बंगाल : हावड़ा, सियालदह रेलवे स्टेशन परिसरों में अतिक्रमण रोधी अभियान चलाए गए
दिलीप
- 17 May 2026, 08:30 PM
- Updated: 08:30 PM
(तस्वीरों के साथ)
कोलकाता, 17 मई (भाषा) पश्चिम बंगाल में हावड़ा और सियालदह रेलवे स्टेशन परिसरों में रविवार को अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया गया, जिसके तहत अवैध दुकानों और ढांचों को ध्वस्त कर दिया गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
हावड़ा और सियालदह टर्मिनल देश के सबसे व्यस्त रेलवे स्टेशन में शामिल हैं, जिनका इस्तेमाल रोजाना लाखों उपनगरीय और एक्सप्रेस ट्रेन यात्री करते हैं।
अधिकारियों ने बताया कि गंगा घाट से हावड़ा स्टेशन परिसर तक फैले क्षेत्र में अस्थायी दुकानों और अवैध ढांचों को आधी रात के बाद चलाए गए अतिक्रमण विरोधी अभियान के तहत बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया।
उन्होंने बताया कि रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ), राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी), रेलवे अधिकारियों और हावड़ा नगर पुलिस की ओर से संयुक्त रूप से चलाए गए अभियान के दौरान किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पूरे क्षेत्र में भारी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई थी।
यात्रियों की सुविधा के लिए रेलवे की जमीन खाली कराने की पहल के तहत, बस स्टैंड और गंगा घाट क्षेत्र के पास फुटपाथ और सार्वजनिक स्थानों पर कब्जा कर बनाई गई कई अस्थायी दुकानों और ढांचों को बुलडोजर की मदद से हटा दिया गया।
अधिकारियों और स्थानीय सूत्रों ने बताया कि अभियान के दौरान हावड़ा स्टेशन क्षेत्र से लगभग 150 फेरीवालों और दुकानों को हटाया गया। उन्होंने बताया कि प्रभावित लोगों में खाद्य पदार्थ, फल, खिलौने और दैनिक उपयोग की आवश्यक वस्तुएं बेचने वाले विक्रेता शामिल थे।
हालांकि, रेलवे ने अभियान को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया, लेकिन पूछे जाने पर अधिकारियों ने बताया कि यह नियमित अभियान का हिस्सा था।
रेलवे भूमि पर अतिक्रमण के कारण दोनों स्टेशन में आने-जाने वाले यात्रियों को वर्षों से भारी भीड़भाड़ और असुविधा का सामना करना पड़ रहा था।
मौके से प्राप्त तस्वीरों में पुलिस को इलाके के बड़े हिस्से में अवरोधक लगाते हुए और सड़क किनारे खाद्य पदार्थ, प्लास्टिक के सामान और अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुएं बेचने वाली दुकानों को बुलडोजर के जरिये ध्वस्त करते हुए देखा जा सकता है।
कुछ फेरीवालों ने आरोप लगाया कि उन्हें अभियान शुरू करने से पहले पर्याप्त नोटिस नहीं दिया गया था। उन्होंने दावा किया कि इस अभियान के कारण उनकी आजीविका बुरी तरह से प्रभावित हुई है।
कई विक्रेताओं ने कहा कि कुछ दुकानें बरसों पुरानी हैं। उन्होंने अधिकारियों से पुनर्वास या वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की।
एक फेरीवाले ने कहा, "सौंदर्यीकरण और उचित प्रबंधन होना चाहिए, लेकिन गरीब विक्रेताओं का पुनर्वास भी होना चाहिए।"
अभियान से प्रभावित एक दुकानदार ने कहा, "अगर पुनर्वास नहीं किया गया, तो हमें आत्महत्या करनी पड़ेगी।"
चश्मदीदों ने बताया कि जब विक्रेताओं ने अभियान का विरोध करने की कोशिश की, तो वहां कुछ समय के लिए तनाव पैदा हो गया और पुलिसकर्मियों एवं प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी बहस तथा धक्का-मुक्की हुई। हालांकि, बाद में स्थिति पर काबू पा लिया गया।
अधिकारियों के मुताबिक, सियालदह मंडल ने अतिक्रमण विरोधी अभियान के तहत रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म संख्या 1 से 21 तक फेरी और स्टॉल लगाने वाले दुकानदारों को हटा दिया, ताकि टर्मिनल के अंदर यात्रियों की सुगम आवाजाही सुनिश्चित की जा सके।
उन्होंने बताया कि अभियान के तहत स्टेशन परिसर से लगभग 250 फेरीवालों और स्टॉल को हटाया गया।
अधिकारियों ने बताया कि सभी प्लेटफॉर्म फेरीवालों से मुक्त कर दिए गए हैं और अब वहां सिर्फ यात्रियों की आवाजाही की अनुमति होगी।
इससे पहले, सियालदह रेलवे स्टेशन के बाहर के इलाकों में भी अवैध ढांचों और फुटपाथ पर कब्जा हटाने के उद्देश्य से अतिक्रमण रोधी अभियान चलाए गए थे।
भाषा पारुल दिलीप
दिलीप
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