प्रधानमंत्री का जवाब नाकाफी है, प्रधान के इस्तीफे तक जंतर-मंतर नहीं छोड़ेंगे : कॉजपा
नरेश
- 23 Jul 2026, 07:57 PM
- Updated: 07:57 PM
नयी दिल्ली, 23 जुलाई (भाषा) कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की अपनी मांग को दोहराते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि प्रश्नपत्र लीक के मामलों में कार्रवाई को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की घोषणा में जवाबदेही के मुद्दे पर कोई बात नहीं की गई है।
मोदी ने बृहस्पतिवार सुबह 'एक्स' पर एक पोस्ट में प्रश्नपत्र लीक में शामिल लोगों को जल्द कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के लिए त्वरित अदालत बनाने की घोषणा की और कहा, ''हमारे युवाओं के कल्याण और भविष्य से बढ़कर कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं है।''
मोदी ने पोस्ट में कहा, ''नथिंग इस मोर इम्पोर्टेंट दैन दी वेलफेयर एंड फ्यूचर आफ अवर यूथ। (हमारे युवाओं के कल्याण और भविष्य से बढ़कर कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं है) हमारे युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।''
राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) प्रश्नपत्र लीक को लेकर युवाओं के लगातार जारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि प्रश्नपत्र लीक के मामलों में शामिल लोगों को जल्द से जल्द कठोर दंड देने के लिए सरकार ने त्वरित अदालतें स्थापित करने का फैसला किया है।
प्रधानमंत्री के 'एक्स' पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कॉजपा के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रधान की एक तस्वीर साझा की जिस पर लिखा था, ''मेरा नाम 'नथिंग' है।'' वहीं, कॉजपा ने पोस्ट किया, ''धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए।''
कॉजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया का स्वागत किया, लेकिन कहा कि यह लगभग डेढ़ महीने के विरोध-प्रदर्शनों के बाद आई और बार-बार प्रश्नपत्र लीक होने के पीछे के मुख्य सवाल का जवाब नहीं दिया।
रांका ने कहा, ''अच्छी बात है कि डेढ़ महीने के विरोध-प्रदर्शनों के बाद प्रधानमंत्री ने आखिरकार इस पर ध्यान दिया है। शायद उनके विदेश दौरे खत्म हो गए हैं और वह भारत लौट आए हैं, जो कि एक अच्छी बात है।''
उन्होंने कहा, ''लेकिन प्रश्रनपत्र लीक हो जाने के बाद आप क्या सजा दे रहे हैं? इससे पेपर लीक की समस्या हल नहीं होगी। असली सवाल यह है कि पेपर लीक हो ही क्यों रहे हैं। इस सवाल का जवाब मिलना चाहिए।''
उन्होंने कहा, ''चोट लगने के बाद मरहम लगाना एक बात है लेकिन असली लड़ाई तो यह है कि चोट लगे ही नहीं। चोट इसलिए लगती रहती है क्योंकि व्यवस्था चलाने वाले लोग न तो जवाबदेह हैं और न ही सक्षम हैं। इसलिए ये उपाय किसी भी तरह से काफी नहीं हैं।''
रांका ने दावा किया कि इस मुद्दे पर लोगों का गुस्सा अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर बढ़ रहा है और अधिक से अधिक प्रदर्शनकारी उनके खिलाफ नारे लगा रहे हैं।
उन्होंने कहा, ''जब तक धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, हम यह जगह नहीं छोड़ेंगे।''
रांका ने कहा, ''...यहां बड़ी संख्या में लोग पूरे जोश और पक्के इरादे के साथ मौजूद हैं और हर कोई उनके इस्तीफे की मांग कर रहा है। लेकिन जैसे-जैसे दिन बीत रहे हैं, यह मुद्दा अब सिर्फ धर्मेंद्र प्रधान तक सीमित नहीं रह गया है।''
रांका ने आरोप लगाया कि यह आंदोलन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग से आगे बढ़ गया है और अब केंद्र का नेतृत्व भी निशाने पर है।
उन्होंने कहा, ''अब लोगों का ध्यान प्रधानमंत्री की ओर जा रहा है। अगर आप यहां लगाए जा रहे नारों को सुनें तो पाएंगे कि लोगों का गुस्सा लगातार इस बात को लेकर बढ़ रहा है कि प्रधानमंत्री उनकी बात क्यों नहीं सुन रहे हैं। सरकार को यह समझना चाहिए क्योंकि अब लोगों ने सीधे प्रधानमंत्री से सवाल पूछना शुरू कर दिया है।''
रांका ने सरकार के प्रतिनिधियों के साथ प्रस्तावित बैठक का भी उल्लेख किया और कहा कि वे इस बैठक से कोई ठोस परिणाम चाहते हैं। उन्होंने मंत्रियों से आग्रह किया कि यदि कोई सार्थक फैसला नहीं होना है, तो समय बर्बाद न किया जाए।
रांका ने दावा किया कि मंत्रियों ने जंतर-मंतर आकर बैठक करने से इनकार कर दिया।
कॉजपा प्रवक्ता ने कहा, ''उन्होंने (मंत्रियों) कहा कि उन्हें जंतर-मंतर न बुलाया जाए, क्योंकि लोग नाराज हैं। इसलिए हमने किसी तटस्थ स्थान पर मिलने का सुझाव दिया। लेकिन, अब भी वे कह रहे हैं कि हम जेपी नड्डा के आवास या कार्यालय आकर मिलें। क्या हमें वहां जाना चाहिए?''
इस पर वहां मौजूद भीड़ ने जोरदार आवाज में ''नहीं'' कहा।
रांका ने कहा कि वे बैठक के लिए नड्डा के आवास पर नहीं जाएंगे और उन्होंने एक और शर्त रखी।
उन्होंने कहा, ''हमें दिखावा नहीं चाहिए। पूरे देश के लोग हमारे साथ खड़े हैं। हमारा समय बर्बाद मत कीजिए। अगर बैठक करेंगे, तो हमारी मांगें माननी होंगी या कम से कम उन्हें पूरा करने की समयसीमा देनी होगी। आप हमारा समय यूं ही बर्बाद नहीं कर सकते।''
इस बीच, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की कार्यकर्ता नेहा ने सवाल उठाया कि धर्मेंद्र प्रधान को कार्रवाई से बाहर क्यों रखा गया।
नेहा ने 20 जुलाई को अन्य कार्यकर्ताओं के साथ अपना 23 दिनों का अनशन समाप्त किया था।
नेहा ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा, ''जिन्होंने हमारे युवाओं के भविष्य को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की, वे संसद में बैठे हैं! धर्मेंद्र प्रधान को क्यों छोड़ा गया? प्रश्नपत्र लीक की जांच के बीच जिनका नाम सामने आया, उस भाजयुमो (भारतीय जनता युवा मोर्चा) को क्यों छोड़ा गया? राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को क्यों बख्शा गया? आपने नई शिक्षा नीति लागू की, फिर आपको क्यों छोड़ा गया? सभी को सजा दीजिए।''
कॉजपा के नेतृत्व में यह आंदोलन 20 जून को शुरू हुआ था। इसमें प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के लिए जवाबदेही तय करने, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और प्रधान के इस्तीफे की मांग की जा रही है।
पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक 28 जून को इस आंदोलन में शामिल हुए थे और तब से वह अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। उन्होंने कहा है कि यदि केंद्र सरकार यह आश्वासन दे कि आंदोलन में शामिल शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी और न ही कोई प्राथमिकी दर्ज होगी, तो वह अपना अनशन समाप्त करने को तैयार हैं।
भाषा शफीक नरेश
नरेश
2307 1957 दिल्ली