पीएम-एनएपीएस के तहत पूर्वोत्तर के युवाओं को मिलेगा प्रशिक्षण
रमण
- 17 Jul 2026, 05:27 PM
- Updated: 05:27 PM
नयी दिल्ली, 17 जुलाई (भाषा) कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय प्रशिक्षुता संवर्धन योजना (पीएम-एनएपीएस) के तहत पूर्वोत्तर क्षेत्र में युवाओं को हुनरमंद बनाने के लिए इस कार्यक्रम को वित्त वर्ष 2026-27 तक बढ़ा दिया गया है।
मंत्रालय ने कहा कि भारतीय उद्यमिता संस्थान (आईआईई), गुवाहाटी द्वारा लागू किए जाने वाले इस कार्यक्रम का उद्देश्य पूर्वोत्तर क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण 'अप्रेन्टिसशिप' के अवसरों का विस्तार करना और युवाओं की रोजगार क्षमता को मजबूत करना है।
मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि मई 2025 में शुरू की गई प्रायोगिक पहल की सफलता के आधार पर इस विस्तारित कार्यक्रम का लक्ष्य पूर्वोत्तर के सभी आठ राज्यों में'अप्रेन्टिसशिप' के अवसरों को बढ़ाना, उद्योगों और सरकारी प्रतिष्ठानों की भागीदारी बढ़ाना तथा कौशल भारत मिशन के तहत युवाओं के लिए स्थायी आजीविका के अवसर तैयार करना है।
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कार्यक्रम का दायरा बढ़ाते हुए 'अप्रेन्टिसशिप' के लिए 30,000 युवाओं का लक्ष्य रखा गया है, जो प्रायोगिक चरण के मुकाबले करीब 15 प्रतिशत अधिक है।
इनमें से 15,000 प्रशिक्षुओं को पूर्वोत्तर क्षेत्र से बाहर अवसर उपलब्ध कराने में सहायता दी जाएगी। इनमें सरकारी विभाग और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (पीएसयू) शामिल हैं। वहीं, 15,000 प्रशिक्षुओं को पूर्वोत्तर क्षेत्र के भीतर अवसर दिए जाएंगे।
सरकार ने इस पहल के लिए वित्त वर्ष 2026-27 में 57.58 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है। यह राशि पीएम-एनएपीएस के पूर्वोत्तर क्षेत्र घटक के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी।
कौशल विकास और उद्यमिता मंत्री जयंत चौधरी ने कहा, "प्रायोगिक पहल की सफलता यह दिखाती है कि सही अवसर और समर्थन मिलने पर युवा अपनी पूरी क्षमता का उपयोग कर सकते हैं। पीएम-एनएपीएस के तहत इस कार्यक्रम को आगे बढ़ाने से गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण के अवसरों तक पहुंच बढ़ेगी, स्थानीय व्यवस्था मजबूत होगी, उद्योगों की भागीदारी को प्रोत्साहन मिलेगा और क्षेत्र के युवाओं को पूर्वोत्तर के भीतर तथा देश के अन्य हिस्सों में काम का मूल्यवान अनुभव प्राप्त होगा।"
मंत्रालय ने बताया कि इस विस्तारित कार्यक्रम में पीएम-एनएपीएस के तहत मिलने वाली सहायता के अतिरिक्त 1,500 रुपये प्रति माह वित्तीय प्रोत्साहन का दायरा भी बढ़ाया गया है। प्रायोगिक चरण में मुख्य रूप से अपने गृह राज्य से बाहर जाने वाले प्रशिक्षुओं को सहायता दी गई थी, जबकि नई व्यवस्था में पूर्वोत्तर राज्यों के भीतर अपने गृह राज्य में प्रशिक्षण लेने वाले प्रशिक्षुओं को भी शामिल किया गया है।
मंत्रालय के अनुसार, क्षेत्र में प्रशिक्षण से जुड़ने वाले युवाओं की संख्या में 51 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह संख्या वित्त वर्ष 2024-25 के 15,562 से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 23,470 हो गई। इस तरह 26,000 के लक्ष्य के मुकाबले 90 प्रतिशत से अधिक उपलब्धि हासिल की गई।
भाषा योगेश रमण
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