अदाणी को लाभ पहुंचाने के लिए आईएएस अधिकारी को विड़िण्गम के एमडी पद से हटाया गया: माकपा
नेत्रपाल
- 04 Jul 2026, 04:33 PM
- Updated: 04:33 PM
तिरुवनंतपुरम, चार जुलाई (भाषा) केरल में विपक्षी दल मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने शनिवार को आरोप लगाया कि भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की अधिकारी दिव्या एस. अय्यर को हाल में विड़िण्गम अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह के प्रबंध निदेशक (एमडी) पद से हटाने का उद्देश्य अदाणी समूह को लाभ पहुंचाना था।
पार्टी ने मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन से मांग की कि वह अय्यर के तबादले का कारण बताए।
माकपा के वरिष्ठ नेता और कन्नूर जिला सचिव के. के. रागेश ने फेसबुक पर एक पोस्ट में यह आरोप लगाया।
यह आरोप ऐसे समय में लगाया गया है, जब बंदरगाह की रियायतधारक कंपनी 'अदाणी विड़िण्गम पोर्ट प्राइवेट लिमिटेड' (एवीपीपीएल) में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी स्विट्जरलैंड की दिग्गज पोत परिवहन कंपनी 'मेडिटेरेनियन शिपिंग कंपनी' (एमएससी) को हस्तांतरित करने संबंधी 'अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड' (एपीएसईजेड) के प्रस्ताव को लेकर विवाद जारी है।
रागेश ने आरोप लगाया कि अय्यर ने विड़िण्गम बंदरगाह रियायत समझौते के प्रावधानों में बदलाव के प्रयासों का विरोध कर राज्य के हितों की रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने आरोप लगाया कि अदाणी समूह के अधिकारियों ने अय्यर को पद से हटवाने के लिए कई बार प्रयास किए थे।
उन्होंने दावा किया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने ऐसे प्रयासों को खारिज करते हुए कंपनी से कहा था कि सरकारी अधिकारियों से जुड़े मामलों पर सरकार ही निर्णय लेगी।
रागेश के अनुसार, सरकार बदलने के तुरंत बाद अधिकारी का तबादला कर दिया गया और उनकी जगह ऐसे अधिकारी को नियुक्त किया गया जिसे बंदरगाह प्रशासन का कोई अनुभव नहीं था।
अय्यर फिलहाल स्थानीय स्वशासन विभाग की प्रधान निदेशक के रूप में कार्यरत हैं।
वामपंथी नेता ने मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन से यह स्पष्ट करने को कहा कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण परियोजना का नेतृत्व कर रही एक अनुभवी अधिकारी का नयी सरकार के सत्ता संभालते ही तबादला क्यों किया गया।
रागेश ने विशेष विमान से की गई सतीशन की हालिया मंगलुरु यात्रा पर भी सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि अदाणी समूह के अधिकारियों के साथ उस बैठक के ''नतीजे'' अब सामने आने लगे हैं।
उन्होंने मुख्यमंत्री से यात्रा का उद्देश्य और विशेष विमान का खर्च वहन करने वाले व्यक्ति या संस्था के बारे में स्पष्टीकरण देने को कहा।
माकपा नेता ने बंदरगाह विभाग और वित्त विभाग को मुख्यमंत्री के अधीन रखने के सरकार के फैसले की आलोचना की।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्तावित हिस्सेदारी हस्तांतरण की समीक्षा के लिए गठित अधिकारप्राप्त समिति में मुख्यमंत्री के सीधे नियंत्रण वाले विभागों के अधिकारी शामिल हैं, जिससे उसकी स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठते हैं।
रागेश ने कहा कि रियायत समझौते के तहत किसी भी हिस्सेदारी के हस्तांतरण के लिए राज्य सरकार की पूर्व मंजूरी आवश्यक है। उन्होंने सवाल किया कि क्या सरकार प्रस्तावित हिस्सेदारी बिक्री के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के लिए तैयार है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने विड़िण्गम परियोजना में करीब 5,400 करोड़ रुपये का निवेश किया है, जबकि अदाणी समूह ने लगभग 2,400 करोड़ रुपये लगाए हैं और प्रस्तावित सौदे से उसे 13,000 करोड़ रुपये से अधिक का लाभ हो सकता है।
माकपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व बंदरगाह मंत्री वी. एन. वासवन ने भी विड़िण्गम अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह में प्रस्तावित हिस्सेदारी हस्तांतरण को लेकर गंभीर आरोप लगाए।
उन्होंने दावा किया कि यह कदम या तो सत्तारूढ़ संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) के शीर्ष नेतृत्व या मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन की जानकारी से उठाया गया है।
वासवन ने यहां संवाददाताओं से कहा कि प्रस्तावित हिस्सेदारी हस्तांतरण को लेकर ''कुछ रहस्य'' है।
उन्होंने कहा, ''अदाणी समूह अच्छी तरह जानता था कि वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार के कार्यकाल में इस तरह के किसी सौदे की अनुमति नहीं दी जाती इसीलिए उसने सरकार बदलने का इंतजार किया।''
मुख्यमंत्री द्वारा बंदरगाह विभाग अपने पास रखे जाने पर सवाल उठाते हुए वासवन ने कहा कि मौजूदा घटनाक्रम के संदर्भ में यह फैसला भी ''संदेहास्पद'' है।
उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा में सतीशन का यह बयान ''सहज स्पष्टीकरण नहीं'' है कि उन्हें प्रस्तावित हिस्सेदारी हस्तांतरण की जानकारी नहीं थी और इस मुद्दे को लेकर कई सवालों के जवाब अब भी नहीं मिले हैं।
वासवन ने यह भी दावा किया कि पिछली एलडीएफ सरकार ने ओखी चक्रवात से उत्पन्न बाधाओं, कच्चे माल की कमी और लंबे समय तक चले स्थानीय विरोध प्रदर्शनों सहित कई चुनौतियों से पार पाकर विड़िण्गम बंदरगाह के पहले चरण का परिचालन शुरू किया था।
माकपा नेता ने सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की कि प्रस्तावित हिस्सेदारी हस्तांतरण किन परिस्थितियों में सामने आया और क्या राज्य प्रशासन को इसकी पहले से जानकारी थी।
माकपा नेताओं की यह टिप्पणी मुख्यमंत्री सतीशन द्वारा एपीएसईजेड के खिलाफ नाराजगी जताए जाने के कुछ दिन बाद आई है। मुख्यमंत्री ने कहा था कि कंपनी ने सरकार को सूचित किए बिना एवीपीपीएल में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी एमएससी को हस्तांतरित करने के प्रस्ताव की घोषणा की।
भाषा सिम्मी नेत्रपाल
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