राज्य न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने पर विचार करें : न्यायालय
नरेश
- 22 Jul 2026, 07:36 PM
- Updated: 07:36 PM
नयी दिल्ली, 22 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को सभी राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों से कहा कि वे न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 साल से बढ़ाकर 61 साल करने पर विचार करें।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ ने उस याचिका पर सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया, जिसमें देशभर में जिला अदालतों के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की उम्र 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष किए जाने का अनुरोध किया गया है।
भारत में उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु 65 साल है, जबकि उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश 62 वर्ष की उम्र में सेवानिवृत्त होते हैं।
पीठ ने कहा, "सभी राज्य सरकारों और केंद्र-शासित प्रदेशों को निर्देश दिया जाता है कि वे अपने-अपने अधिकार क्षेत्र वाले उच्च न्यायालय से सलाह-मशविरा करके इस मुद्दे पर कोई फैसला लें। अगर वे सहमत होते हैं, तो ऐसे राज्यों में न्यायिक अधिकारियों को 61 साल की उम्र तक सेवा में बने रहने की अनुमति दी जाएगी। यह सेवा विस्तार मामले में आने वाले अंतिम फैसले पर निर्भर करेगा।"
पीठ ने कहा कि यह प्रावधान एक अप्रैल 2026 से लागू होगा।
हालांकि, उसने कहा कि यह अंतरिम व्यवस्था इस कानूनी प्रश्न पर अंतिम फैसले को प्रभावित नहीं करेगी कि पूरे देश में जिला न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति की उम्र समान रूप से 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष की जानी चाहिए या नहीं।
पीठ ने कहा, "हम स्पष्ट करते हैं कि शुरुआत में उठाए गए कानूनी प्रश्न पर यह अदालत स्वतंत्र रूप से फैसला करेगी, चाहे राज्य सरकारें या उच्च न्यायालय कोई भी रुख अपनाएं।"
शीर्ष अदालत ने सभी राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे उच्च न्यायालय से परामर्श के बाद दो हफ्ते के भीतर अपना पक्ष रिकॉर्ड पर रखें।
न्यायालय ने संबंधित उच्च न्यायालयों से भी कहा कि वे इसी समयसीमा के भीतर अपना जवाब दाखिल करें।
हालांकि, पीठ ने स्पष्ट किया कि जो राज्य और उच्च न्यायालय सेवानिवृत्ति की उम्र बढ़ाने पर पहले से ही सहमत हैं, उन्हें विस्तृत जवाबी हलफनामा दाखिल करने की जरूरत नहीं है। उसने कहा कि ऐसे मामलों में सिर्फ सहमति जताने वाला एक संक्षिप्त बयान दाखिल करना ही काफी होगा।
यह मामला उच्चतम न्यायालय के वर्ष 2002 के उस फैसले की पृष्ठभूमि में उठा है, जिसमें न्यायमूर्ति के जगन्नाथ शेट्टी आयोग की जिला न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की उम्र बढ़ाकर 62 साल किए जाने की सिफारिश स्वीकार नहीं की गई थी।
तब से तेलंगाना और मध्यप्रदेश समेत कुछ राज्यों ने सेवानिवृत्ति की उम्र बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए हैं।
बुधवार को शीर्ष अदालत को बताया गया कि मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के सभी न्यायाधीशों ने एक प्रस्ताव पारित किया है, जिसमें न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति की उम्र 60 साल से बढ़ाकर 62 साल करने का प्रावधान किया गया है।
हालांकि, न्यायालय को बताया गया कि पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय सहित कई उच्च न्यायालय अब भी इस प्रस्ताव के खिलाफ हैं, क्योंकि उनका कहना है कि उनके राज्य में सरकारी कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 साल या उससे कम है।
देशभर में अलग-अलग रुख को देखते हुए और यह मानते हुए कि इस मामले का जल्द समाधान जरूरी है, शीर्ष अदालत ने एक अंतरिम व्यवस्था लागू की, जिसके तहत जहा भी राज्य सरकार और उच्च न्यायालय के बीच सहमति होगी, वहां न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति की उम्र बढ़ाकर 61 साल की जा सकेगी।
भाषा पारुल नरेश
नरेश
2207 1936 दिल्ली