हाई-स्पीड ट्रेन बनाने का ठेका सिर्फ बीईएमएल को देना समझ से परेः वंदे भारत डिजाइनर
रमण
- 29 Apr 2026, 09:55 PM
- Updated: 09:55 PM
(जीवन प्रकाश शर्मा)
नयी दिल्ली, 29 अप्रैल (भाषा) देश की पहली स्वदेशी सेमी-हाई स्पीड ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस के सूत्रधार सुधांशु मणि ने उच्च गति वाली ट्रेनों के डिजाइन एवं विनिर्माण का काम केवल बीईएमएल को दिए जाने के रेल मंत्रालय के फैसले पर नाखुशी जताई है।
मणि ने कहा कि इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ), चेन्नई के पास लंबी दूरी वाले ट्रेनो के डिजाइन एवं विनिर्माण का खासा अनुभव है, जबकि बीईएमएल का इस क्षेत्र में सीमित अनुभव रहा है।
रेल मंत्रालय की उत्पादन इकाई आईसीएफ हर साल औसतन 3,000 से अधिक कोच बनाती है, जिनमें पारंपरिक और आधुनिक दोनों तरह के कोच शामिल हैं।
वहीं, रक्षा मंत्रालय के अधीन संचालित बीईएमएल रक्षा, वैमानिकी, मेट्रो और अवसंरचना जैसे क्षेत्रों में काम करती है।
सरकार ने 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत 2024 में बीईएमएल को 250 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली बुलेट ट्रेन (बी-28) का एक सेट विकसित करने का ठेका दिया था, जिसे 2027 तक तैयार किया जाना है। इसके अलावा, 16 अन्य ट्रेनों का ठेका भी बीईएमएल को देने की प्रक्रिया जारी होने की खबरें हैं।
उन्होंने कहा कि बीईएमएल की मुख्य लाइन वाले यात्री कोच डिजाइन करने की क्षमता अभी साबित नहीं हुई है। उन्होंने यह भी दावा किया कि वंदे भारत के स्लीपर संस्करण के विकास में अधिकांश डिजाइन इनपुट आईसीएफ ने ही दिए थे।
मणि ने पीटीआई-भाषा से कहा, "मौजूदा ऑर्डर के तहत दो ट्रेन सेट की आपूर्ति 2027 से पहले संभव नहीं दिखती और उनके प्रदर्शन का परीक्षण 2028 तक ही पूरा हो पाएगा। ऐसे में एक ही कंपनी पर अत्यधिक भरोसा करना मेरी समझ से परे है।"
उन्होंने सुझाव दिया कि हाई-स्पीड ट्रेन के निर्माण में प्रतिस्पर्धी और मजबूत पारिस्थितिकी तैयार करने के लिए आईसीएफ और निजी क्षेत्र की अन्य कंपनियों को भी शामिल किया जाना चाहिए।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में बेंगलुरु स्थित बीईएमएल परिसर में हाई-स्पीड रेल निर्माण के लिए खास तौर पर विकसित 'आदित्य' परिसर का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि बी-28 ट्रेन का डिजाइन आईसीएफ और बीईएमएल मिलकर तैयार कर रहे हैं, जबकि इसका विनिर्माण बीईएमएल के अत्याधुनिक संयंत्र में होगा।
भाषा प्रेम प्रेम रमण
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