चीनी कंपनियों का ईवी बाजार पर बढ़ता दबदबा, आखिर इसकी वजह क्या है?
नरेश
- 22 Jul 2026, 06:30 PM
- Updated: 06:30 PM
(मारिना यू झांग, यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी सिडनी)
सिडनी, 22 जुलाई (द कन्वरसेशन) चीन अब इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की बिक्री और निर्यात में दुनिया का अग्रणी देश है। ईवी में बैटरी से चलने वाली कारों से लेकर प्लग-इन हाइब्रिड वाहन तक शामिल हैं। ईवी को चलाने वाली रिचार्जेबल बैटरी के उत्पादन में भी चीनी कंपनियों की सबसे बड़ी हिस्सेदारी है।
वर्ष 2009 से 2022 के बीच चीन सरकार ने इलेक्ट्रिक कार, टैक्सियों और बसों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 41 अरब ऑस्ट्रेलियाई डॉलर से अधिक की सब्सिडी और कर रियायतें दीं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सरकारी सहायता ही चीन में ईवी उद्योग की तेज वृद्धि का कारण नहीं है। बीते दो दशकों में चीन ने ऐसा विनिर्माण तंत्र विकसित किया है, जिसने घरेलू प्रतिस्पर्धा, तेज उत्पादन और नवाचार को बढ़ावा दिया।
चीन का उद्देश्य आयातित तेल पर निर्भरता कम करना और जर्मनी, जापान तथा अमेरिका जैसे पारंपरिक वाहन निर्माता देशों को चुनौती देना है। इसी रणनीति के तहत उसने स्वच्छ ऊर्जा और कार्बन उत्सर्जन में कमी के लक्ष्यों को ईवी उद्योग से जोड़ा।
वर्ष 2025 में चीन में बिकने वाली नई कारों में आधे से अधिक ईवी थीं। चीन में निर्मित इलेक्ट्रिक वाहन दुनिया भर में तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। चीन में बने ईवी ब्रिटेन, नॉर्वे जैसे देशों में भी तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं।
ब्रिटेन में वर्ष 2025 में बिकने वाली नई कारों में 30 प्रतिशत से अधिक इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) थे। वहीं, नॉर्वे में वर्ष 2025 में ईवी की बिक्री बढ़कर देश में कुल कार बिक्री के 95 प्रतिशत से अधिक तक पहुंच गई।
हालांकि, अमेरिका में इनकी लोकप्रियता अपेक्षाकृत कम है, जहां ईवी की हिस्सेदारी केवल 10 प्रतिशत है। यह स्थिति तब भी है, जब अमेरिका ने शुल्क लगाकर चीनी ईवी के प्रवेश पर रोक जैसी बाधाएं खड़ी कर रखी हैं।
ऑस्ट्रेलिया में भी चीन में निर्मित इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को अपनाने की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी रही है। हालांकि, जून 2026 में वहां का बाजार एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया, जब नई कारों की कुल बिक्री में ईवी की हिस्सेदारी लगभग 30 प्रतिशत हो गई।
महत्वपूर्ण बात यह है कि चीन में निर्मित वाहन अब बाजार में सीमित उपस्थिति वाले उत्पाद नहीं रह गए हैं। वर्ष 2026 में चीन ने लगभग तीन दशक तक अग्रणी रहे जापान को पीछे छोड़ते हुए ऑस्ट्रेलिया में नए वाहनों का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बनने का स्थान हासिल कर लिया। सस्ती कीमत, बढ़ती ईंधन लागत, चार्जिंग नेटवर्क के विस्तार और नए वाहन दक्षता मानकों ने इस बदलाव को गति दी।
ऑस्ट्रेलिया में शुद्ध बैटरी चालित इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की बिक्री में टेस्ला अब भी सबसे आगे है और उसकी बाजार हिस्सेदारी 28 प्रतिशत है। हालांकि, बीवाईडी, गीली और एक्सपेंग जैसे चीनी ब्रांड अब मुख्यधारा की कंपनियों के रूप में उभर चुके हैं। इनमें बीवाईडी प्रमुख उदाहरण है, जिसकी ऑस्ट्रेलियाई बाजार में 24 प्रतिशत हिस्सेदारी है और वह टेस्ला को कड़ी टक्कर दे रही है।
चीन में इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) उद्योग के उभार के चरम पर 500 से अधिक कंपनियों ने इस क्षेत्र में प्रवेश किया। इन्हें सस्ती पूंजी, स्थानीय सरकारों के समर्थन और स्टार्टअप के उत्साह से बढ़ावा मिला। हालांकि सब्सिडी घटने और प्रतिस्पर्धा बढ़ने के बाद लगभग 90 प्रतिशत कंपनियां बाजार से बाहर हो गईं। जो कंपनियां बचीं, उन्होंने लगातार नवाचार और तकनीकी सुधार के जरिए अपनी स्थिति मजबूत की।
द कन्वरसेशन अमित नरेश
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