भोजशाला विवाद: नमाज के लिए वैकल्पिक जगह को लेकर मुस्लिम पक्ष की याचिका पर सुनवाई करेगी शीर्ष अदालत
सुरेश
- 22 Jul 2026, 07:27 PM
- Updated: 07:27 PM
नयी दिल्ली, 22 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को मुस्लिम पक्ष की उस याचिका की सुनवाई करने पर सहमति जताई जिसमें कहा गया था कि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा नमाज अदा करने के लिए चिह्नित वैकल्पिक स्थल धार स्थित विवादित भोजशाला परिसर से काफी दूर है।
मध्यप्रदेश सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची एवं न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ से कहा कि वह पास में कोई जगह चिह्नित करने के लिए प्रशासन को मनाएंगे।
जब पीठ ने मेहता से कहा कि वह मध्यप्रदेश सरकार से इस बारे में निर्देश लें कि क्या विवादित परिसर के पास ही नमाज के लिए कोई वैकल्पिक जगह दी जा सकती है, इस पर सॉलिसिटर जनरल ने कहा, ''मैंने उनसे पास में कोई जगह चिह्नित करने को कहा है और प्रक्रिया जारी है।''
पीठ ने विवादित भोजशाला परिसर को देवी सरस्वती का मंदिर घोषित किए जाने के मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष की अपीलों पर विचार करते हुए 14 जुलाई को राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि जब तक मामले में अंतिम निर्णय नहीं लिया जाता तब तक अपराह्न एक बजे से तीन बजे तक जुमे की नमाज के लिए विवादित स्थल के पास कोई दूसरी खुली जगह मुहैया कराई जाए।
मुस्लिम पक्ष की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता हुजेफा अहमदी ने कहा कि अदालत ने राज्य सरकार को भोजशाला स्थल के पास नमाज के लिए खुली जगह उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों द्वारा चिह्नित जमीन लगभग दो किलोमीटर दूर है।
अहमदी ने कहा, ''हम पहले ही जुमे की नमाज नहीं कर पाए हैं।''
सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि वैकल्पिक स्थान विवादित परिसर से करीब 900 मीटर दूर है।
हालांकि, उन्होंने पीठ को भरोसा दिलाया कि वह व्यक्तिगत रूप से इस मामले की पड़ताल करेंगे और जरूरत पड़ने पर उचित कदम उठाएंगे। मेहता ने कहा, ''मैं व्यक्तिगत रूप से इसे देखूंगा और इसे ठीक करूंगा।''
न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि अदालत के पिछले आदेश का ''अक्षरश: और उसके मूल उद्देश्य के अनुरूप पालन किया जाना चाहिए।''
पीठ ने मामले को शुक्रवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई और सॉलिसिटर जनरल को नमाज अदा करने के लिए निकटवर्ती स्थल उपलब्ध कराने के संबंध में राज्य सरकार से निर्देश प्राप्त करने को कहा।
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने धार के भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर के मामले में 15 मई को फैसला सुनाते हुए हिंदू समुदाय की दो जनहित याचिकाएं मंजूर कर लीं और इस मध्यकालीन स्मारक की धार्मिक प्रकृति 'देवी सरस्वती' के मंदिर के तौर पर तय की।
भाषा वैभव सुरेश
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