पुंछ आकस्मिक बाढ़: सऊदी से लौटे व्यक्ति के सपनों का घर तबाह हो गया, परिवार के आठ लोगों की मौत
सुरेश
- 23 Jul 2026, 07:06 PM
- Updated: 07:06 PM
(अनिल भट्ट)
बुफ़लियाज़ (पुंछ), 23 जुलाई (भाषा) हाजी लतीफ ने अपने सपनों का घर बनाने और परिवार का भविष्य सुरक्षित करने के लिए सऊदी अरब में 27 साल तक मजदूरी की, लेकिन पुंछ में अचानक आई भयानक बाढ़ ने कुछ ही मिनटों में सब कुछ तबाह कर दिया।
रविवार को हुई त्रासदी में उन्होंने अपने परिवार के आठ सदस्यों को खो दिया, जिनमें उनकी पत्नी, चार बच्चे, एक बेटी और एक पोती शामिल हैं।
रविवार को जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती पुंछ और राजौरी जिलों में भारी बारिश के कारण भूस्खलन और अचानक बाढ़ आ गई, जिससे भारी तबाही हुई, कई लोगों की मौत हो गई और कई घायल हो गए। उसके बाद कई एजेंसियों ने मिलकर बचाव अभियान चलाया।
अब पूरी तरह टूट चुके लतीफ की बस यही मांग है कि मुर्रा-बुफ़लियाज़ गांव में मलबे के नीचे दबे उनके परिवार के पांच सदस्यों के शवों को बाहर निकाला जाए। तीन शव पहले ही निकाले जा चुके हैं।
लतीफ़ ने कहा, ''मेरी बस यही गुज़ारिश है: मेरी मदद करें। अगर यहां जेसीबी मशीनें लाई जा सकें (तो) शीघ्र लाइए, क्योंकि ये इन बड़े-बड़े पत्थरों को हटा सकती हैं। अकेले लोग यह काम नहीं कर सकते। अगर मेरे अपनों में से किसी एक का भी शव मिल जाए, तो यह मेरे लिए अल्लाह की सबसे बड़ी नेमत होगी।''
वह गांव के सबसे बेहतरीन घरों में से एक के मलबे के पास बैठे थे। उनके घर का नाम 'ताज महल' रखा गया था।
जैसे-जैसे दिन बीत रहे हैं, परिवार के सदस्यों के शव मिलने की उम्मीद कम होती जा रही है। भूस्खलन की वजह से प्रभावित इलाके तक जाने वाली सड़कें बंद हो गई हैं, जिससे बचाव अभियान में रुकावट आ रही है। भारी खुदाई वाली मशीनें पहुंचने में देरी हो रही है, जबकि तलाशी टीम मलबे के नीचे दबे लापता लोगों को खोजने की कोशिशें जारी रखे हुए है।
हालांकि अधिकारियों ने बताया कि मुर्रा गांव तक जाने वाली सड़क कई जगहों पर बंद है, इसलिए प्रशासन संपर्क बहाल करने और 'जेसीबी एक्सकेवेटर' जैसी मशीनें वहां तक पहुंचाने के लिए काम कर रहा है, ताकि मलबा हटाया जा सके और शवों को निकाला जा सके।
लतीफ ने कहा, ''मैंने सऊदी अरब में 27 साल काम किया। मेरी कमाई का एक-एक पैसा इस घर को बनाने में लग गया। गांव में हर कोई जानता है कि मैंने इसे बनाने में कितनी मेहनत की है। यह मेरा सपनों का घर था। जिंदगी में मेरे सिर्फ दो ही मकसद थे: एक घर बनाना और यह पक्का करना कि मेरे बच्चे अच्छी शिक्षा पाएं। मेरा सबसे बड़ा बेटा जम्मू में 12वीं क्लास में पढ़ रहा था। मैं चाहता था कि मेरे सभी बच्चे पढ़ाई करें और ज़िंदगी में बड़ी कामयाबी हासिल करें।''
मरने वालों में मोहम्मद लतीफ़ की 59-वर्षीय पत्नी नूर सफ़िया; 16-वर्षीय बेटा सज्जाद अहमद; हकनवाज़ अहमद (11), शाहनवाज़ अहमद (11), बेटी खालिदा कौसर, यासर इक़बाल (25) की पत्नी और दो साल का पोता सोफ़ियान शामिल हैं। इसके अलावा, मोहम्मद हुसैन (60) की पत्नी बानो बी और मोहम्मद लियाकत के बेटे मोहम्मद अकरम जैसे अन्य रिश्तेदार भी शामिल हैं।
लतीफ़ ने कहा कि उनके लिए सबसे बड़ा नुकसान घर का नहीं, बल्कि उनके परिवार का है।
भाषा
राजकुमार सुरेश
सुरेश
2307 1906 बुफ़लियाज़