वकील से मुख्यमंत्री तक: केरल में कांग्रेस की वापसी का चेहरा बने वी डी सतीशन
अमित
- 18 May 2026, 12:51 PM
- Updated: 12:51 PM
( तस्वीरों सहित )
तिरुवनंतपुरम, 18 मई (भाषा) वडास्सेरी दामोदर मेनन सतीशन ने सोमवार को केरल के नये मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। कोच्चि के एक वकील से नेता बने सतीशन ने अपने तीखे भाषणों और संगठनात्मक अनुशासन के बल पर कांग्रेस में अपनी पहचान बनाई।
संयमित सार्वजनिक व्यवहार और विधानसभा के भीतर वाम सरकार पर आक्रामक हमलों के लिए पहचाने जाने वाले वी डी सतीशन को उनके समर्थक 'वीडी' या 'वीडीएस' कहते हैं। पांच वर्ष पहले राज्य विधानसभा में विपक्ष का नेता बनाए जाने के बाद सतीशन ने केरल में कांग्रेस पार्टी को फिर से मजबूत बनाने में मुख्य भूमिका निभायी।
विपक्ष के नेता के रूप में सतीशन ने कथित भाई-भतीजावाद और वित्तीय अनियमितताओं समेत कई मुद्दों पर पिनराई विजयन नीत वाम सरकार को घेरते हुए कांग्रेस को युवा नेतृत्व और अधिक ऊर्जावान चुनाव अभियान की ओर अग्रसर किया।
उन्होंने नौ अप्रैल को हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस नीत संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) का नेतृत्व करते हुए गठबंधन को सत्ता तक पहुंचाया। इसके साथ ही यूडीएफ एक दशक बाद केरल में फिर से सत्तारूढ़ हुआ।
समर्थक उन्हें व्यावहारिक और आसान पहुंच वाला नेता मानते हैं, जबकि आलोचकों का कहना है कि उनकी सबसे बड़ी चुनौती विकास और चुनावी अभियान के दौरान किए गए कल्याण संबंधी वादों के बीच संतुलन बनाना होगी।
61 वर्षीय सतीशन राज्य विधानसभा में कोच्चि के निकट स्थित परावुर सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं।
कांग्रेस आलाकमान ने केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में सतीशन के प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए उन्हें मुख्यमंत्री पद के लिए चुना। इस दौरान उन्होंने भ्रष्टाचार के आरोपों, कानून-व्यवस्था की समस्याओं और राज्य के वित्तीय संकट को प्रमुखता से उठाया तथा कई बार सीधे मुख्यमंत्री विजयन पर निशाना साधा।
सतीशन इससे पहले कभी मंत्री नहीं रहे, लेकिन उनके सहयोगी उन्हें अनुशासित और मीडिया की समझ रखने वाला नेता बताते हैं। वहीं कांग्रेस के भीतर उनके आलोचकों का कहना है कि उनकी केंद्रीकृत कार्यशैली से कई बार गुटबाजी से जूझ रही पार्टी के वरिष्ठ नेता नाराज हुए।
सतीशन को कांग्रेस संगठन में युवा चेहरों को आगे लाने और विपक्षी गठबंधन की अधिक साफ-सुथरी तथा आधुनिक छवि पेश करने का श्रेय भी दिया जाता है।
विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान वह के. करुणाकरण, ए. के. एंटनी और ओमन चांडी जैसे दिग्गज नेताओं के बाद कांग्रेस के बड़े जननेता के रूप में उभरे। उनकी लोकप्रियता उस समय साफ दिखी जब मुख्यमंत्री पद के लिए वरिष्ठ नेता के. सी. वेणुगोपाल के नाम पर भी विचार किए जाने की खबरों के बीच हजारों समर्थक सड़कों पर उतर आए।
केरल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सतीशन ने कहा था कि यदि कांग्रेस नीत यूडीएफ स्पष्ट बहुमत हासिल करने में विफल रहता है तो वह ''राजनीतिक वनवास'' में चले जाएंगे।
उन्होंने भरोसे के साथ कहा था कि यूडीएफ 100 सीट का आंकड़ा पार करेगा और चुनाव परिणामों में गठबंधन के मजबूत प्रदर्शन के साथ उनका यह दावा सही साबित हुआ।
केरल कांग्रेस के कई कार्यकर्ताओं के अनुसार इस जीत की नींव 2021 विधानसभा चुनाव में हार के बाद के कठिन दौर में पड़ी, जब राहुल गांधी ने सतीशन को विपक्ष का नेता बनाए जाने का समर्थन किया।
उस समय जिसे जोखिम भरा फैसला माना जा रहा था, अब पार्टी के भीतर उसे निर्णायक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।
जमीनी स्तर पर लगातार सक्रिय रहने और स्थानीय मुद्दों पर ध्यान दिये जाने की उनकी रणनीति ने संगठन और मतदाताओं दोनों का भरोसा फिर से मजबूत किया।
इस दौरान उन्हें प्रमुख हिंदू जातीय नेताओं--संख्यात्मक रूप से प्रभावशाली एझवा समुदाय के नेता वेल्लापल्ली नटेशन और उनकी अपनी सामुदायिक संस्था एनएसएस के नेता जी. सुकुमारन नायर--के विरोध का भी सामना करना पड़ा।
छात्र राजनीति से निकलकर केरल के सबसे मुखर विपक्षी नेताओं में शामिल हुए सतीशन ने कानूनी समझ और राजनीतिक रणनीति के मेल से अपनी अलग पहचान बनाई है।
एर्नाकुलम जिले के नेट्टूर में जन्मे सतीशन की राजनीतिक यात्रा कॉलेज परिसर से शुरू हुई। वह एस. एच. कॉलेज, थेवरा और बाद में महात्मा गांधी विश्वविद्यालय में छात्र राजनीति में सक्रिय रहे, जहां उन्होंने कई महत्वपूर्ण छात्र नेतृत्व पद संभाले। नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) में उनकी सक्रियता ने कांग्रेस में उनकी स्थिति को मजबूत किया।
केरल उच्च न्यायालय में वकालत कर चुके सतीशन ने 1990 के दशक के मध्य में परावुर सीट से चुनावी राजनीति में प्रवेश किया। वह अपना पहला चुनाव हार गए थे, लेकिन अगली बार जीत हासिल कर उन्होंने वापसी की और तब से लगातार कई चुनावों में इस सीट को बरकरार रखा।
पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता के. करुणाकरण के करीबी माने जाने वाले सतीशन 2006, 2011, 2016 और 2021 में लगातार विधायक चुने गए। 2021 विधानसभा चुनाव में उन्होंने 21,301 मतों के अंतर से जीत दर्ज की थी।
कांग्रेस संगठन में उन्होंने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के सचिव और केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के उपाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद भी संभाले हैं।
विधानसभा में चर्चाओं और हस्तक्षेपों के जरिए भी सतीशन सुर्खियों में आए। अंतरराज्यीय लॉटरी मुद्दे पर पूर्व वित्त मंत्री टी. एम. थॉमस आइजैक के साथ उनकी चर्चित बहस ने नीतिगत मुद्दों पर केंद्रित नेता के रूप में उनकी छवि को और मजबूत किया।
उनके नेतृत्व में यूडीएफ ने कई चुनावों में बेहतर प्रदर्शन किया, जिनमें उपचुनावों में जीत और लोकसभा चुनाव में केरल में मजबूत प्रदर्शन शामिल है। स्थानीय निकाय चुनाव में भी गठबंधन के बेहतर प्रदर्शन का श्रेय समर्थक उनके टीमवर्क आधारित नेतृत्व को देते हैं।
भाषा मनीषा अमित
अमित
1805 1251 तिरुवनंतपुरम