जबरन तेजाब पिलाने से आंतरिक जख्मों के पीड़ितों को राहत के लिए कानून में किये बदलाव : केंद्र
वैभव
- 14 Jul 2026, 10:05 PM
- Updated: 10:05 PM
नयी दिल्ली, 14 जुलाई (भाषा) केंद्र सरकार ने मंगलवार को उच्चतम न्यायालय को सूचित किया कि उसने 'दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016' में संशोधन किए हैं, ताकि इस कानून का लाभ तेजाब हमले के उन पीड़ितों को भी मिल सके जिन्हें जबरन तेजाब पिलाए जाने के कारण अंदरूनी चोटें आई हैं।
प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष केंद्र का पक्ष रखने के लिए पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि कानून में बदलाव के बारे में 22 मई को एक अधिसूचना जारी की गई थी और अब, तेजाब से आने वाली अंदरूनी चोटें भी 'दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम' के दायरे में आती हैं।
शीर्ष अदालत तेजाब हमले की पीड़िता शाहीन मलिक की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। अन्य राहतों के अलावा, याचिका में केंद्र सरकार को कानून में संशोधन करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था ताकि उन मामलों को भी इसमें शामिल किया जा सके जिनमें लोगों को जबरन तेजाब पिलाया गया हो या उन्हें अंदरूनी चोटें आई हों, भले ही बाहरी तौर पर कोई विकृति न हुई हो।
जनहित याचिका में अनुरोध किया गया कि ऐसे पीड़ितों को 'दिव्यांग'की श्रेणी में रखा जाए, ताकि उन्हें कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिल सके।
शीर्ष अदालत ने पहले केंद्र से जरूरी संशोधन को औपचारिक रूप से अधिसूचित करने को कहा था।
सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि 2016 के कानून में एक संशोधन को अधिसूचित किया गया है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि 'तेजाब हमले के पीड़ितों'' में वे लोग भी शामिल हैं जिन्हें बाहरी तौर पर कोई विकृति न होने के बावजूद अंदरूनी चोटें आई हैं।
उन्होंने कहा, ''भारत सरकार ने सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के तहत दिव्यांगजन अधिकारिता विभाग के जरिए 22 मई, 2026 को एक अधिसूचना जारी की, जिसमें दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की अनुसूची में संशोधन किया गया है।''
पीठ ने कहा कि संशोधन को उस तारीख से ही लागू माना जाएगा जिस तारीख से अधिनियम प्रभावी हुआ था।
पीठ ने कहा, ''चूंकि उपरोक्त संशोधन स्पष्टीकरण देने वाला है, इसलिए इसे उस तारीख से लागू माना जाएगा जिस दिन दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 प्रभावी हुआ था। इसके ज़रूरी नतीजे भी होंगे।''
शीर्ष अदालत ने चार मई को 'बर्बरतापूर्ण' तेजाब हमलों के मामलों में 'चिंताजनक बढ़ोतरी' को रेखांकित करते हुए सुझाव दिया था कि केंद्र सरकार ऐसे अपराधों के लिए सजा बढ़ाने पर विचार करे।
भाषा धीरज वैभव
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