परिसीमन और अन्य विधेयकों का करेंगे विरोध, राम मंदिर और 'एथनॉल' पर चर्चा की मांग करेंगे: कांग्रेस
मनीषा
- 16 Jul 2026, 02:36 PM
- Updated: 02:36 PM
( तस्वीरों सहित )
नयी दिल्ली, 16 जुलाई (भाषा) कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को फैसला किया कि वह 20 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में परिसीमन विधेयक और कई अन्य संभावित विधेयकों का पुरजोर विरोध करेगी तथा राम मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी, पेपर लीक, एथनॉल और विदेश नीति के विषयों को लेकर भी सरकार से चर्चा तथा जवाब की मांग करेगी।
मुख्य विपक्षी दल ने यह भी कहा कि लोकसभा में सत्तापक्ष को दो तिहाई बहुमत मिलने की गुंजाइश नहीं है, फिर भी वह विपक्ष की एकता बनाए रखने के लिए विभिन्न दलों के साथ संपर्क में है।
पार्टी की संसदीय रणनीति को अंतिम रूप देने के लिए कांग्रेस संसदीय दल (सीपीपी) की अध्यक्ष सोनिया गांधी के आवास '10, जनपथ' पर बृहस्पतिवार पूर्वाह्न एक बैठक हुई, जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, संगठन महासचिव के. सी. वेणुगोपाल, राज्यसभा में कांग्रेस के मुख्य सचेतक जयराम रमेश सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे।
बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा कि ''चंदा चोरी-आस्था से धोखा, प्रश्नपत्र लीक और शिक्षा व्यवस्था का सुनियोजित पतन, संस्थानों पर कब्जा, राजनीतिक दलों को तोड़ना, अनेक घोटाले और भ्रष्टाचार के आरोप, कमरतोड़ महंगाई, विदेश नीति की विफलताएं और रणनीतिक भूलें, 3.5 करोड़ वाहन मालिकों पर एथेनॉल मिश्रण (ब्लेंडिंग) थोपना, वनों की बेलगाम कटाई तथा एससी, एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर लगातार हमले'' ऐसे प्रमुख मुद्दे हैं जिन पर कांग्रेस मानसून सत्र में मोदी सरकार से जवाब मांगेगी।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस संसदीय दल की बैठक में जनता के जीवन और भविष्य से जुड़े इन मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक के बाद पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने संवाददाताओं से कहा कि बैठक में संसद सत्र के दौरान पेश किए जा सकने वाले संभावित विधेयकों पर विस्तार से चर्चा हुई।
उन्होंने कहा, ''सुनने में आया है कि गृह मंत्री अमित शाह इस सत्र में परिसीमन विधेयक को वापस लाने का प्रयास कर रहे हैं। इस विषय पर भी बैठक में चर्चा हुई। हम परिसीमन विधेयक का लगातार विरोध करते रहेंगे और इस मुद्दे पर सभी विपक्षी दलों की एकता बनाए रखने का प्रयास करेंगे।''
रमेश ने कहा कि बैठक में 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' संबंधी विधेयक पर भी चर्चा हुई और कांग्रेस 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' के सिद्धांत के ही खिलाफ है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों को पद से हटाने के प्रावधान वाले संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025 का भी कांग्रेस विरोध करेगी।
उनके अनुसार, विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक का भी पार्टी समर्थन नहीं करेगी।
रमेश ने कहा, ''यदि एफसीआरए से संबंधित विधेयक लाया जाता है तो हम उसका भी विरोध करेंगे। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम में कुछ संशोधन प्रस्तावित हैं। हम इन संशोधनों के पक्ष में नहीं हैं। जब यह विधेयक आएगा तो हम उसका भी पूरा विरोध करेंगे।''
उन्होंने कहा, ''हमें ऐसा कोई विधेयक नजर नहीं आता जिसका हम समर्थन करेंगे।''
रमेश ने आरोप लगाया कि सरकार विभिन्न राजनीतिक दलों को तोड़कर संसद में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने कहा, ''यदि पार्टियों को तोड़कर दो-तिहाई बहुमत हासिल किया जाता है तो वह कलंकित दो-तिहाई बहुमत होगा। लेकिन हमें नहीं लगता कि उन्हें ऐसा बहुमत मिलने की कोई गुंजाइश है।''
उन्होंने उम्मीद जताई और द्रमुक जैसे राजनीतिक दल परिसीमन विधेयक को लेकर पहले की तरह ही सत्तापक्ष के विरोध में खड़े रहेंगे क्योंकि उनकी विचारधारा भाजपा से बिल्कुल उलट है।
विपक्षी दलों की एकजुटता के बारे में पूछे जाने पर रमेश ने कहा कि कांग्रेस लगातार अन्य विपक्षी दलों के संपर्क में है।
उन्होंने कहा, "राहुल गांधी संपर्क में हैं और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भी विपक्षी नेताओं से लगातार बातचीत कर रहे हैं।''
रमेश ने कहा कि संसद सत्र के दौरान कांग्रेस राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी, नीट परीक्षा के पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था तथा ई20 पेट्रोल से जुड़े कथित घोटाले का मुद्दा भी उठाएगी।
उन्होंने आरोप लगाया कि ई20 के मामले मामले में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और उनके पुत्र शामिल हैं तथा कांग्रेस इस पर चर्चा की मांग करेगी।
सर्वदलीय बैठक को लेकर कांग्रेस महासचिव ने कहा कि यह केवल एक औपचारिकता बनकर रह गई है।
उन्होंने कहा, ''35-40 नेता अपनी बात रखते हैं, लेकिन अंत में वही होता है जो दो लोग (प्रधानमंत्री और गृह मंत्री) चाहते हैं। जो निर्णय दो लोगों द्वारा पहले से तय होता है, वही लागू किया जाता है।''
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