'विक्रम-1' का सफल प्रक्षेपण भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में नए युग की शुरुआत : पेमा खांडू
नेत्रपाल
- 18 Jul 2026, 08:10 PM
- Updated: 08:10 PM
ईटानगर, 18 जुलाई (भाषा) अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने शनिवार को भारत में निजी क्षेत्र द्वारा विकसित पहले 'ऑर्बिटल' रॉकेट 'विक्रम-1' के सफल प्रक्षेपण की सराहना करते हुए कहा कि यह उपलब्धि देश के अंतरिक्ष क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक है और यह भारतीय विज्ञान, प्रौद्योगिकी तथा उद्यमिता की बढ़ती ताकत को दर्शाती है।
खांडू ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि इस ऐतिहासिक मिशन के साथ भारत सफल निजी कक्षीय प्रक्षेपण क्षमता हासिल करने वाला दुनिया का तीसरा देश बन गया है।
मुख्यमंत्री ने 'एक्स' पर लिखा, ''देश के पहले निजी तौर पर विकसित कक्षीय रॉकेट विक्रम-1, प्रायोगिक उड़ान-1 ने सफलतापूर्वक कक्षा में पहुंचकर अपने पेलोड को 450 किलोमीटर की कक्षा में स्थापित किया है।''
उन्होंने इस मिशन को देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक निर्णायक क्षण बताते हुए कहा कि यह उपलब्धि उन्नत प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में भारत की तेजी से बढ़ती क्षमताओं को प्रदर्शित करती है।
खांडू ने कहा, ''यह भारतीय विज्ञान, प्रौद्योगिकी और उद्यमिता के लिए गर्व का क्षण है। भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र का भविष्य वास्तव में उड़ान भर चुका है।''
हैदराबाद स्थित निजी अंतरिक्ष स्टार्टअप कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस द्वारा विकसित विक्रम-1 रॉकेट ने अपने पहले कक्षीय मिशन 'मिशन आगमन' के तहत श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से उड़ान भरी और कई पेलोड को पृथ्वी की 450 किलोमीटर की निचली कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया। यह भारत का पहला सफल निजी तौर पर विकसित कक्षीय प्रक्षेपण है।
इस मिशन को भारत के वाणिज्यिक अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। यह सफलता उन अंतरिक्ष क्षेत्र के सुधारों के कारण संभव हुई है, जिनके तहत निजी कंपनियों के लिए इस क्षेत्र को खोला गया।
इस सफल प्रक्षेपण से वैश्विक वाणिज्यिक प्रक्षेपण बाजार में भारत की स्थिति मजबूत होने और देश के निजी अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र के विकास को गति मिलने की उम्मीद है। हाल के वर्षों में नीतिगत सुधारों के बाद भारत का निजी अंतरिक्ष क्षेत्र तेजी से विस्तारित हुआ है।
भाषा रवि कांत नेत्रपाल
नेत्रपाल
1807 2010 ईटानगर