वायु प्रदूषण से बच्चों में ब्रेन ट्यूमर समेत कुछ अन्य प्रकार का कैंसर होने की आंशका
नरेश
- 22 Jul 2026, 07:07 PM
- Updated: 07:07 PM
(अहमद नोमान)
नयी दिल्ली, 22 जुलाई (भाषा) महानगरों में घातक स्तर तक पहुंच चुका वायु प्रदूषण बच्चों के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा अध्ययनों में वायु प्रदूषण के लगातार संपर्क में रहने के कारण बच्चों में ब्रेन ट्यूमर समेत कुछ अन्य प्रकार के कैंसर होने की आशंका जतायी गयी है।
दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट के डॉक्टरों ने बुधवार को 'सिस्टेमैटिक रिव्यू' और 'मेटा-विश्लेषण' का हवाला देते हुए यह जानकारी दी।
दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट में क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी की सहायक प्रोफेसर डॉ शांभवी शर्मा ने एक अध्ययन का हवाला देते हुए कहा कि कोयला, डीजल और पेट्रोल के उत्सर्जन से निकलने वाले प्रदूषकों में पाए जाने वाले पॉलीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन्स बाल्यावस्था के कई प्रकार के ब्रेन ट्यूमर से जुड़े हो सकते हैं।
दिल्ली सरकार के तहत आने वाले संस्थान की डॉक्टर ने कहा कि कुछ अध्ययनों में यह संकेत मिला है कि लंबे समय तक वायु प्रदूषण के संपर्क में रहने से ब्रेन ट्यूमर का जोखिम बढ़ सकता है। हालांकि उन्होंने कहा कि अभी तक कोई भी अध्ययन निर्णायक निष्कर्ष तक नहीं पहुंचा है।
उन्होंने 'विश्व मस्तिष्क दिवस' के मौके पर 'पीटीआई-भाषा' से बातचीत में कहा कि यह संकेत 'सिस्टेमैटिक रिव्यू' और 'मेटा-विश्लेषण' में सामने आए हैं जिनमें कई अध्ययनों के परिणामों को एक साथ जोड़कर उनका विश्लेषण किया जाता है।
उन्होंने कहा कि ईरान में एक टीम द्वारा किए गए एक बड़े मेटा-विश्लेषण में वायु प्रदूषण और ब्रेन ट्यूमर के बीच संभावित संबंध की ओर संकेत किया गया है और इस विश्लेषण में विभिन्न यूरोपीय देशों और अमेरिका के अध्ययनों को शामिल किया गया था।
डॉ शर्मा के मुताबिक, डेनमार्क तथा ताइवान में अलग अलग टीमों द्वारा किए गए छोटे अध्ययनों में भी ब्रेन ट्यूमर और वायु प्रदूषण के बीच संभावित संबंध के संकेत मिले हैं।
उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण मौजूदा संकट है और इसके कारण ब्रेन ट्यूमर होने की आशंका पर अध्ययन चल रहे हैं तथा उनके परिणाम पांच-दस साल बाद सामने आएंगे।
डॉ शर्मा ने कहा कि नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और अल्ट्रा-फाइन पार्टिकल्स मुख्य रूप से यातायात से होने वाले प्रदूषण से जुड़े होते हैं और अति सूक्ष्म कण सीधे मस्तिष्क के ऊतकों को प्रभावित कर सकते हैं।
उधर, मणिपाल अस्पताल में न्यूरोलॉजी के डॉक्टर नीरज अग्रवाल ने बताया कि वायु प्रदूषण से बच्चों में ब्रेन ट्यूमर का खतरा बढ़ना सीधे तौर पर साबित नहीं हुआ है लेकिन कुछ अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों में यह देखा गया है कि लंबे समय तक यातायात से होने वाले वायु प्रदूषण, पीएम2.5 या नाइट्रोजन डाइऑक्साइड के संपर्क में रहने से बच्चों में कुछ प्रकार के ब्रेन ट्यूमर का खतरा थोड़ा बढ़ सकता है।
उन्होंने कहा कि हालांकि, इन अध्ययनों के परिणाम एक जैसे नहीं रहे हैं।
वायु प्रदूषण के कारण बच्चों में ब्रेन ट्यूमर होने के सवाल पर डा. शर्मा ने कहा, "वैज्ञानिक प्रमाण लगातार यह संकेत दे रहे हैं कि प्रसवपूर्व अवधि या जन्म के पहले वर्ष के दौरान वायु प्रदूषण के संपर्क का संबंध बच्चों में ब्रेन ट्यूमर समेत कुछ प्रकार के कैंसरों से हो सकता है। पॉलीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन्स कुछ प्रकार के बाल्यावस्था के ब्रेन ट्यूमर से जुड़े हो सकते हैं।"
शर्मा ने कहा कि 2025 में दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट में मस्तिष्क के घातक ट्यूमर के 74 मामले दर्ज किए गए।
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