पत्रकारों से कहा, ''भाजपा इस चुनाव में धांधली करना चाहती है। बंगाल में चुनाव आमतौर पर शांतिपूर्ण होते हैं। क्या यहां गुंडा राज है?'' उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवान मंगलवार देर रात तृणमूल कांग्रेस के नेताओं के घरों में घुस गए और इलाके में दहशत फैला दी।
बनर्जी ने आरोप लगाया कि चुनाव पर्यवेक्षक भाजपा के इशारे पर काम कर रहे हैं और दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं को जिलों में चुनिंदा तरीके से निशाना बनाया जा रहा है।
अधिकारी ने इन आरोपों को ''हताशा'' का संकेत बताते हुए खारिज कर दिया और दावा किया कि बनर्जी को यह एहसास हो गया है कि उन्हें ''एक भी वोट'' नहीं मिलने वाला है।
बनर्जी आमतौर पर अपना वोट डालने के लिए दिन में देर से कालीघाट स्थित अपने आवास से निकलकर मित्रा इंस्टीट्यूशन स्कूल जाती हैं। इस बार वह सुबह आठ बजे से पहले ही मतदान केंद्र पहुंच गईं। उन्होंने चेतला, पद्मपुकुर और चक्रबेड़िया का दौरा किया, जिससे भवानीपुर और दक्षिण बंगाल की व्यापक चुनावी लड़ाई के महत्व का पता चलता है।
बाद में कालीघाट क्षेत्र में उस वक्त तनाव फैल गया जब अधिकारी एक मतदान केंद्र पर पहुंचे और तृणमूल कार्यकर्ताओं ने उनके खिलाफ नारे लगाए जिसके बाद पुलिस ने हस्तक्षेप किया। विपक्ष के नेता ने निर्वाचन आयोग से अतिरिक्त केंद्रीय बलों की तैनाती की मांग करते हुए शिकायत दर्ज कराई।
सुरक्षा बलों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया। अधिकारी ने आरोप लगाया कि वे ''बाहरी लोग हैं जो चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं''।
जैसे ही वह उस इलाके में पहुंचे तृणमूल के कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने उनके खिलाफ 'जय बांग्ला' और 'चोर, चोर' के नारे लगाए जबकि भाजपा कार्यकर्ताओं ने इसके जवाब में 'जय श्री राम' के नारे लगाए।
कई जिलों से हिंसा, तोड़फोड़ और तनाव की खबरें सामने आईं।
नदिया जिले के छपरा में एक चुनावी अभ्यास के दौरान एक बूथ के अंदर भाजपा के एक मतदान एजेंट पर कथित तौर पर हमला किया गया। भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों पर उसके एजेंट पर हमला करने का आरोप लगाया, जबकि सत्तारूढ़ पार्टी ने इस आरोप से इनकार किया। शांतिपुर में भाजपा के एक शिविर कार्यालय में तोड़फोड़ की घटना हुई।
दक्षिण 24 परगना के भांगर में इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) ने आरोप लगाया कि उसके मतदान एजेंटों को मतदान केंद्र में प्रवेश करने से रोका गया।
हावड़ा के बाली निर्वाचन क्षेत्र में लिलुआ के एक मतदान केंद्र पर ईवीएम में खराबी के कारण मतदान में देरी हुई जिससे तनाव पैदा हो गया। उत्तेजित मतदाताओं को काबू में करने के लिए केंद्रीय बलों ने लाठीचार्ज किया। इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया।
आमडांगा में भी एक मतदान केंद्र के पास बाइक सवार समर्थकों के गैरकानूनी रूप से इकट्ठा होने की शिकायत मिलने के बाद पुलिस और आरएएफ (त्वरित कार्य बल) के कर्मी भीड़ को खदेड़ते दिखे।
पानीहाटी में भाजपा उम्मीदवार एवं आरजी कर पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ को विरोध का सामना करना पड़ा और तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर उनकी कार रोक दी। वहीं, जगदल में एक मतदान केंद्र के पास हथियार बरामद होने से तनाव फैल गया जिसके बाद पुलिस और केंद्रीय बलों ने स्थिति को संभाला।
दक्षिण 24 परगना के बसंती विधानसभा क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार विकास सरदार ने बुधवार को आरोप लगाया कि जब वह निर्वाचन क्षेत्र में मतदान केंद्रों का दौरा कर रहे थे तब ''200-250 तृणमूल के गुंडों'' ने उनकी कार पर हमला किया और उनके चालक से मारपीट की।
तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
पहले चरण में जहां भाजपा ने उत्तर बंगाल में अपनी जीत को बरकरार रखने की कोशिश की थी, वहीं इसके विपरीत अंतिम चरण में लड़ाई पूरी तरह से तृणमूल कांग्रेस के सबसे मजबूत गढ़ तक सिमट गई है।
सत्तारूढ़ पार्टी ने 2021 में इन 142 सीट में से 123 सीट जीती थीं और भाजपा ने केवल 18 तथा आईएसएफ ने एक सीट पर जीत दर्ज की थी। इस चुनाव में भाजपा का दक्षिणी गढ़ में सेंध लगाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है जिसके राज्य में सत्ता के लिए गंभीर चुनौती पेश करने की उम्मीद है।
दक्षिण बंगाल में मतदान से पहले लाखों नाम हटा दिए गए थे। इसके तहत उत्तर 24 परगना में 12.6 लाख से अधिक, दक्षिण 24 परगना में 10.91 लाख, कोलकाता में लगभग 6.97 लाख और हावड़ा में लगभग छह लाख लोग मतदाता सूची से बाहर हो गए।
कम से कम 25 निर्वाचन क्षेत्रों में हटाए गए नामों की संख्या पिछली जीत के अंतर से अधिक है।
भाषा संतोष माधव
माधव
2904 1849 कोलकाता