मप्र के मुख्यमंत्री के सलाहकार ने पटवारी को झूठे आरोपों पर कानूनी नोटिस भेजा, माफी की मांग की
संतोष
- 04 Jul 2026, 10:06 PM
- Updated: 10:06 PM
भोपाल, चार जुलाई (भाषा) मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के सांस्कृतिक सलाहकार श्रीराम तिवारी ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी को कानूनी नोटिस भेजकर उन पर झूठे आरोप लगाने का आरोप लगाया है। साथ ही तीन दिन के भीतर सार्वजनिक माफी मांगने की मांग की है और ऐसा नहीं करने पर उन्होंने पांच करोड़ रुपये का मानहानि का दावा दायर करने की चेतावनी दी है।
उज्जैन स्थित 'वीर भारत न्यास' के सचिव रहे तिवारी का आरोप है कि पटवारी ने उन पर यह झूठा आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने उनसे जुड़े न्यास को एक रुपये में प्रमुख सरकारी जमीन पट्टे पर दे दी।
तिवारी के अधिवक्ता हरीश मेहता और उनकी सहयोगी गुंजन चौकसे ने शनिवार को संवाददाताओं से कहा कि पटवारी ने 26 जून को नयी दिल्ली में उनके मुवक्किल के खिलाफ तथ्यहीन और झूठे आरोप लगाए थे।
मेहता ने कहा, ''झूठे आरोपों से मेरे मुवक्किल की प्रतिष्ठा को गंभीर क्षति पहुंची है। इसे लेकर हमने अब पटवारी को कानूनी नोटिस जारी किया है।''
उन्होंने कहा कि पटवारी ने बिना किसी तथ्यात्मक जानकारी या साक्ष्य के तिवारी के खिलाफ आरोप लगाए।
मेहता ने कहा, ''हमने उनसे तीन दिन के भीतर अपने झूठे बयानों पर सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण देने और माफी मांगने को कहा है। यदि वे ऐसा करते हैं तो हम कोई कानूनी कार्रवाई नहीं करेंगे। उन्हें प्रेस और प्रिंट मीडिया के माध्यम से भी खेद व्यक्त करना चाहिए।''
उन्होंने कहा कि पटवारी को प्रेस विज्ञप्ति के आधार पर स्पष्टीकरण देना चाहिए और आरोपों से उनके मुवक्किल की प्रतिष्ठा को हुई क्षति के लिए माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि तिवारी ने पूरे जीवन ईमानदारी और निष्ठा के साथ कार्य किया है।
मेहता ने कहा कि यदि पटवारी माफी नहीं मांगते हैं तो तिवारी उनके खिलाफ पांच करोड़ रुपये के हर्जाने का मानहानि का मुकदमा दायर करेंगे।
उन्होंने दावा किया कि न्यास से जुड़े उनके मुवक्किल के सभी कार्य कानून के अनुरूप किए गए हैं और इसके पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध हैं।
उल्लेखनीय है कि पटवारी ने कुछ दिन पहले नयी दिल्ली में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व वाली मध्यप्रदेश सरकार पर उज्जैन में बड़े भूमि घोटाले में शामिल होने का आरोप लगाया था।
उन्होंने आरोप लगाया था कि करीब 500 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीन 'वीर भारत न्यास' को मात्र एक रुपये में पट्टे पर दी गई तथा यह भी दावा किया था कि न्यास का प्रमुख मुख्यमंत्री के करीबी लोगों में शामिल है।
भाषा दिमो
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