बिहार में अन्य राज्यों से आने वाले लघु खनिज वाहनों के लिए 10 जून से ट्रांजिट पास अनिवार्य
रमण
- 04 Jun 2026, 07:07 PM
- Updated: 07:07 PM
पटना, चार जून (भाषा) बिहार सरकार ने अन्य राज्यों से लघु खनिज लेकर राज्य में प्रवेश करने वाले सभी वाहनों के लिए 10 जून से अंतरराज्यीय ट्रांजिट पास (आईएसटीपी) अनिवार्य कर दिया है।
राज्य के खान एवं भूतत्व मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी देते हुए कहा कि खनिज परिवहन के कुशल प्रबंधन और निगरानी के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है। इससे राज्य में खनिज परिवहन व्यवस्था अधिक पारदर्शी होगी और राजस्व बढ़ेगा।
मंत्री ने बताया कि यह प्रावधान बिहार खनिज (समानुदान, अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण निवारण) नियमावली, 2019 (यथा संशोधित) के नियम 41 के तहत लागू किया गया है। इसके अंतर्गत अन्य राज्यों से बालू, पत्थर, स्टोन चिप्स, मोरम और स्टोन डस्ट जैसे लघु खनिज लेकर आने वाले वाहनों को बिहार की सीमा में प्रवेश के समय ट्रांजिट पास प्राप्त करना होगा।
उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा निर्धारित विनियामक शुल्क के अनुसार जिन राज्यों से प्राप्त खनिज के परिवहन चालान में खनिज का वजन अंकित होगा, उनके लिए 60 रुपये प्रति टन की दर से ट्रांजिट पास लेना होगा। वहीं जिन चालानों में खनिज का आयतन अंकित होगा, उनके लिए 85 रुपये प्रति घनमीटर की दर से ट्रांजिट पास अनिवार्य होगा।
कुमार ने कहा कि राज्य में तेजी से हो रहे अवसंरचना विकास कार्यों के कारण लघु खनिजों की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में खनिजों के आयात, परिवहन और उपयोग से संबंधित समुचित एवं विश्वसनीय आंकड़ों का उपलब्ध होना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि बिहार में अवसंरचना विकास की गति तेज होने के कारण पड़ोसी तथा अन्य राज्यों से बड़ी मात्रा में बालू, पत्थर समेत विभिन्न लघु खनिज बाहर से मंगाया जा रहा है। वर्तमान में इन खनिजों की मात्रा, प्रकार और परिवहन की निगरानी के लिए कोई समग्र प्रणाली लागू नहीं थी। नई व्यवस्था के तहत प्रणाली के एकीकरण के माध्यम से राज्य की सीमा में प्रवेश करने वाले खनिज लदे वाहनों की डिजिटल निगरानी की जाएगी।
मंत्री ने कहा कि इस निर्णय से अन्य राज्यों से आने वाले लघु खनिजों के परिवहन पर प्रभावी निगरानी सुनिश्चित होगी तथा अवैध परिवहन और एक ही चालान के आधार पर कई बार खनिज ढुलाई किए जाने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगेगा। साथ ही बाहर से आने वाले खनिजों का सटीक आंकड़ा उपलब्ध होने से नीतिगत निर्णय लेने में भी सुविधा होगी।
उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था से राज्य के राजस्व में वृद्धि होगी, खनिजों के वैध स्रोत की प्रामाणिकता सुनिश्चित होगी तथा खनन और परिवहन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी एवं प्रौद्योगिकी आधारित बनेगी।
भाषा कैलाश
राजकुमार रमण
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0406 1907 पटना