दिल्ली में लागू होगा आपदा प्रबंधन कानून, जिलाधिकारी को अनधिकृत निर्माण पर मिलेगा कार्रवाई का अधिकार
सुभाष
- 05 Jun 2026, 11:01 PM
- Updated: 11:01 PM
नयी दिल्ली, पांच जून (भाषा) मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को कहा कि दिल्ली सरकार भ्रष्टाचार के दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों से नुकसान की भरपाई कराएगी और आपदा प्रबंधन अधिनियम (डीएमए) 2005 लागू करेगी।
मुख्यमंत्री की टिप्पणी ऐसे वक्त आई है जब तीन दिन दिन पहले दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर स्थित एक होटल में लगी भीषण आग में 21 लोगों की मौत हो गई थी, जिसे निर्माण नियमों की अनदेखी करके बनाया गया था।
गुप्ता द्वारा कई विभागों के साथ की गई बैठक में आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 को लागू करने का निर्णय लिया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा, "लापरवाह या भ्रष्टाचार में संलिप्त पाए जाने वाले अधिकारियों को अब आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के विभिन्न प्रावधानों के तहत कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा, जिसमें भारी जुर्माने के साथ दो साल तक की कैद की सजा का प्रावधान है।"
उन्होंने कहा कि उन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी जिनकी लापरवाही या मिलीभगत से अवैध निर्माण, अग्निसुरक्षा नियमों का उल्लंघन या अन्य खतरनाक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है।
दिल्ली के गृह मंत्री आशीष सूद ने इससे पहले कहा था कि दिल्ली सरकार आदेशों के उल्लंघन और मिलीभगत के लिए दो साल की जेल की सजा लागू करने के वास्ते डीएमए अधिनियम का इस्तेमाल करेगी।
उन्होंने कहा, "इस अधिनियम के तहत अधिकारियों के वेतन, पेंशन और यहां तक कि उनकी संपत्तियों से नुकसान की वसूली करने के प्रावधान हैं।"
सूद ने कहा कि मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से स्पष्ट किया है कि सरकारी नुकसान के मुआवजे की प्रक्रिया अब केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगी।
एक बयान के अनुसार, गुप्ता ने कहा, "राजस्व वसूली अधिनियम, 1890 के तहत, सरकार को हुए नुकसान की भरपाई दोषी अधिकारियों के वेतन, पेंशन और संपत्तियों से की जाएगी। इसके अलावा, बिल्डर, संपत्ति मालिकों और कॉलोनाइजर (कॉलोनी विकसित करने वाले व्यक्ति) के बैंक खातों तथा चल एवं अचल संपत्तियों को कुर्क किया जाएगा।"
इसके अलावा दिल्ली में विभिन्न एजेंसियों और निकायों के बीच प्रशासनिक अधिकारों के बिखराव के कारण अक्सर नियमों का कड़ाई से पालन नहीं हो पाता था और अधिकारी जिम्मेदारी लेने से बचते थे। इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए सरकार ने जिलाधिकारियों की शक्तियों को और प्रभावी बनाने का फैसला किया है।
सूद ने कहा कि जिलाधिकारियों को इमारतों के नियमों के उल्लंघन की पहचान करने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने कहा कि भूतल और चार मंजिल से ऊपर की किसी भी इमारत को तुरंत सील कर दिया जाएगा।
उन्होंने कहा, "जिलाधिकारियों के पास जल्द ही अपने प्रशासनिक जिलों के भीतर किसी भी विभाग में काम करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करने, सीधे अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने, प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश देने, छुट्टी मंजूर या रद्द करने और अपने कर्तव्यों का पालन करने में विफल रहने वाले अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने का व्यापक अधिकार होगा।"
मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को शहर में अवैध निर्माण हटाने को लेकर दैनिक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।
नए आदेशों के तहत जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में संयुक्त निरीक्षण समितियों का गठन किया गया है।
इन समितियों में पुलिस, अग्निशमन सेवा और दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के अधिकारी शामिल होंगे।
सूद ने कहा, "वे अपने-अपने क्षेत्रों में सभी गेस्ट हाउस, होटल, रेस्तरां, विवाह भवन और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का गहन निरीक्षण करेंगे और एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट सौंपेंगे।"
गुप्ता ने कहा कि वैध पूर्णता प्रमाण पत्र न रखने वाली इमारतों को नए पानी या बिजली के कनेक्शन या अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) नहीं दिए जाएंगे।
उन्होंने सभी जारी अवैध निर्माण और उनके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की विस्तृत सूची भी मांगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की एपीएआर (वार्षिक कार्य मूल्यांकन रिपोर्ट) में नकारात्मक टिप्पणी दर्ज की जाएगी, जिसका प्रभाव उनके भविष्य के करियर पर पड़ेगा।
उन्होंने जोर देकर कहा कि जवाबदेही केवल अधीनस्थ कर्मचारियों तक सीमित नहीं होगी बल्कि वरिष्ठ अधिकारियों तक बढ़ाई जाएगी।
गुप्ता ने कहा, "जहां कहीं भी निर्माण में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, वहां काम तुरंत रोक दिया जाना चाहिए, और इमारत के मालिक, बिल्डर या कॉलोनाइजर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने तथा कानूनी कार्रवाई शुरू करने की प्रक्रिया बिना किसी देरी के शुरू होनी चाहिए।"
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से अधिकारियों को 17.5 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली इमारतों पर ध्यान केंद्रित करने का निर्देश दिया।
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