केंद्र सरकार अगर प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई नहीं करने का भरोसा दे तो अनशन समाप्त कर दूंगा : वांगचुक
रंजन
- 23 Jul 2026, 01:05 AM
- Updated: 01:05 AM
(तस्वीर के साथ)
नयी दिल्ली, 22 जुलाई (भाषा) पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने बुधवार को कहा कि अगर केंद्र सरकार उन्हें यह भरोसा दिलाए कि प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ कोई बल प्रयोग नहीं किया जाएगा और न ही उनके खिलाफ कोई प्राथमिकी या अन्य दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी, तो वह अपना आमरण अनशन समाप्त कर देंगे।
वांगचुक ने कहा कि भले ही अनशन के दौरान उनका वजन लगभग 11 किलोग्राम कम हो गया है, फिर भी वह अपने काम पर लौटना चाहते हैं।
दिल्ली से सटे गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल से एक वीडियो संदेश में वांगचुक ने कहा, ''मैं अब भी ज़िंदा हूं। यह मेरे अनशन का 25वां दिन है। मेरा वजन लगभग 11 किलोग्राम कम हो गया है। मेरी मांसपेशियां कमज़ोर हो गई हैं। लेकिन मैं ठीक हूं।''
उन्होंने कहा, ''मैं अपना काम शुरू करना चाहता हूं, लेकिन सरकार से अनुरोध करता हूं कि वह छात्रों पर दोबारा बल प्रयोग न करे और न ही कोई वाद या प्राथमिकी दर्ज करे। मुझे इसके लिए भरोसा चाहिए। अगर मुझे यह भरोसा मिल जाता है, तो मैं आज अपना अनशन तोड़ दूंगा। अगर कोई भरोसा नहीं मिलता है, तो मुझे इसे जारी रखने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।''
वांगचुक ने कहा कि 'कॉकरोच जनता पार्टी' (कॉजपा) की ओर से सोमवार को आयोजित 'चलो संसद' मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कार्रवाई के बाद उन्होंने अपना अनशन जारी रखने का फैसला किया है।
उन्होंने कहा, ''क्योंकि कार्रवाई बर्बर थी, इसलिए मैंने अपना अनशन जारी रखने का फैसला किया। मैं उन सभी छात्रों की प्रशंसा करना चाहता हूं जिन पर लाठियां बरसी, लेकिन उन्होंने कोई हमला नहीं किया। जबकि उन्हें उकसाया गया था और पथराव करवाने के लिए लोगों को बुलाया गया था।''
वांगचुक ने कहा कि केंद्रीय मंत्रियों और 65 सांसदों समेत कई नेताओं ने उनसे अपना अनशन खत्म करने का आग्रह किया है।
इससे पहले, केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा और जितेंद्र सिंह को लिखे एक पत्र में वांगचुक ने कहा कि वह मंगलवार रात उनसे अस्पताल में मिले थे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार नीट प्रश्नपत्र 'लीक' के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा देने पर सकारात्मक रूप से विचार करेगी। साथ ही, परीक्षा में हुई अनियमितताओं के लिए जवाबदेही तय करने के उद्देश्य से संसद में सार्थक चर्चा भी की जाएगी, जिसमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर विचार करना भी शामिल होगा।
उन्होंने अपना अनशन तोड़ने की शर्तों में से एक के तौर पर यह भरोसा भी मांगा कि विरोध कर रहे छात्रों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
वांगचुक ने मंत्रियों को लिखे पत्र में कहा, ''उनका एकमात्र 'अपराध' एक निष्पक्ष और जवाबदेह शिक्षा प्रणाली के लिए आवाज उठाना रहा है।''
जलवायु कार्यकर्ता ने सोशल मीडिया मंच पर पत्र की प्रति साझा करते हुए कहा, ''अपना अनशन तोड़ने के संबंध में सरकार से एक अपील... एक बार सरकार से आश्वासन मिल जाने के बाद, मैं शांतिपूर्ण ढंग से विरोध कर रहे छात्रों से भी अपील करूंगा कि वे फिलहाल आंदोलन रोक दें और सरकार के साथ बातचीत शुरू करें।'
वांगचुक ने 'चलो संसद' मार्च का ज़िक्र करते हुए कहा कि पुलिस के ज्यादतियों और ज़रूरत से ज़्यादा बल प्रयोग के बावजूद यह मार्च शांतिपूर्ण रहा।
वांगचुक इस समय मेदांता अस्पताल में भर्ती हैं। दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के बाद उन्हें सफदरजंग अस्पताल से मेदांता अस्पताल स्थनांतरित किया गया।
भाषा धीरज रंजन
रंजन
2307 0105 दिल्ली