बंदोपाध्याय, दस्तीदार ने लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात की, सदन में बैठने की व्यवस्था पर चर्चा: सूत्र
सुरेश
- 14 Jul 2026, 09:26 PM
- Updated: 09:26 PM
नयी दिल्ली, 14 जुलाई (भाषा) तृणमूल कांग्रेस छोड़कर 'नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' (एनसीपीआई) में शामिल होने वाले लोकसभा सांसद सुदीप बंदोपाध्याय और काकोली घोष दस्तीदार ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की। सूत्रों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
सूत्रों के अनुसार, उन्होंने निचले सदन में पार्टी के 20 सांसदों के बैठने की व्यवस्था पर चर्चा की।
सूत्रों ने बताया कि सोमवार को हुई इस बैठक में उन्होंने नए संसद भवन में पार्टी के लिए कार्यालय आवंटित करने पर भी बातचीत की।
एनसीपीआई में शामिल हुए सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सूचित किया है कि उन्होंने सुदीप बंदोपाध्याय को अपना सदन का नेता, शताब्दी रॉय को उपनेता और काकोली घोष दस्तीदार को मुख्य सचेतक नियुक्त किया है।
यह बैठक संसद के मानसून सत्र से पहले और भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के सहयोगी के तौर पर एनसीपीआई को संसदीय मान्यता देने की प्रक्रिया के बीच हुई है।
सूत्र ने बताया कि बंदोपाध्याय ने हाल ही में गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की थी।
सूत्रों के अनुसार, पार्टी जल्द ही एनसीपीआई को संसदीय मान्यता दिलाने के लिए अध्यक्ष के कार्यालय को औपचारिक पत्र सौंप सकती है। इन नेताओं के 19 जुलाई को होने वाली सर्वदलीय बैठक में भी शामिल होने की संभावना है।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के साथ यह बैठक ऐसे समय में हुई है, जब तृणमूल कांग्रेस ने पार्टी छोड़कर एनसीपीआई में शामिल हुए 20 सांसदों को अयोग्य ठहराने की मांग करते हुए याचिकाएं दायर की हैं।
लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी ने इससे पहले ओम बिरला से मुलाकात कर संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के तहत बागी 20 सांसदों को अयोग्य घोषित करने की मांग करते हुए 20 अलग-अलग याचिकाएं सौंपी थीं।
बनर्जी ने अपनी याचिका में कहा था कि दूसरे दल में शामिल होकर इन सांसदों ने स्वेच्छा से तृणमूल कांग्रेस की सदस्यता छोड़ दी है, इसलिए उन्हें अयोग्य ठहराया जाना चाहिए।
उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से यह भी आग्रह किया था कि पार्टी के अलग गुट होने का दावा करने वाले किसी भी समूह को कोई मान्यता, दर्जा या सुविधा नहीं दी जाए।
सूत्रों ने बताया कि सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष के साथ हुई बैठक में सांसदों को अयोग्य ठहराने संबंधी याचिकाओं का मुद्दा नहीं उठा।
भाषा खारी सुरेश
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