मंत्रिमंडल के फैसलों से विनिर्माण को मिलेगी गति, रोजगार के अवसर पैदा होंगे: प्रधानमंत्री मोदी
अजय
- 15 Jul 2026, 09:41 PM
- Updated: 09:41 PM
नयी दिल्ली, 15 जुलाई (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल के सेमिकंडक्टर कार्यक्रम समेत विभिन्न फैसलों से देश में विनिर्माण को गति मिलेगी, रोजगार सृजित होंगे और लोगों का जीवन सुगम होगा।
उन्होंने कहा कि नए सेमीकंडक्टर कार्यक्रम को मंजूरी देना, भारत को सेमीकंडक्टर डिजाइन, विनिर्माण और नवोन्मेष का वैश्विक केंद्र बनाने की सरकार की दीर्घकालीन प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इसके साथ ही मोबाइल फोन विनिर्माण योजना 'मेक इन इंडिया' को बढ़ावा देगी, जबकि यूरिया के लिए राष्ट्रीय निवेश नीति देश को आत्मनिर्भर बनने में मदद करेगी।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को देश में सेमीकंडक्टर परिवेश को मजबूत बनाने, मोबाइल फोन का उत्पादन बढ़ाने और वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण केंद्र के तौर पर स्थिति मजबूत करने के लिए लगभग 1.9 लाख करोड़ रुपये के व्यय वाली दो बड़े विनिर्माण कार्यक्रमों को मंजूरी दी।
मोदी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा, ''भारत का सेमीकंडक्टर सफर और भी जीवंत हो गया है। मंत्रिमंडल ने 1,27,500 करोड़ रुपये के बजट के साथ सेमीकॉन 2.0 को मंजूरी दी है, जो भारत को सेमीकंडक्टर डिजाइन, विनिर्माण और नवोन्मेष का वैश्विक केंद्र बनाने की हमारी प्रतिबद्धता की फिर से पुष्टि करता है।''
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के युवाओं की ताकत से, सेमीकॉन 2.0 सेमीकंडक्टर परिवेश के हर पहलू को मजबूत करेगा।
उन्होंने कहा, ''सेमीकॉन 2.0 अधिक निवेश आकर्षित करेगा, हमारे युवाओं के लिए अधिक मूल्य वाले अवसर पैदा करेगा, आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करेगा और प्रमुख क्षेत्र में प्रौद्योगिकी आत्मनिर्भरता को आगे बढ़ाएगा।''
मोदी ने 'एक्स' पर लिखा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल की विनिर्माताओं को उत्पादन आधारित प्रोत्साहन देने के लिए 62,500 करोड़ रुपये की मोबाइल फोन विनिर्माण योजना को मंजूरी 'मेक इन इंडिया' और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण परिवेश को बढ़ावा देगी।''
उन्होंने कहा, ''मोबाइल फोन विनिर्माण योजना को मंजूरी देने से उत्पादन बढ़ेगा, घरेलू मूल्य सृजन मजबूत होगा, आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी और भारत में वैश्विक स्तर पर प्रतस्पर्धी परिवेश बनेगा। आने वाले कुछ साल में, इस योजना से युवाओं के लिए कई रोजगार के अवसर सृजित होने की उम्मीद है।''
प्रधानमंत्री ने ओडिशा और झारखंड में दो महत्वपूर्ण रेलवे मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी की भी सराहना की, जो इन दो पूर्वी राज्यों में संपर्क और आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देंगी।
उन्होंने कहा, ''मंत्रिमंडल ने रेलवे कर दो अहम मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं... पारादीप-हरिदासपुर लाइन का दोहरीकरण और राजखरसवां-डांगोआपोसी के बीच चौथी लाइन बिछाना...को मंजूरी दी है। ये परियोजनाएं ओडिशा और झारखंड में वृद्धि को और आगे बढ़ाएंगी। इनसे रेलवे नेटवर्क का विस्तार होगा, भीड़-भाड़ कम होगी और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।''
मंत्रिमंडल ने वाराणसी के लिए दो राजमार्ग परियोजनाओं को भी मंजूरी दी। इन परियोजनाओं पर लगभग 25,500 करोड़ रुपये का निवेश होगा।
प्रधानमंत्री ने कहा, ''हम उत्तर प्रदेश में संपर्क सुविधा बढ़ाकर वाराणसी में बाबा विश्वनाथ के दर्शन को और भी सुगम और सुविधाजनक बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
उन्होंने कहा, ''इसी दिशा में, आज हमारी सरकार ने वरुणा नदी के किनारे 6/4-लेन वाले एलिवेटेड गलियारे के निर्माण को मंजूरी दी है। यह परियोजना न केवल सांस्कृतिक महत्व वाले हमारे शहरों के लिए एक मॉडल के तौर पर काम करेगी, बल्कि बुनियादी ढांचा के विकास से यहां के लोगों का जीवन भी आसान होगा।''
उन्होंने कहा, '' इसके साथ हमने गंगा नदी के किनारे एक अत्याधुनिक 6-लेन वाले गलियारे के निर्माण को मंजूरी दी है। इससे शहर के प्रमुख धार्मिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक स्थलों तक पहुंच और बेहतर होगी। साथ ही, सड़क नेटवर्क पर दबाव कम होने से आना-जाना और भी आसान हो जाएगा। यह परियोजना पूर्वांचल में आर्थिक विकास को गति देगी।''
मोदी ने कहा कि सरकार वाराणसी में वैश्विक स्तर के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए प्रतिबद्ध है।
प्रधानमंत्री ने मंत्रिमंडल द्वारा यूरिया के लिए नई राष्ट्रीय निवेश नीति (एनआईपीयू-2026) को मंजूरी दिए जाने की भी सराहना की। इसका उद्देश्य सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाले उर्वरक के मामले में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक करोड़ टन की उत्पादन क्षमता वाले आठ-नौ नए गैस आधारित संयंत्र स्थापित करना हैं।
उन्होंने कहा, ''हमारी सरकार देश भर में अपने किसान भाई-बहनों की भलाई के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रही है। इसी दिशा में, आज राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति, 2026 के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।''
प्रधानमंत्री ने कहा, ''इससे न केवल नए गैस आधारित यूरिया उत्पादन संयंत्र लगाने के लिए निवेश को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि यूरिया उत्पादन में आत्मनिर्भरता के संकल्प को भी नई ताकत मिलेगी।''
भाषा रमण अजय
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