ई-केवाईसी के बाद 'लाडकी बहिन' योजना से 81 लाख महिलाओं के नाम हटाए गए : मंत्री तटकरे
दिलीप
- 13 Jul 2026, 09:10 PM
- Updated: 09:10 PM
मुंबई, 13 जुलाई (भाषा) महाराष्ट्र की महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने सोमवार को कहा कि कई महीनों तक चली ई-केवाईसी सत्यापन प्रक्रिया के बाद राज्य सरकार की 'लाडकी बहिन योजना' से करीब 81 लाख पंजीकृत लाभार्थियों के नाम हटा दिए गए हैं।
इस बीच, विपक्षी दलों ने 'लाडकी बहिन योजना' के क्रियान्वयन में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए दावा किया कि सरकार ने राजनीतिक फायदे के लिए इसका इस्तेमाल किया।
तटकरे ने मुंबई में संवाददाताओं से बातचीत में स्पष्ट किया कि अपात्र लाभार्थियों, आयकर दाताओं और सरकारी कर्मचारियों के परिवारों को व्यवस्थित तरीके से हटाने के लिए ई-केवाईसी प्रक्रिया जरूरी थी, क्योंकि ये लोग इस योजना के दायरे में नहीं आते हैं।
उन्होंने कहा, "जब यह योजना शुरू की गई थी, तब इसका लाभ उठाने के लिए 2.63 करोड़ लोगों ने पंजीकरण कराया था, लेकिन उनमें से 2.47 करोड़ महिलाएं लाभार्थी बनीं, जिन्हें हर महीने आर्थिक मदद मिली। जब विभाग ने अपात्र लाभार्थियों को हटाने के लिए ई-केवाईसी सत्यापन प्रक्रिया शुरू की, तो यह संख्या और कम होने लगी।"
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत महाराष्ट्र सरकार की ओर से 28 जून 2024 को घोषित 'मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना' का मकसद महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। इस योजना के तहत 21 से 65 साल की उम्र की पात्र महिलाओं के बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के जरिये हर महीने 1,500 रुपये अंतरित किए जाते हैं।
योजना से 93 लाख लाभार्थियों को हटाए जाने के दावे वाली खबरों के बारे में पूछे जाने पर तटकरे ने कहा, "ई-केवाईसी प्रक्रिया के बाद लाभार्थियों की संख्या घटकर 1.67 से 1.7 करोड़ तक हो गई थी। अगर आप इस संख्या को योजना की शुरुआत के समय पंजीकरण कराने वाले लोगों की संख्या में से घटाएं, तो आपको 92 से 93 लाख का आंकड़ा मिलेगा। लेकिन असल में राज्य सरकार 2.47 करोड़ महिलाओं को आर्थिक सहायता दे रही थी और बाकी पंजीकरण शुरू से ही अपात्र पाए गए थे।"
मंत्री ने कहा कि योजना के लिए पंजीकरण कराने वाली और इसका लाभ उठाने वाली लगभग 62 लाख महिलाओं ने बार-बार समय सीमा बढ़ाए जाने के बावजूद ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी नहीं की।
उन्होंने बताया, "लगभग 16 लाख लाभार्थियों की सालाना पारिवारिक आय ढाई लाख रुपये से ज्यादा पाई गई, जबकि 4.42 लाख महिलाओं को इसलिए अयोग्य घोषित कर दिया गया, क्योंकि उनके परिवार का कोई सदस्य सरकारी कर्मचारी था।"
तटकरे ने कहा कि कुछ पुरुषों और सरकारी कर्मचारियों ने भी लाडकी बहिन योजना के लिए पंजीकरण कराया था और इसका लाभ उठाया था।
उन्होंने कहा कि ई-केवाईसी प्रक्रिया अगस्त 2025 में शुरू हुई थी और लाभार्थियों को इसे पूरा करने के लिए छह महीने का समय दिया गया था, साथ ही कमियों को ठीक करने के लिए अप्रैल तक मदद भी प्रदान की गई थी।
तटकरे ने कहा कि उन महिलाओं की शिकायतों की भी जांच की जा रही है, जिन्होंने ई-केवाईसी पूरा किए जाने के बावजूद लाभ नहीं मिलने का आरोप लगाया है।
मंत्री के अनुसार, सरकार ने आठ से दस महीने पहले सरकारी कर्मचारियों से पैसे वसूलना शुरू कर दिया था और वसूली गई रकम सरकारी खजाने में जमा कराई जा रही है।
इस बीच, विपक्षी दलों ने सरकार पर हमला तेज करते हुए आरोप लगाया कि 2024 के राज्य विधानसभा चुनावों से कुछ महीने पहले शुरू की गई लाडकी बहिन योजना का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए किया गया।
कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने योजना के क्रियान्वयन में अनियमितताओं का आरोप लगाया।
सपकाल ने कहा, "सरकार ने इस योजना के लिए 29,693 करोड़ रुपये आवंटित किए थे, लेकिन स्वीकृत बजट से 3,541 करोड़ रुपये ज्यादा खर्च कर दिए और इस अतिरिक्त व्यय का कोई रिकॉर्ड या हिसाब-किताब भी नहीं रखा। यह सरकार है या लुटेरों का गिरोह?"
उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं के कल्याण से जुड़ी योजनाओं पर खर्च 2024-25 में 261.78 करोड़ रुपये से बढ़कर 33,554 करोड़ रुपये हो गया, जबकि आवास योजनाओं पर खर्च में 54 फीसदी की कमी आई और जलापूर्ति व स्वच्छता पर खर्च 31.81 प्रतिशत घट गया।
कांग्रेस सांसद और पार्टी की मुंबई इकाई की अध्यक्ष वर्षा गायकवाड ने आरोप लगाया कि सरकार ने चुनाव से पहले महिलाओं को "लाडकी बहिन" बताया, लेकिन सत्ता में आने के बाद उन्हें अपात्र करार दिया।
गायकवाड ने सवाल किया, "अगर ये महिलाएं अपात्र हैं, तो उन्हें अब तक लाभ क्यों दिया गया? और अगर वे पात्र हैं, तो उन्हें अब इस योजना से क्यों हटा दिया गया है? क्या वोट पाने के लिए चुनाव से पहले नियमों की अनदेखी की गई और बाद में आर्थिक तंगी की वजह से उन्हें लागू किया गया?"
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरदचंद्र पवार (राकांपा-शप) के प्रवक्ता ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि यह योजना महिलाओं का भरोसा और वोट जीतने के लिए शुरू की गई थी, लेकिन सरकार ने अब "92 लाख से ज्यादा महिलाओं को बाहर का रास्ता दिखा दिया है।"
उन्होंने सवाल किया, "लाभार्थियों की संख्या 2.4 करोड़ से कम हो गई है और अब लगभग 38 फीसदी महिलाएं इससे बाहर हो गई हैं। क्या ये महिलाएं चुनाव से पहले पात्र थीं और चुनाव के बाद अचानक अपात्र हो गईं? क्या यह एक कल्याणकारी योजना थी या सिर्फ चुनावी हथकंडा?"
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रवक्ता अनिल शिदोरे ने इस घटनाक्रम को "परेशान करने वाला" बताया।
शिदोरे ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "लाखों लाभार्थियों को हटाने का मतलब यह है कि अपात्र लाभार्थियों पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किए गए। इनमें सरकारी कर्मचारियों के 4.42 लाख परिजन, 29,000 पुरुष और 8,000 सरकारी कर्मचारी शामिल हैं। कैग ने तय बजट से 3,541 करोड़ रुपये ज्यादा खर्च होने की ओर भी इशारा किया है। इस योजना की घोषणा जून 2024 में की गई थी, अगस्त में दो किस्तें जारी की गईं और उसके तुरंत बाद विधानसभा चुनाव हुए। जागरूक नागरिक आसानी से खुद नतीजा निकाल सकते हैं।"
भाषा पारुल दिलीप
दिलीप
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