एक देश, एक चुनाव से शासन में स्थायित्व, एवं दीर्घकालिक नियोजन सुनिश्चित हो सकता है: प्रमोद सावंत
माधव
- 10 Jul 2026, 06:24 PM
- Updated: 06:24 PM
(फाइल फोटो के साथ)
पणजी, 10 जुलाई (भाषा) गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने देश में एक साथ चुनाव कराने के विचार का शुक्रवार को पुरजोर समर्थन करते हुए कहा कि ऐसी व्यवस्था से शासन में ज़्यादा स्थिरता आ सकती है, लंबे समय की नीतिगत योजना बनाना संभव हो सकता है और सार्वजनिक संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल हो सकता है।
भाजपा के मुख्यमंत्री ने कहा कि गोवा सरकार 'एक देश, एक चुनाव' से जुड़े प्रस्तावित संवैधानिक सुधार पर केंद्र की विचार-विमर्श प्रक्रिया का पूरी तरह से समर्थन करती है।
सावंत ने यह बात संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के साथ बातचीत के बाद कही। इस समिति के प्रमुख भाजपा के लोकसभा सदस्य पी पी चौधरी हैं और समिति संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2024 का परीक्षण कर रही है।
जेपीसी देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के प्रस्ताव पर बातचीत कर रही है। इसे आम तौर पर 'एक देश, एक चुनाव' कहा जाता है।
बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से कहा कि गोवा ने प्रस्तावित सुधार के पक्ष में समिति के सामने अपनी राय रखी है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को शासन की मजबूती, नीतिगत निरंतरता, चुनाव के कारण होने वाले खर्च में कटौती पर केंद्रित ऐसे बदलावकारी एवं भविष्योन्मुखी सुधार के लिए कदम उठाने पर बधाई दी।
सावंत ने कहा कि चुनाव लोकतंत्र की नींव हैं, लेकिन अलग-अलग राज्यों में बार-बार होने वाले चुनावों का असर अक्सर शासन, प्रशासनिक निरंतरता, नीति निर्माण और बजट नियोजन पर पड़ता है।
उन्होंने कहा कि 'एक साथ चुनाव कराने का क्रम बनने से स्थिरता आयेगी, सरकारों को लंबे समय के विकास पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलेगी, सार्वजनिक संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा एवं सहकारी संघवाद की भावना और मज़बूत होगी तथा देश के संवैधानिक मूल्य भी अक्षुण्ण रहेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गोवा सरकार ने जेपीसी द्वारा की जा रही विचार-विमर्श की प्रक्रिया को अपना पूरा समर्थन दिया है।
जेपीसी के सदस्य भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने शुक्रवार को कहा कि 'एक देश, एक चुनाव' सुधार देश के लिए 'पासा पलटने वाला कानून' साबित हो सकता है क्योंकि इससे बार-बार होने वाले चुनावों में लगने वाले समय और संसाधनों की बचत होगी, जिससे कामकाज बेहतर होगा, निवेश बढ़ेगा और ज़्यादा रोज़गार पैदा होंगे।
वह जेपीसी की संबंधित पक्षों के साथ बैठक के बाद पत्रकारों से बात कर रहे थे।
जेपीसी अपने राष्ट्रव्यापी विचार विमर्श के तहत 10-11 जुलाई को दो दिवसीय गोवा यात्रा पर है।
ठाकुर ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के लागू होने का उदाहरण देते हुए कहा कि देश को इस 'एक राष्ट्र, एक कर' सुधार से लाभ हुआ है।
ठाकुर ने कहा कि बार-बार होने वाले चुनावों का असर राज्य की कमाई, सरकार के कामकाज, न्याय मिलने, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ता है।
उन्होंने यह भी कहा कि समिति ऐसे अप्रत्यक्ष प्रभावों की भी पहचान कर रही है जिन पर अक्सर ध्यान नहीं जाता है।
ठाकुर ने कहा, ''बार-बार चुनाव होने के कई बुरे असर सीधे नहीं दिखते, लेकिन उनका अप्रत्यक्ष असर काफी बड़ा होता है। जब इन सभी पहलुओं का आकलन किया जाएगा और उन्हें समिति की अंतिम रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा, तो मुझे यकीन है कि 'एक देश, एक चुनाव' से देश को होने वाले बड़े फायदों को देखकर हर कोई हैरान रह जाएगा। यह देश के लिए पासा पलटने वाला कानून साबित हो सकता है।''
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत और वरिष्ठ अधिकारियों ने समझाया कि कैसे बार-बार होने वाले चुनाव एक छोटे से राज्य में भी कामकाज पर असर डालते हैं।
भाषा
राजकुमार मनीषा माधव
माधव
1007 1824 पणजी