दिल्ली: कॉजपा के विरोध-प्रदर्शन के कारण मेट्रो स्टेशन बंद होने से यात्री घंटों फंसे रहे
सुरेश
- 22 Jul 2026, 10:19 PM
- Updated: 10:19 PM
नयी दिल्ली, 22 जुलाई (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर पर जारी 'कॉकरोच जनता पार्टी' (कॉजपा) के विरोध-प्रदर्शन के मद्देनजर सुरक्षा कारणों से दिल्ली मेट्रो के 16 स्टेशन लगभग आठ घंटे तक बंद रहे, जिससे ऑफिस जाने वाले हजारों लोग, छात्र और अन्य यात्री फंस गए।
दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) ने सुबह 16 स्टेशन बंद कर दिए थे और दोपहर में झंडेवालान को भी इस सूची में शामिल कर लिया। शाम को स्टेशनों के निकास द्वार खोल दिए गए।
ये स्टेशन कॉजपा के उस विरोध-प्रदर्शन के दौरान बंद किए गए, जिसमें मंगलवार की तुलना में बुधवार को ज़्यादा लोगों ने हिस्सा लिया।
विपक्षी नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि भाजपा को मेट्रो स्टेशन बंद करने के बजाय छात्रों से बात करनी चाहिए थी।
यात्रियों ने बताया कि ट्रेनें कई रूट पर चलती रहीं, लेकिन निर्धारित स्टेशनों पर नहीं रुकीं, जिससे उन्हें अपनी मंजिल से आगे तक जाना पड़ा और फिर सड़क मार्ग से वापस आना पड़ा।
केंद्रीय सचिवालय से मेट्रो में यात्रा कर रही वृंदा ने बताया कि प्रदर्शनकारी स्टेशन परिसर के पास जमा हो गए थे, जिससे यात्रियों में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई।
उन्होंने कहा, "प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशन पर कब्जा कर लिया था। उनमें से कई निकास द्वार के पास जमा थे और 'वंदे मातरम' के नारे लगा रहे थे। बहुत अनिश्चितता का माहौल था और लोगों को पता नहीं था कि वे स्टेशन से बाहर निकल पाएंगे या नहीं।"
दिल्ली मेट्रो की येलो लाइन पर यात्रा कर रहे एक अन्य यात्री ने बताया कि ट्रेन के अंदर घोषणाओं के जरिये यात्रियों को सूचित किया गया कि उन्हें दिल्ली गेट और खान मार्केट के बीच के स्टेशनों पर उतरने की अनुमति नहीं होगी।
उन्होंने कहा, "हमें दिल्ली गेट और खान मार्केट के बीच ट्रेन से उतरने नहीं दिया गया। बिना किसी सूचना के लोग यहां फंस गए हैं। यहां पूरी तरह अफरा-तफरी मची है।"
कई यात्रियों ने बताया कि गंतव्य स्थान पर मेट्रो स्टेशन के निकास द्वार बंद होने के कारण उन्हें कार्यस्थल, कॉलेज और दूसरी जरूरी कार्यों के लिए देर हो गई।
कई लोग दूसरे स्टेशनों के बाहर रास्ता बताने वाले ऐप की मदद लेते, परिवार वालों को फोन करते और कैब बुक करते नजर आए, जबकि बस स्टैंड और ऑटो-रिक्शा स्टैंड पर लंबी लाइनें लगी थीं।
मेट्रो स्टेशन के बाहर इंतजार कर रहे छात्र ने कहा, "आज सुबह मेरी एक जरूरी कक्षा थी, लेकिन मुझे अपनी मंजिल से काफी पहले ही उतरना पड़ा और अब मैं कॉलेज पहुंचने का कोई दूसरा रास्ता ढूंढ़ रहा हूं।"
ऑनलाइन कैब बुकिंग में भी तेजी देखी गई।
जनपथ से संसद मार्ग की ओर जा रहीं काजल ने बताया कि एक ऑटो-रिक्शा चालक ने उनसे उस रास्ते के लिए 150 रुपये लिये, जिसका किराया आम तौर पर 60 रुपये होता है।
आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मेट्रो स्टेशन बंद करना गलत है और छात्रों एवं प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिशों से आंदोलन और मजबूत ही होगा।
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, "अगर आप सारे मेट्रो स्टेशन बंद भी कर दें, तो भी वे पैदल चलेंगे। ये युवा हैं। सरकार के लिए इन युवा प्रदर्शनकारियों की बात सुनना अच्छा रहेगा।"
उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार पर छात्रों की मांगों को पूरा करने के बजाय आंदोलन को दबाने की कोशिश करने का आरोप लगाया।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी हालात से निपटने के सरकार के तरीके की आलोचना की और कहा कि मेट्रो स्टेशन के निकास द्वार बंद करने के बजाय सरकार को छात्रों से बातचीत करनी चाहिए थी।
उन्होंने कहा, "यह वाकई बहुत बुरा विचार था। इसे बहुत गलत तरीके से किया गया। सड़क के बीचों-बीच छात्रों को इस तरह पीटना... यह वाकई चौंकाने वाला है। और सच कहूं तो, मुझे इस सब पर सरकार का रवैया समझ नहीं आता।"
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाद्रा ने मेट्रो स्टेशनों के गेट बंद करने के फैसले की आलोचना की।
उन्होंने पूछा, "क्या दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की यही तस्वीर है?"
डीएमआरसी द्वारा बंद करने की घोषणा के लगभग आठ घंटे बाद, उसने कहा कि सभी स्टेशन खुल गए हैं।
भाषा
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