विपक्षी नेताओं ने बिरला से मुलाकात की, कल्याण बनर्जी का निलंबन वापस लेने का आग्रह किया
नरेश
- 22 Jul 2026, 06:32 PM
- Updated: 06:32 PM
नयी दिल्ली, 22 जुलाई (भाषा) विपक्षी दलों के सांसदों ने बुधवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलकर तृणमूल कांग्रेस कल्याण बनर्जी का निलंबन वापस लेने का आग्रह किया।
विपक्षी नेताओं ने कहा कि जिस कथित नोकझोंक के मामले में बनर्जी पर कार्रवाई हुई है, वो सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद हुई थी इसलिए नियम लागू नहीं होते।
तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी को सदन में महिला सदस्यों से कथित अभद्रता और दुर्व्यवहार करने और उनके खिलाफ असंसदीय टिप्पणियां करने के मामले में बुधवार को मानसून सत्र की शेष अवधि के लिए लोकसभा से निलंबित कर दिया गया।
उनका निलंबन समाप्त करने का अनुरोध करने के लिए लोकसभा अध्यक्ष से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल, समाजवादी पार्टी के नेता धर्मेंद्र यादव, तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा, कीर्ति आजाद, सजदा अहमद और प्रतिमा मंडल शामिल थे।
यह जानकारी देते हुए तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने बताया कि बनर्जी को संसद के मानसून सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित किए जाने के फौरन बाद इन सांसदों से अध्यक्ष से मुलाकात की।
रॉय ने कहा कि विपक्ष ने निलंबन के लिए अपनाई गई प्रक्रिया तथा जिस आधार पर यह कार्रवाई की गई, दोनों पर आपत्ति जताई।
उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ''जब सदन में हंगामा हो रहा था, तो पीठासीन सभापति ने निलंबन का नोटिस पढ़ा और कल्याण बनर्जी को बाकी सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया। यह पूरी तरह से गलत फैसला था, इसलिए विपक्षी दल अध्यक्ष से मिलने गए।''
रॉय के अनुसार प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि अगर आसन की कार्रवाई बनर्जी और बागी तृणमूल सांसद मिताली बाग के बीच हुई बहस पर आधारित थी, तो इसे सही नहीं ठहराया जा सकता, क्योंकि सदन की कार्यवाही पहले ही स्थगित हो चुकी थी।
मिताली बाग उन लोगों में शामिल हैं जिन्होंने तृणमूल कांग्रेस छोड़कर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) का दामन थामा है।
उन्होंने कहा, ''हम यह बताना चाहते हैं कि अगर आसन का इशारा बनर्जी और मिताली बाग के बीच हुई कहासुनी की तरफ था, तो उस समय सदन की कार्यवाही नहीं चल रही थी। माइक्रोफोन बंद थे और आसन पर कोई नहीं था। न तो कल्याण बनर्जी को कोई नोटिस दिया गया और न ही उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया।''
रॉय ने कहा, ''बनर्जी को निलंबित करने का प्रस्ताव नियमों के मुताबिक नहीं है क्योंकि उस समय सदन की बैठक नहीं चल रही थी। खाली सदन में हुई घटना पर नियम लागू नहीं होते। हमारी मांग है कि निलंबन वापस लिया जाए।''
उनके मुताबिक अध्यक्ष बिरला ने प्रतिनिधिमंडल से कहा कि क्योंकि सत्तारूढ़ पक्ष ने प्रस्ताव रखा तो वह उनसे बात करेंगे और बृहस्पतिवार को अपना फैसला सुनाएंगे।
रॉय ने कहा, ''हमारी लड़ाई जारी रहेगी।'' उन्होंने कहा कि दोनों में कहासुनी तब शुरू हुई जब ''हमारी पार्टी छोड़ गए कुछ लोगों ने कल्याण पर टिप्पणी की और उन्होंने पलटवार किया।''
इस बीच बनर्जी ने विद्रोही तृणमूल सांसदों पर निशाना साधा।
उन्होंने कहा, ''मुझे निलंबित कराके वे क्या करेंगे? वे मुझे सदन से बाहर नहीं कर सकते। वे 20 सांसद हैं। क्या उन्होंने कोलकाता में एक बैठक भी की है? उनके पास बंगाल में 20 वोट भी नहीं हैं। वे गद्दार हैं।''
बनर्जी ने कहा, ''आज आखिरी दिन नहीं है। कल भी आएगा। परसों भी आएगा। एक साल बाद यह सरकार गिर जाएगी।''
बागी तृणमूल सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने निलंबन को सही ठहराते हुए आरोप लगाया कि बनर्जी ने महिलाओं के खिलाफ लगातार अपशब्दों वाली भाषा का इस्तेमाल किया।
उन्होंने कहा, ''कल्याण बनर्जी लगातार महिलाओं पर हमले करते रहते हैं, अभद्र और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने एक महिला सांसद के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की थी, इसलिए उन्हें निलंबित कर दिया गया।''
भाषा वैभव नरेश
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