यमुना बाढ़ क्षेत्र में अवैध डेरी पर एनजीटी सख्त
नेत्रपाल
- 19 Jul 2026, 04:49 PM
- Updated: 04:49 PM
नयी दिल्ली, 19 जुलाई (भाषा) राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने यमुना के बाढ़ क्षेत्र में अवैध डेरी के लगातार संचालन पर संबंधित प्राधिकारियों को फटकार लगाते हुए दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) को इस संबंध में नयी रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।
हरित अधिकरण उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि प्राधिकारियों ने अप्रैल 2024 के उसके उस आदेश का अनुपालन नहीं किया, जिसमें यमुना के बाढ़ क्षेत्र, विशेष रूप से मयूर नेचर पार्क के निकट चक चिल्ला गांव में हुए बड़े अतिक्रमण सहित अवैध डेरी फार्म हटाने का निर्देश दिया गया था।
पंद्रह जुलाई के आदेश में एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की पीठ ने कहा कि स्पष्ट निर्देशों के बावजूद प्राधिकारी पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करने में विफल रहे हैं।
पीठ ने डीपीसीसी द्वारा 'ओ-जोन' (संरक्षित क्षेत्र, जहां किसी भी प्रकार के निर्माण की अनुमति नहीं है) के निरीक्षण के बाद दाखिल स्थिति रिपोर्ट का अवलोकन किया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को विभिन्न स्थानों पर अतिक्रमण वाली झुग्गियां, अस्थायी पशुशालाएं, पशु चारा और गोबर के ढेर मिले।
पीठ ने कहा, ''कई अस्थायी पशुशालाएं भी देखी गईं जहां मवेशियों का चारा रखा था... विभिन्न स्थानों पर गोबर के ढेर भी पाए गए।'' पीठ ने यह टिप्पणी डीएनडी फ्लाईओवर के नीचे, नमो भारत आरआरटीएस कॉरिडोर तथा न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी के निकट किए गए निरीक्षण के संदर्भ में की।
अधिकरण ने कहा, ''डीपीसीसी के जवाब से स्पष्ट है कि अधिकरण के आदेश का अनुपालन नहीं किया गया है। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने चारे के साथ अस्थायी पशुशालाएं देखीं। गोबर के ढेर भी पाए गए और 50 से 60 गोवंशीय पशु खुले घास मैदान में चरते हुए मिले।''
प्राथमिक भूमि स्वामी एजेंसी दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की ओर से पेश अधिवक्ता ने अधिकरण को बताया कि अतिक्रमण हटाने के अभियान चलाए गए, लेकिन अतिक्रमण करने वाले फिर उसी स्थान या फ्लाईओवर के नीचे मवेशी रखने लगते हैं, जिससे कार्रवाई निष्प्रभावी हो जाती है।
उन्होंने कहा कि मवेशियों को पकड़ने की जिम्मेदारी एमसीडी के पशुपालन विभाग की है, लेकिन विभाग के निदेशक को सूचित किए जाने के बावजूद इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की गई।
अधिकरण ने कहा, ''यदि मवेशियों को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा जुलाई 2021 में निर्धारित स्थान संबंधी मानदंडों का उल्लंघन करते हुए रखा गया है, तो दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) को आवश्यक कार्रवाई करनी होगी, जिसमें उल्लंघनकर्ता पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाना भी शामिल हो सकता है।''
एमसीडी की ओर से मामले की जांच के लिए चार सप्ताह का समय मांगे जाने के बाद पीठ ने कहा, ''प्रतिवादी संख्या-4 (एमसीडी) छह सप्ताह के भीतर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट दाखिल करे। डीपीसीसी भी उपरोक्त टिप्पणियों को ध्यान में रखते हुए नई रिपोर्ट दाखिल करे।''
मामले को 25 सितंबर को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया गया गया।
भाषा अमित नेत्रपाल
नेत्रपाल
1907 1649 दिल्ली