संसद मार्च: लाठीचार्ज-आंसू गैस के बावजूद डटे प्रदर्शनकारी; कहा- मांग पूरी होने तक पीछे नहीं हटेंगे
दिलीप
- 20 Jul 2026, 05:09 PM
- Updated: 05:09 PM
नयी दिल्ली, 20 जुलाई (भाषा) 'कॉकरोच जनता पार्टी' (कॉजपा) के सोमवार को संसद मार्च में शामिल प्रदर्शनकारी भारी पुलिस बैरिकेडिंग, लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले दागे जाने के बावजूद वहां डटे रहे और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए नारे लगाए।
इस मार्च में दिल्ली भर से छात्र और आम लोग शामिल हुए। इसे संसद मार्ग के पास रोक दिया गया, जहां पुलिस ने कई स्तर पर बैरिकेड लगाए थे।
कई प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उन्हें प्रतिरोध का अंदाज़ा था, लेकिन वे अपना प्रदर्शन जारी रखने के लिए पक्के इरादे के साथ आए थे।
मार्च में शामिल दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा ग्लोरी ने कहा, "उन्होंने हमें कई बार रोकने की कोशिश की। पूरे रास्ते में बड़े स्तर पर बैरिकेड लगाए गए थे। हमें लाठीचार्ज और आंसू गैस का भी सामना करना पड़ा, लेकिन हम पीछे नहीं हटेंगे।"
कई छात्रों ने आंदोलन को लेकर सरकार की प्रतिक्रिया पर निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि हफ्तों के प्रदर्शन के बावजूद उनकी मांगों को अनसुना कर दिया गया।
एक प्रदर्शनकारी छात्र ने कहा, "जो देश अपने छात्रों की परवाह नहीं करता, उसका पतन निश्चित है।"
दिल्ली विश्वविद्यालय के एक अन्य छात्र संस्कृति कुमार ने कहा कि वे तब तक विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे, जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं।
उन्होंने कहा, "हम केवल धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा चाहते हैं। हम कुछ असंभव नहीं मांग रहे हैं, जिसे सरकार पूरा नहीं कर सकती। हम आज पीछे नहीं हट रहे हैं। जब इतनी दूर तक सफर तय कर लिया है, तो अब इसे अंजाम तक पहुंचाकर ही दम लेंगे।'
भीड़ में जामिया मिल्लिया इस्लामिया की पूर्व छात्रा 52 वर्षीय कनीज़ फातिमा भी शामिल थीं। उन्होंने कहा कि वह आंदोलन की शुरुआत से ही जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों का समर्थन कर रही थीं।
फातिमा ने पूछा, "क्या यह हमारा देश नहीं है? क्या नागरिक के रूप में हमें सवाल उठाने और उन स्थितियों को चुनौती देने का अधिकार नहीं है, जिनसे हम सहमत नहीं हैं? वे उन छात्रों पर लाठीचार्ज कर रहे हैं, जो केवल अपने अधिकारों की मांग करने के लिए यहां आए हैं?"
प्रदर्शन को निर्णायक क्षण बताते हुए उन्होंने कहा, "यह करो या मरो का समय है। आज यहां खड़े होने के लिए बहुत से लोगों ने बहुत बड़ा बलिदान दिया है।"
बदरपुर की 17 वर्षीय अंशिका अपने परिवार को बिना बताए प्रदर्शन में आई थी। अंशिका ने कहा कि उसने अपने परिवार को बताया कि वह स्कूल जा रही है, लेकिन वह प्रदर्शन में आ गई।
उसने अपने हाथ पर चोट के निशान दिखाते हुए कहा, ''क्या हम यहां इसलिए आए, ताकि हमें अपराधियों की तरह हिरासत में लिया जा सके।"
उसने आरोप लगाया कि दो महिला पुलिसकर्मियों ने उसे पैरों से पकड़कर खींच लिया और कसकर पकड़ लिया।
अंशिका ने कहा, "जब चुनाव का समय आता है, तो वे हमारे घर आते हैं और वोट मांगते हैं, लेकिन वे नीट पेपर लीक पर बातचीत करने भी नहीं आए।"
उसने कहा, "हम केवल बातचीत के लिए कह रहे हैं। क्या हमें शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने की भी अनुमति नहीं है?"
विरोध प्रदर्शन में उन लोगों की भी भागीदारी देखी गई, जो शहर के बाहर से राष्ट्रीय राजधानी आए थे।
किस्मत (20) ने कहा कि वह दिल्ली में प्रदर्शन में शामिल होने के लिए रातभर यात्रा करके पटना से आई हैं।
बिहार के वैशाली की रहने वाली युवती ने कहा कि उसने यह बात अपने परिवार से छिपाई थी।
उसने कहा, "मैंने अपने परिवार से झूठ बोला और यहां आ गई, क्योंकि उन्हें मेरी सुरक्षा की चिंता होगी। मैंने उन्हें नहीं बताया कि मैं विरोध प्रदर्शन में आ रही हूं।"
प्रदर्शनकारियों ने दोहराया कि वे तब तक अपना आंदोलन जारी रखेंगे, जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे सहित उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाता।
भाषा नोमान दिलीप
दिलीप
2007 1709 दिल्ली