भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 682 अरब डॉलर पर, 11 महीने के आयात के लिए पर्याप्त: आरबीआई
रमण
- 05 Jun 2026, 12:52 PM
- Updated: 12:52 PM
मुंबई, पांच जून (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को कहा कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार 682.3 अरब डॉलर के मजबूत स्तर पर है जो लगभग 11 महीनों के आयात के लिए पर्याप्त है।
चालू वित्त वर्ष की दूसरी द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि विभिन्न नीतिगत पहल भुगतान संतुलन को मजबूत करने में मदद करेंगी।
उन्होंने बताया कि इन उपायों में प्रमुख व्यापार साझेदारों के साथ हाल के समझौते, बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति, एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम, ऊर्जा बदलाव को बढ़ावा, सीमावर्ती देशों के लिए एफडीआई नियमों में ढील, बाह्य यानी विदेशों से वाणिज्यिक उधार (ईसीबी) ढांचे का उदारीकरण और अन्य कदम शामिल हैं।
उन्होंने कहा, '' भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 29 मई 2026 तक 682.3 अरब डॉलर के मजबूत स्तर पर था, जो लगभग 11 महीने के आयात और विदेशी ऋण (89.1 प्रतिशत) जैसे भंडार पर्याप्तता के मानकों के हिसाब से पर्याप्त है।''
गवर्नर ने कहा, '' हमारा विदेशी मुद्रा भंडार बाहरी झटकों से सुरक्षा प्रदान करता है। हमारे पास नियामकीय तथा बाजार-आधारित कई साधन हैं जिनसे आवश्यकता पड़ने पर प्रभावी कदम उठाए जा सकते हैं। इस संदर्भ में हम सतर्क हैं और व्यवस्थित बाजार स्थिति बनाए रखने के लिए जो भी आवश्यक होगा करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।''
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 22 मई को समाप्त सप्ताह में 7.51 अरब डॉलर घटकर 681.38 अरब डॉलर रहा।
इस वर्ष 27 फरवरी को समाप्त सप्ताह में यह भंडार 728.49 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंचा था, लेकिन पश्चिम एशिया संघर्ष शुरू होने के बाद कई सप्ताह तक इसमें गिरावट आई। इसका कारण रुपये पर दबाव बढ़ा और भारतीय रिजर्व बैंक को डॉलर बेचकर विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करना पड़ा।
देश का विदेशी मुद्रा भंडार दो जनवरी, 2026 को समाप्त सप्ताह में 686.801 अरब डॉलर था।
मल्होत्रा ने कहा कि केंद्रीय बैंक अर्थव्यवस्था की उत्पादक आवश्यकताओं को पूरा करने और मौद्रिक नीति के प्रभावी प्रसारण के लिए बैंकिंग प्रणाली में पर्याप्त नकदी सुनिश्चित करेगा।
उन्होंने कहा कि 2025-26 में वैश्विक आर्थिक उथल-पुथल के बीच भारत ने ऊंचे शुल्क और व्यापार से जुड़ी अनिश्चितताओं का सफलतापूर्वक सामना किया।
गवर्नर ने कहा कि ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी और व्यापार नीति से जुड़ी अनिश्चितताएं 2026-27 में भारत के चालू खाते के घाटे के बढ़ने का जोखिम उत्पन्न करती हैं।
उन्होंने कहा कि सेवा व्यापार में अधिशेष और विदेश से आने वाले धन प्रेषण कुछ राहत प्रदान करेंगे।
भाषा निहारिका रमण
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