आरएसएस समर्थित कर्मचारी संगठन ने वामपंथी गढ़ रहे यादवपुर विश्वविद्यालय में 'शाखा' लगाई
वैभव
- 13 May 2026, 12:08 PM
- Updated: 12:08 PM
कोलकाता, 13 मई (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) समर्थित पश्चिम बंगाल विश्वविद्यालय कर्मचारी परिषद के सदस्यों ने यादवपुर विश्वविद्यालय के फुटबॉल मैदान में अभ्यास किया और 'शाखा' लगाई।
यह कार्यक्रम इस बात का संकेत है कि एक ऐसे संस्थान में भगवा खेमे का प्रभाव बढ़ रहा है जिसे लंबे समय से वामपंथी गढ़ माना जाता रहा है।
कर्मचारी परिषद के सचिव पलाश माजी ने कहा कि मंगलवार सुबह साढे़ छह बजे से अभ्यास और बौद्धिक सत्र आयोजित किए गए। उन्होंने घोषणा की कि परिसर को "पुनः राष्ट्रीयकृत" किया जाएगा और "माओवादी प्रभाव से मुक्त" किया जाएगा।
इससे पहले बुधवार को संघ समर्थक कर्मचारियों ने एक रैली निकाली जिसमें उन्होंने भगवा झंडे लेकर कला-विज्ञान चौराहे से अरबिंदो भवन तक नारे लगाते हुए मार्च किया।
माजी ने दावा किया कि विश्वविद्यालय, जो पारंपरिक रूप से वामपंथी छात्र राजनीति और सक्रियता के लिए जाना जाता है, "अब परिसर में राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं करेगा।"
उन्होंने आपत्तिजनक भित्तिचित्रों और दीवार पर लिखे लेखों को हटाने की योजना की भी घोषणा की और कहा कि दैनिक शाखा में शारीरिक प्रशिक्षण के साथ-साथ छात्रों और कर्मचारियों के बीच राष्ट्रवाद को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वैचारिक चर्चाएं भी होंगी।
यह घटनाक्रम भाजपा के बंगाल में सत्ता में आने के बाद राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों में अपनी मजबूत उपस्थिति बनाने के संघ से जुड़े संगठनों द्वारा किए जा रहे प्रयासों के बीच हुआ है।
यादवपुर विश्वविद्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि संघ से संबद्ध शिक्षकों के संगठन 'अखिल भारतीय राष्ट्रीय शिक्षक महासंघ' (एबीआरएसएम) ने सोमवार को कुलपति चिरंजीव भट्टाचार्य से मुलाकात कर परिसर में सख्त अनुशासन लागू करने की मांग की।
इस बीच, विश्वविद्यालय ने बुधवार को केंद्र की 'पीएम-श्री' योजना के तहत नवाचार और उद्यमिता पर तीन दिवसीय मार्गदर्शन कार्यक्रम शुरू किया, जो 15 मई तक होगा।
'पीएम-श्री' पहल का पूर्व की तृणमूल कांग्रेस सरकार ने विरोध किया था।
सोमवार को विश्वविद्यालय के कुलपति के कक्ष की दीवारों पर भाजपा विचारक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की तस्वीर स्वामी विवेकानंद, रवींद्रनाथ टैगोर और अन्य प्रख्यात हस्तियों की तस्वीरों के साथ लगाई गई। इससे पहले मुखर्जी की तस्वीर कक्ष में नहीं थी।
कुलपति ने बताया कि उन्हें यह तस्वीर दो-तीन दिन पहले ही उपहार में मिली थी और उन्होंने कहा कि मुखर्जी एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद थे।
संघ के पदाधिकारियों ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में शाखाओं की संख्या में पिछले कुछ वर्षों में तेज़ी से वृद्धि हुई है। 2012 में लगभग 1,350 शाखाएं लगती थीं जो 2026 में 4,325 से अधिक हो गई हैं। उन्होंने कहा कि यह राज्य में संघ की विचारधारा की बढ़ती जनस्वीकृति को दर्शाता है।
भाषा शोभना वैभव
वैभव
1305 1208 कोलकाता