महबूबा ने पाकिस्तान के साथ संवाद के संबंध में होसबाले की टिप्पणी का स्वागत किया
माधव
- 13 May 2026, 08:55 PM
- Updated: 08:55 PM
श्रीनगर, 13 मई (भाषा) पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले की इस टिप्पणी का स्वागत किया कि पाकिस्तान के साथ संवाद के लिए हमेशा एक रास्ता खुला रहना चाहिए, और कहा कि मुद्दों को सुलझाने के लिए बातचीत के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है।
महबूबा ने यहां पत्रकारों से कहा, ''हम इसका स्वागत करते हैं। यह पीडीपी के रुख को पुष्ट करता है, विशेषकर (पार्टी के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद) सईद के रुख को, कि अगर जम्मू-कश्मीर में शांति कायम करनी है, तो पाकिस्तान के साथ बातचीत का द्वार हमेशा खुला रहना चाहिए। बातचीत जारी रहनी चाहिए, क्योंकि इसके अलावा कोई और रास्ता नहीं है।''
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के प्रसिद्ध कथन ''आप दोस्त बदल सकते हैं, लेकिन पड़ोसी नहीं'' का हवाला देते हुए, मुफ्ती ने कहा कि अगर आरएसएस सरकार्यवाह (महासचिव) ने यह कहा होता कि भारत को पाकिस्तान से बात करने की जरूरत है तो यह अच्छी बात होती।
उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजराइल भी बातचीत के जरिए ईरान के साथ मुद्दों को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं।
पीडीपी प्रमुख ने कहा, ''एक तरफ ईरान जैसा छोटा देश है और दूसरी तरफ अमेरिका और इजराइल जैसी महाशक्तियां। उन्होंने ईरान पर इतने हमले किए, लेकिन इन सबके बाद भी वे बातचीत के जरिए इस मुद्दे का कोई समाधान चाहते हैं।''
'ऑपरेशन सिंदूर' का जिक्र करते हुए महबूबा ने कहा, ''दोनों पक्षों को यह एहसास हो गया है'' कि बातचीत होनी चाहिए। इस अभियान के दौरान भारत ने पाकिस्तान में आतंकी शिविरों पर सैन्य हमले किए थे।
उन्होंने कहा, ''मनमोहन सिंह और वाजपेयी के कार्यकाल के दौरान जब संवाद प्रक्रिया जारी थी, तब जम्मू कश्मीर पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ा था। हमने इसका अनुभव किया है। आतंकवाद में कमी आई थी; लोगों की गिरफ्तारियां और अत्याचार कम हो गए थे।''
पीडीपी अध्यक्ष ने कहा कि उन्हें उन खबरों की जानकारी है कि पिछले दो-तीन महीनों से भारत और पाकिस्तान के सेवानिवृत्त जनरलों और नौकरशाहों के बीच किसी तीसरे देश में बातचीत की प्रक्रिया शुरू हो गई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह प्रक्रिया प्रभावी ढंग से आगे बढ़ेगी जिससे जम्मू-कश्मीर के माहौल पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
उन्होंने कहा, ''अगर सचमुच ऐसा होता है, तो इससे जम्मू कश्मीर के माहौल पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। लोगों को संदेह के घेरे में रखने, परेशान करने और उन्हें देश-विरोधी कहे जाने से कुछ राहत मिलेगी।''
भाषा आशीष माधव
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