दिल्ली दंगा : आईबी अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में ताहिर हुसैन और चार अन्य दोषी करार
वैभव
- 13 Jul 2026, 09:04 PM
- Updated: 09:04 PM
नयी दिल्ली, 13 जुलाई (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार को आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन और चार अन्य लोगों को 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगे के दौरान खुफिया अधिकारी अंकित शर्मा की हुई सनसनीखेज हत्या का दोषी ठहराया।
भीड़ ने अंकित शर्मा पर हमला किया था और बाद में एक नाले में उनका शव फेंक दिया गया था।
जब अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने ताहिर हुसैन को दोषी ठहराया तब वह फूट-फूटकर रोने लगा। उसे उसके वकील ने ढांढस बंधाया।
घटना के समय ताहिर हुसैन आप पार्षद था, लेकिन मामले में नाम आने के बाद पार्टी ने उसे निलंबित कर दिया।
अदालत ने छह अन्य आरोपियों को बरी भी किया।
अदालत ने ताहिर हुसैन को भारतीय दंड संहिता (भादंसं) की धाराओं 302 (हत्या), 153ए (वैमनस्य को बढ़ावा देना), 149 (दंगा करना), 355 (आपराधिक बल का इस्तेमाल और हत्या) और उसके साथ (149) भी, 148 (घातक हथियार के साथ दंगा करना) और 147 (दंगा करने के लिए सज़ा) के तहत दोषी ठहराया।
हालांकि, उसे भादंसं की धाराओं 120बी (आपराधिक साज़िश) और 109 (उकसाने के लिए सज़ा) और साथ में धारा 149 के आरोपों से बरी कर दिया गया।
अदालत ने नाजिम, कासिम, जावेद, अनस को भी हत्या को छोड़कर अन्य आरोपों के तहत दोषी ठहराया।
अदालत ने इस मामले में हसीन उर्फ मुल्लाजी उर्फ सलमान, फिरोज, गुलफाम, सोयब, समीर खान, मुंतजिम उर्फ मूसा को बरी कर दिया।
न्यायाधीश ने सभी आरोपियों की मौजूदगी में मौखिक तौर पर फैसला सुनाया और पुलिस को आदेश दिया कि वे अनस एवं जावेद को हिरासत में ले लें, जो ज़मानत पर बाहर थे।
विस्तृत फैसले का अभी इंतज़ार है। अदालत ने सजा पर बहस के लिए भी मामले को अभी सूचीबद्ध नहीं किया है।
फैसले के बाद विशेष सरकारी वकील मधुकर पांडे ने कहा कि इसमें समाज की हार हुई है और यह फैसला किसी भी पक्ष की जीत नहीं है।
उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार ने दुख सहा है और अब दोषी ठहराए गए व्यक्ति का परिवार भी दुख सहेगा। उन्होंने कहा, ''ऐसे मामलों में सभी की हार होती है।''
यह मामला अंकित कुमार के पिता रवींद्र कुमार की शिकायत पर दयालपुर थाने में दर्ज प्राथमिकी से संबंधित है।
रवींद्र कुमार के अनुसार खुफिया ब्यूरो (आईबी) में तैनात अंकित शर्मा 25 फरवरी, 2020 को कार्यालय से घर लौटे थे और उसके बाद बाहर निकले थे।
शिकायतकर्ता के मुताबिक, जब अंकित काफी देर तक नहीं लौटे, तब परिवार वालों ने उन्हें खोजना शुरू किया।
रवींद्र कुमार के अनुसार, तभी स्थानीय लोगों ने उन्हें बताया कि उनके बेटे की हत्या कर दी गई है और उसका शव चांद बाग पुलिया इलाके में एक मस्जिद के पास खजूरी खास नाले में फेंक दिया गया है। बाद में अंकित शर्मा का शव नाले से बरामद किया गया।
अपनी शिकायत में रवींद्र कुमार ने आरोप लगाया कि उनके बेटे की हत्या तत्कालीन आप पार्षद ताहिर हुसैन और अन्य लोगों ने की थी। शिकायत में कहा गया है कि ये लोग कथित तौर पर हुसैन के दफ्तर में जमा हुए थे और हत्या के बाद अंकित के शव को ठिकाने लगा दिया था।
दिल्ली की एक अदालत ने 24 मार्च 2023 को ताहिर हुसैन और 10 अन्य लोगों के खिलाफ आरोप तय किए थे।
आरोपपत्र के मुताबिक, पुलिस ने कहा कि ताहिर हुसैन 24 और 25 फरवरी 2020 को अपने घर और चांद बाग पुलिया के पास मस्जिद से भीड़ की अगुवाई कर रहा था तथा उसने इसे सांप्रदायिक रंग दिया।
आरोपपत्र के अनुसार ताहिर हुसैन ने हिंदुओं के खिलाफ मुसलमानों को उकसाया और भड़काया। इसके अनुसार ताहिर हुसैन ने कहा कि हिंदुओं ने कई मुसलमानों को मार डाला है और 'शेरपुर चौक पर उनकी दुकानों में आग लगा दी है, इसलिए किसी भी हिंदू को बख्शा न जाए।'
ताहिर हुसैन के उकसावे पर भीड़ हिंसक हो गई और उसने दुकानें जलानी शुरू कर दीं, हिंदुओं पर पत्थर और पेट्रोल बम फेंके एवं उनके घरों को भी निशाना बनाया।
आरोपपत्र में आरोप लगाया गया है कि बेकाबू भीड़ ने दंगाई का रूप ले लिया और दंगे के दौरान अंकित शर्मा को पकड़कर वह चांद बाग पुलिया तक घसीटकर ले गयी। वहां लोगों ने धारदार हथियारों से हमला करके उनकी जान ले ली और उनकी लाश को नाले में फेंक दिया।
यह घटना फरवरी 2020 में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों के दौरान उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़की सांप्रदायिक हिंसा के समय हुई थी।
दंगे में 53 लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हो गए थे।
भाषा
राजकुमार वैभव
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