छात्र प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई की न्यायिक जांच कराई जाये: एससीबीए अध्यक्ष
नरेश
- 22 Jul 2026, 06:17 PM
- Updated: 06:17 PM
नयी दिल्ली, 22 जुलाई (भाषा) सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) के अध्यक्ष विकास सिंह ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों और वकीलों पर हुई पुलिस कार्रवाई की न्यायिक जांच की मांग की।
वरिष्ठ अधिवक्ता ने अपने पत्र में आरोप लगाया कि पुलिस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर ''बिना किसी उकसावे के'' लाठीचार्ज किया और इस कारण छात्रों, वकीलों, पत्रकारों और चिकित्सा कर्मियों को चोटें आईं।
उन्होंने कहा, ''मैं यह पत्र गहरी चिंता के साथ प्रस्तुत कर रहा हूं, क्योंकि यह हमारे संवैधानिक लोकतंत्र के मूल आधार को प्रभावित करने वाली दोहरी प्रशासनिक विफलता से संबंधित है: शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर की गई अवैध पुलिस कार्रवाई तथा विभिन्न राष्ट्रीय परीक्षाओं को निष्पक्ष रूप से आयोजित करने में राज्य तंत्र की विफलता।''
मीडिया रिपोर्टों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों का हवाला देते हुए सिंह ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों के सिर पर प्रहार किया, अत्यधिक बल का प्रयोग किया, आंसू गैस के गोले छोड़े, घायलों की देखभाल कर रहे पत्रकारों और डॉक्टरों के साथ मारपीट की गई।''
उन्होंने यह भी दावा किया कि कई पुलिसकर्मी अनिवार्य नाम-पट्टी (नेम बैज) के बिना ड्यूटी कर रहे थे और पुलिसकर्मियों को लगी चोटों के संबंध में आधिकारिक बयान पर सवाल उठाया।
सिंह ने पत्र में कहा, ''प्रकाशित रिपोर्टों से पुष्टि होती है कि पुरुष पुलिस अधिकारियों ने महिला प्रदर्शनकारियों और नाबालिगों पर लाठीचार्ज किया, जिनमें 16 वर्षीय एक छात्रा भी शामिल थी, जिसे चोटें आईं।''
एससीबीए प्रमुख ने कहा कि कथित पुलिस कार्रवाई के जरिये संविधान के अनुच्छेद 19 और 21, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) के प्रावधानों और सभाओं को तितर-बितर करने के दौरान न्यूनतम बल प्रयोग से संबंधित न्यायिक निर्देशों का उल्लंघन किया गया।
राष्ट्रीय और राज्य स्तर की परीक्षाओं के प्रश्नपत्र बार-बार लीक होने की घटनाओं का उल्लेख करते हुए सिंह ने कहा कि निष्पक्ष परीक्षाएं आयोजित करने में लगातार हो रही विफलताओं ने छात्रों को निराशा की स्थिति में पहुंचा दिया है और सार्वजनिक संस्थानों पर उनका विश्वास कम किया है।
उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि पुलिस कार्रवाई की जांच करने और परीक्षा प्रश्नपत्र लीक होने के व्यापक मुद्दे की पड़ताल के लिए उच्चतम न्यायालय के किसी मौजूदा या सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक समयबद्ध न्यायिक आयोग का गठन किया जाए।
सिंह ने निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली पुलिस आयुक्त को तत्काल निलंबित करने, बल प्रयोग के लिए कथित रूप से जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता बनाए रखने में बार-बार हुई चूकों के लिए शिक्षा मंत्रालय की प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की भी मांग की।
भाषा
देवेंद्र नरेश
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