उत्तराखंड चिटफंड 'घोटाला': सीबीआई ने मुख्य साजिशकर्ता समेत 18 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया
शफीक
- 10 Jul 2026, 10:25 PM
- Updated: 10:25 PM
नयी दिल्ली, 10 जुलाई (भाषा) केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने अपनी जांच में पाया है कि उत्तराखंड में लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसाइटी (एलयूसीसी) चिटफंड ''घोटाले'' में एक लाख से अधिक निवेशकों के 400 करोड़ रुपये का गबन किया गया। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
संघीय जांच एजेंसी ने शुक्रवार को देहरादून की एक विशेष अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया। इसमें वित्तीय धोखाधड़ी के एक सुनियोजित नेटवर्क का खुलासा किया गया है, जिसके तहत अनियमित जमा योजनाओं के माध्यम से कथित तौर पर करीब 800 करोड़ रुपये जुटाए गए और बाद में मुखैटा कंपनियों तथा बैंक खातों में कई स्तरों पर किए गए लेनदेन के जरिए धन का गबन किया गया।
सीबीआई ने इस मामले में कथित मुख्य साजिशकर्ता समीर अग्रवाल, जो विदेश भाग चुका है, सहित 18 आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), उत्तराखंड निक्षेपक (जमाकर्ता) हित संरक्षण अधिनियम तथा अनियमित जमा योजनाओं पर प्रतिबंध अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आरोपपत्र दाखिल किया है।
करीब आठ महीने की जांच के बाद एजेंसी ने पाया कि वर्ष 2012 में वाजिद खान ने केंद्रीय सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार के यहां एलयूसीसी का बहु-राज्यीय सहकारी समिति के रूप में पंजीकरण कराया था।
सीबीआई के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, ''मुख्य आरोपी समीर अग्रवाल ने वर्ष 2016 में एलयूसीसी का प्रबंधन अपने हाथ में लिया और नया निदेशक मंडल गठित कराया। उसके बाद एलयूसीसी ने उत्तराखंड में स्थित अपनी 50 से अधिक शाखाओं के माध्यम से विभिन्न अनियमित जमा योजनाएं संचालित कीं।''
बयान के अनुसार, वर्ष 2017 में उत्तराखंड के सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार ने एलयूसीसी को राज्य में कामकाज के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) जारी किया था, लेकिन समीर अग्रवाल ने इससे एक वर्ष पहले यानी 2016 में ही अवैध रूप से इसका संचालन शुरू कर दिया था।
एजेंसी ने आरोप लगाया, ''चूंकि एलयूसीसी का कोई वास्तविक कारोबार या वैध आय/लाभ नहीं था। इसलिए जमाकर्ताओं की परिपक्व राशि का भुगतान नए निवेशकों से प्राप्त धन से किया जाता था। इस प्रकार एलयूसीसी उत्तराखंड के आम लोगों के साथ धोखाधड़ी करने के लिए पोंजी योजनाएं चला रही थी।''
सीबीआई की जांच में सामने आया कि एलयूसीसी ने राज्य में ''अभूतपूर्व स्तर पर लोगों को ठगी का शिकार बनाया'' और एक लाख से अधिक भोले-भाले निवेशकों को विभिन्न अनियमित जमा योजनाओं में निवेश करने के लिए लुभाया।
एजेंसी ने आरोप लगाया, ''इन निवेशकों द्वारा जमा की गई कुल राशि लगभग 800 करोड़ रुपये है। एलयूसीसी ने कुछ निवेशकों को आंशिक भुगतान किया, लेकिन धोखाधड़ी की राशि 400 करोड़ रुपये से अधिक है।''
बयान में कहा गया, ''मुख्य आरोपी महाराष्ट्र के मुंबई निवासी समीर अग्रवाल एलयूसीसी के संचालन का मुख्य साजिशकर्ता था और वही इसके प्रबंधन तथा निर्णय लेने की प्रक्रिया को नियंत्रित करता था।''
इसमें कहा गया, ''उसने एलयूसीसी के जरिए अनियमित जमा योजनाएं संचालित करके उत्तराखंड के निवेशकों से करीब 800 करोड़ रुपये जुटाए। उसने किशनलाल उदयलाल जैन और पंकज कुशल सिंह जैन के साथ साजिश करके 10 मुखैटा कंपनियों के बैंक खाते खुलवाए, ताकि एलयूसीसी द्वारा जुटाई गई निवेशकों की धनराशि का गबन और दुरुपयोग किया जा सके।''
बयान में कहा गया, ''जांच में पता चला कि समीर और उसकी पत्नी सानिया अग्रवाल विदेश फरार हो चुके हैं। उन्हें कानूनी प्रक्रिया का सामना करने के लिए वापस लाने हेतु सीबीआई ने उनके खिलाफ नोटिस और परिपत्र जारी किए हैं।''
एजेंसी ने बताया कि एलयूसीसी के महत्वपूर्ण पदाधिकारी एवं अधिकारी शबाब हुसैन, उत्तम कुमार सिंह राजपूत और दिनेश सिंह को भी आरोपपत्र में नामजद किया गया है।
सीबीआई के अनुसार, एलयूसीसी के चेस्ट मैनेजर तरुण कुमार मौर्य, गौरव उर्फ गौरव रोहिला और ममता भंडारी के नाम भी आरोपपत्र में शामिल किये गए हैं। सीबीआई के अनुसार वे विभिन्न शाखाओं से नकद जमा राशि एकत्र करके उसे अलग-अलग स्थानों तक पहुंचाते थे और इस तरह बैंकिंग लेनदेन से बचते थे।
एजेंसी ने कहा कि सुशील कुमार गोखरू नाम के एक व्यक्ति ने किशनलाल उदयलाल जैन और पंकज कुशल सिंह जैन के साथ मिलकर मुंबई में 10 मुखौटा कंपनियों के बैंक खाते खुलवाए, जिनमें उत्तराखंड के निवेशकों से जुटाई गई राशि स्थानांतरित की गई। इन सभी के नाम आरोपपत्र में शामिल किये गए हैं।
इसके बाद यह राशि कई स्तरों पर किए गए बैंकिंग लेनदेन के जरिए सैकड़ों बैंक खातों में भेज दी गई।
सीबीआई ने इस मामले में तरुण कुमार मौर्य, ममता भंडारी, गौरव उर्फ गौरव रोहिला, राजेंद्र सिंह बिष्ट, सुशील कुमार गोखरू, किशनलाल उदयलाल जैन और पंकज कुशल सिंह जैन सहित सात लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार सभी आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं।
भाषा अमित शफीक
शफीक
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