अदालत ने सरकार से वायनाड भूस्खलन पीड़ितों को समय पर अनुग्रह राशि सुनिश्चित करने को कहा
अविनाश
- 10 Jul 2026, 08:23 PM
- Updated: 08:23 PM
कोच्चि, 10 जुलाई (भाषा) केरल उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह हालिया वायनाड भूस्खलन में मारे गए लोगों के निकटतम परिजनों और घटना में घायल हुए लोगों को अनुग्रह राशि का समय पर भुगतान सुनिश्चित करे।
न्यायमूर्ति ए. के. जयशंकरन नांबियार और न्यायमूर्ति प्रीता ए. के. की पीठ ने इस संबंध में निर्देश जारी करते हुए सरकार से यह रिपोर्ट भी मांगी कि निर्माण स्थल पर काम कब रोका गया था और अगर वहां सारी गतिविधियां रोक दी गई थीं तो श्रमिक वहां क्यों मौजूद थे।
ये निर्देश उस याचिका पर उच्च न्यायालय द्वारा सुनवाई के दौरान जारी किए गए, जिसे अदालत ने वर्ष 2024 में जुलाई में वायनाड जिले के मुंडक्कई और चूरलमाला गांवों में हुए भूस्खलन के बाद स्वतः संज्ञान लेकर शुरू गई थी। घटना में 200 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी।
याचिका केरल में प्राकृतिक आपदाओं की रोकथाम और उनके प्रबंधन से संबंधित है।
पीठ ने देय अनुग्रह राशि के शीघ्र वितरण के अलावा सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश भी दिया कि शव बिना किसी देरी के संबंधित परिवारों को सौंप दिए जाएं।
अदालत ने यह भी कहा कि अनुग्रह राशि और घायलों के उपचार का खर्च फिलहाल सुरंग परियोजना के खाते से लिया जा सकता है। अदालत ने कहा, ''हम बाद में तय करेंगे कि यह राशि किससे वसूल की जानी चाहिए।''
महाधिवक्ता जाजू बाबू के माध्यम से राज्य सरकार ने पीठ को बताया कि प्रशिक्षित श्वान क्षेत्र में कीचड़ और दलदल के कारण शवों का पता लगाने में सफल नहीं हो पाए, इसलिए लापता लोगों की तलाश के लिए मानव श्रम का सहारा लिया जा रहा है।
सरकार ने अदालत को यह भी बताया कि 25 मई के आदेश के अनुपालन के तहत बाहरी कार्यों को छोड़कर, अन्य सभी गतिविधियों को स्थल पर रोक दिया गया था। सरकार ने कहा कि इसके बाद पांच जुलाई को स्थल पर सभी काम रोकने का आदेश दिया गया।
रिपोर्ट में सरकार ने दावा किया कि ''समय पर किए गए हस्तक्षेप'' के कारण मृतकों की संख्या कम रही।
रिपोर्ट में सरकार ने कहा, ''यदि भारी बारिश को देखते हुए वायनाड जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के निर्देश पर पांच जुलाई को काम नहीं रोका गया होता, तो मृतकों की संख्या कई गुना अधिक होती।''
इस पर पीठ ने पूछा, ''फिर कार्यस्थल पर मजदूर क्या कर रहे थे?'' और मामले की अगली सुनवाई तक इस संबंध में जवाब मांगा।
रिपोर्ट में कहा गया कि परियोजना क्रियान्वयन एजेंसी कोंकण रेलवे को बार-बार निर्देश दिए गए थे कि कार्यस्थल से खुदाई की गई मिट्टी हटाई जाए, ताकि उससे कोई खतरा उत्पन्न न हो।
शुक्रवार को आपदा स्थल से एक और शव बरामद होने के बाद भूस्खलन में मरने वालों की संख्या बढ़कर सात हो गई।
वायनाड और कोझिकोड जिलों को जोड़ने के उद्देश्य से बनाई जा रही अनाक्कोम्पोयिल-मेप्पाडी सुरंग परियोजना के स्थल पर सात जुलाई को भूस्खलन हुआ था।
भाषा अमित अविनाश
अविनाश
1007 2023 कोच्चि