नगालैंड में आतंकी हमले में जवान की मौत पर शोक में डूबा पुंछ का सीमावर्ती गांव
खारी
- 14 Jul 2026, 06:21 PM
- Updated: 06:21 PM
मेंढर/जम्मू, 14 जुलाई (भाषा) नगालैंड में तैनात हवलदार मोहम्मद इकबाल ने जम्मू कश्मीर के पुंछ जिले के सीमावर्ती गांव कलार में सितंबर में लौटने का वादा किया था। लेकिन आतंकी हमले में उनकी मौत के साथ ही यह वादा अधूरा रह गया है। जो उनके घर लौटने का इंतजार कर रहे थे, अब वे उनकी अंतिम यात्रा की तैयारी कर रहे हैं।
इकबाल की मौत सोमवार को नगालैंड के चुमौकेदिमा जिले में 'इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस' (आईईडी) विस्फोट में हुई। इस विस्फोट में चार सुरक्षाकर्मियों और एक नागरिक समेत पांच अन्य लोग घायल हो गए। यह विस्फोट अपराह्न करीब दो बजे शोखुवी इलाके के पास हुआ। बताया जा रहा है कि अभियानगत गतिविधियों के दौरान असम राइफल्स के एक वाहन को निशाना बनाकर यह हमला किया गया था।
अपने बेटे को खोने के गम में डूबे उनके बुजुर्ग पिता चौधरी कालू ने भर्राई आवाज में कहा, ''इकबाल सेना में चालक के रूप में तैनात था। परिवार के साथ छुट्टी बिताने के बाद वह करीब एक महीने पहले ही दोबारा ड्यूटी पर गया था। उसने वादा किया था कि घास कटाई के मौसम (सितंबर) में हमारी मदद करने के लिए वह अगले कुछ महीनों में फिर घर आएगा।''
घर पर उनका स्वागत करने के बजाय, परिवार अब उनके पार्थिव शरीर को लाने की तैयारी कर रहा है। उनका पार्थिव शरीर बृहस्पतिवार को उनके पैतृक गांव लाया जा सकता है, जहां उन्हें पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जाएगी।
इकबाल के परिवार में उनकी पत्नी और तीन बेटे हैं; सबसे बड़ा बेटा 12वीं कक्षा में पढ़ता है, जबकि छोटे बेटे आठवीं और छठी कक्षा में हैं। परिवार इस गहरे सदमे से उबरने की कोशिश कर रहा है, वहीं रिश्तेदार उन्हें एक समर्पित पति और पिता, एक कर्तव्यनिष्ठ बेटे और एक ऐसे सैनिक के तौर पर याद करते हैं जिन्होंने अटूट निष्ठा के साथ देश की सेवा की।
पूर्व ग्राम सरपंच एवं इकबाल के चाचा नूर मोहम्मद ने इस क्षति को बेहद दुखद बताया। उन्होंने कहा, ''उसने देश के लिए अपने प्राणों का बलिदान देकर इस नश्वर संसार को छोड़ दिया। पूरा गांव शोक में डूबा है। वास्तव में, मेंढर क्षेत्र के सभी लोग इस दुख की घड़ी में परिवार के साथ खड़े हैं।''
उन्होंने कहा, ''वह मेरा भतीजा था, इसलिए यह केवल पूरे गांव का ही नहीं, बल्कि हमारे परिवार के लिए भी अपूरणीय क्षति है। हम बहुत दुखी हैं, लेकिन हम अल्लाह का शुक्र अदा करते हैं कि उसने देश की सेवा में अपनी जान दी।''
पड़ोसी और रिश्तेदार बड़ी संख्या में परिवार के घर पहुंचे और मोहम्मद इकबाल की शोकाकुल पत्नी तथा उनके बेटों को सांत्वना दी।
भाषा आशीष खारी
खारी
1407 1821 मेंढर/जम्मू