ऋतब्रत बनर्जी ने चटर्जी आयोग की रिपोर्ट को लेकर ममता बनर्जी पर साधा निशाना,
पवनेश
- 21 Jul 2026, 07:30 PM
- Updated: 07:30 PM
कोलकाता, 21 जुलाई (भाषा) पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और तृणमूल कांग्रेस के बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी ने मंगलवार को ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री ने 21 जुलाई 1993 की पुलिस गोलीबारी की घटना पर न्यायमूर्ति चटर्जी आयोग की रिपोर्ट को दबा दिया।
कोलकाता में समानांतर 'शहीद दिवस' मंच से समर्थकों को संबोधित करते हुए ऋतब्रत ने सवाल उठाया कि उस रिपोर्ट को सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया, जो 13 युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं की मौत का कारण बनी पुलिस गोलीबारी की जांच के लिए तैयार की गई थी। यह रिपोर्ट बाद में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की विचारधारा का आधार बनी। ऋतब्रत ने कहा कि 2011 में सत्ता में आने के बाद ममता बनर्जी सरकार ने इस रिपोर्ट को तैयार करवाया था।
उन्होंने कहा, "पंद्रह वर्षों तक शासन करने वाली सरकार इन शहीदों के बलिदान पर टिकी थी। चटर्जी आयोग की रिपोर्ट ने कई सवाल खड़े किए। पूर्व मुख्यमंत्री को छोड़कर सभी के बयान दर्ज किए गए। उन्हीं बयानों के आधार पर रिपोर्ट तैयार हुई, लेकिन बाद में उसे दबा दिया गया।"
ऋतब्रत ने कहा, "पिछली सरकार को लगता था कि अगर रिपोर्ट सार्वजनिक हुई तो कई लोग मुश्किल में पड़ जाएंगे। आयोग ने शहीदों के परिजनों को 25 लाख रुपये और घायलों को पांच लाख रुपये मुआवजा देने की सिफारिश की थी। लेकिन वास्तव में परिजनों को केवल दो लाख रुपये और घायलों को 15,000 रुपये दिए गए। यदि आयोग की रिपोर्ट ही दबा दी जाए तो आयोग बनाने का कोई औचित्य नहीं रह जाता।"
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को विधानसभा में 21 जुलाई की घटनाओं की जांच करने वाले आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक की, जिसे 2014 में पिछली सरकार को सौंपा गया था।
उन्होंने आरोप लगाया था कि तत्कालीन तृणमूल सरकार ने आयोग की रिपोर्ट को एक दशक से अधिक समय तक दबाए रखा, राजनीतिक लाभ के लिए इस त्रासदी का इस्तेमाल किया और न्यायमूर्ति चटर्जी की रिपोर्ट की सिफारिशों के अनुरूप शहीदों के परिजनों को न्यूनतम वित्तीय सहायता तक नहीं दी।
ऋतब्रत ने कहा, "आयोग की रिपोर्ट कई सवाल खड़े करती है। आपने इसे प्रकाशित क्यों नहीं किया? राज्य की जनता को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई? यदि शहीदों के परिजन आवेदन करें तो उन्हें आयोग की सिफारिश के अनुसार मुआवजा मिलना चाहिए। जब प्रतिमा का विसर्जन होता है तो मिट्टी पानी में बह जाती है, लेकिन उसका ढांचा बचा रहता है। अब पश्चिम बंगाल की जनता उसी ढांचे को देखना चाहती है।"
इक्कीस जुलाई की घटना में मारे गए 13 लोगों के परिवारों में से कम से कम चार परिवारों के सदस्य भी मायो रोड की सभा में शामिल हुए। इनमें रंजीत दास, मोहम्मद खालिद, दिलीप दास और रतन मंडल के परिजन शामिल थे।
भाषा
शुभम पवनेश
पवनेश
2107 1930 कोलकाता