हर्ष फायरिंग में महिला की मौत का मामला: बिहार के भाजपा विधायक राजू कुमार सिंह को 4 साल की कैद
माधव
- 04 Jul 2026, 09:56 PM
- Updated: 09:56 PM
नयी दिल्ली, चार जुलाई (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने शनिवार को बिहार से भाजपा विधायक राजू कुमार सिंह को 2018 में हर्ष फायरिंग में एक महिला की मौत के मामले में चार साल की साधारण कैद की सजा सुनाई।
फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश ने कहा कि "कानून के शासन से चलने वाले राज्य में हमें न तो सिंघम की जरूरत है और न ही पुष्पा की"।
विशेष न्यायाधीश ने विशाल गोगने ने बिहार के साहेबगंज के विधायक पर 25 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। विधायक को 31 दिसंबर 2018 की रात फतेहपुर बेरी के एक फार्महाउस में नए साल के जश्न के दौरान अर्चना गुप्ता नाम की मेहमान की मौत के मामले में दोषी ठहराया गया था। यह रकम मुआवजे के तौर पर दी जाएगी।
अदालत ने 34 पन्नों के फैसले में कोई नरमी बरतने से इनकार कर दिया। न्यायाधीश ने कहा कि सिंह साफ तौर पर सत्ता के नशे में चूर थे और गोली चलाकर अपना रुतबा दिखाना चाहते थे। अदालत ने कहा कि ऐसी हरकतें अवैध हथियारों के चलन को बढ़ावा देती हैं और इन्हीं की वजह से राजनीति में 'बाहुबलियों' का दखल बढ़ा है।
न्यायाधीश ने कहा, "कानून के राज वाले राज्य में हमें न तो 'सिंघम' की जरूरत है और न ही 'पुष्पा' की। हालांकि, राजू कुमार सिंह की बेखौफ गोलीबारी की घटना ने इन दोनों ही तरह की सोच को बढ़ावा दिया।" उन्होंने लोकप्रिय फिल्मों के उन दो मुख्य किरदारों का ज़िक्र किया जो कानून के आमने-सामने खड़े हैं और खुलेआम हिंसा करते हैं।
सिंह को आईपीसी की धारा 304 भाग दो के तहत चार साल की साधारण कैद और शस्त्र अधिनियम के तहत 2 महीने की कैद की सज़ा सुनाई गई है।
इस प्रावधान के तहत अधिकतम दस साल की कैद या जुर्माना, या दोनों की सज़ा हो सकती है।
अदालत ने कहा, "सिर्फ़ इसलिए कि किसी दोषी ने पहले जन-सेवा की है, उसे नाममात्र की सज़ा (जैसे एक या दो साल) नहीं दी जा सकती। सरकारी पद, और खासकर चुना हुआ पद, सम्मान और जनता के भरोसे का पद होता है; और जब कोई जन-प्रतिनिधि गंभीर आपराधिक अपराध करता है, तो यह सम्मान और भरोसा धूमिल होता है और उसका उल्लंघन होता है।"
अदालत ने कहा कि सज़ा को बढ़ाने या कम करने पर विचार करने के लिए एकमात्र शुरुआती बिंदु सज़ा की सीमा का मध्य-बिंदु हो सकता है।
अदालत ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सज़ा के मामले में दोषी के साथ अलग या विशेष व्यवहार सिर्फ़ इसलिए नहीं किया जा सकता क्योंकि वह एक विधायक है।
इससे पहले शुक्रवार को, सिंह ने अदालत से उन्हें परिवीक्षा पर रिहा करने का आग्रह किया था। उन्होंने दलील दी कि उनकी किसी की जान लेने की कोई मंशा नहीं थी और एक जन-प्रतिनिधि के तौर पर उनका अब तक का रिकॉर्ड बेदाग रहा है।
सिंह (56) को भारतीय दंड संहिता की धारा 304 भाग-दो (गैर-इरादतन हत्या) और लाइसेंस की शर्तों के उल्लंघन से जुड़े शस्त्र अधिनियम के प्रावधानों के तहत दोषी ठहराया गया था।
यह मामला यहां फतेहपुर बेरी के एक फार्महाउस में नव वर्ष के जश्न के दौरान हर्ष फायरिंग से जुड़ा है, जिसमें एक महिला की मौत हो गई थी।
अदालत ने छह जून को सुनाए गए 97 पन्नों के आदेश में कहा था, "त्योहारों या खुशी के मौकों पर फायरिंग करना एक ऐसी बुराई है, जिससे हमारे देश में अक्सर लोगों की जान चली जाती है।"
अदालत ने कहा था, ''यह मामला भी इसी तरह की एक घटना का उदाहरण है, जिसमें बिहार के कई बार विधायक रह चुके आरोपी राजू कुमार सिंह द्वारा 31 दिसंबर 2018 और एक जनवरी 2019 की दरमियानी रात को नव वर्ष की पार्टी में कथित तौर पर लापरवाही से की गई हर्ष फायरिंग के कारण एक अतिथि की मौत हो गई। अन्य आरोपियों ने कथित रूप से घटना से जुड़े सबूत मिटाए।''
अदालत ने उसके समक्ष पेश सबूतों का उल्लेख करते हुए कहा था कि यह साबित हो गया है कि कई गवाहों ने सिंह की पहचान की और उन्होंने ही वह गोली चलाई थी, जिससे अर्चना गुप्ता की मौत हुई।
भाषा प्रशांत माधव
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