न्यायालय ने 2020 के दंगा मामले में पंजाब के मुख्यमंत्री और 'आप' नेताओं से जवाब मांगा
सिम्मी
- 30 Jul 2026, 01:09 PM
- Updated: 01:09 PM
नयी दिल्ली, 30 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को 2020 के दंगा मामले को रद्द किए जाने के पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ चंडीगढ़ प्रशासन की याचिका पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी (आप) के अन्य नेताओं से जवाब मांगा।
भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने मुख्यमंत्री मान के साथ-साथ आम आदमी पार्टी के नेताओं हरपाल सिंह चीमा, गुरमीत सिंह, मीत हेयर, बलजिंदर कौर, अमन अरोड़ा और अन्य को नोटिस जारी किए।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस. वी. राजू ने पीठ से कहा कि यह गैरकानूनी जमावड़े का मामला था और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बल का प्रयोग करना पड़ा, जिसके परिणामस्वरूप संज्ञेय अपराध हुआ। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद उच्च न्यायालय ने ''पूरी तरह त्रुटिपूर्ण आदेश'' पारित करते हुए मामले को रद्द कर दिया।
राजू की दलीलें सुनने के बाद पीठ ने मान और अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा।
उच्चतम न्यायालय ने 21 जुलाई को मौखिक रूप से कहा था कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई आरोप नहीं है कि मान सहित आरोपियों ने 2020 में चंडीगढ़ में बिजली दरों में बढ़ोतरी के खिलाफ प्रदर्शन कर रही भीड़ को 'उकसाया' था।
उच्च न्यायालय ने इससे पहले कहा था कि आम आदमी पार्टी के नेताओं के खिलाफ प्रथम दृष्टया कोई मामला नहीं बनता और भारतीय दंड संहिता (भादसं) की जिन धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे, उन्हें सिद्ध करने के लिए कानून में जिन आवश्यक तत्वों का होना जरूरी है, वे इस मामले के तथ्यों में नहीं पाए गए।
इसी आधार पर उच्च न्यायालय ने भारतीय दंड संहिता की धाराओं 147 (दंगा), 149 (गैरकानूनी जमावड़ा), 332 (लोक सेवक को उसके कर्तव्य के निर्वहन से रोकने के लिए स्वेच्छा से चोट पहुंचाना) और 353 (लोक सेवक पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग) के तहत दर्ज प्राथमिकी और आरोपपत्र को रद्द कर दिया था।
कांस्टेबल मनप्रीत कौर की शिकायत पर 2020 में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि बिजली दरों में बढ़ोतरी के खिलाफ आम आदमी पार्टी के प्रदर्शन के दौरान भगवंत मान सहित पार्टी के कई नेताओं ने लगभग 750 से 800 कार्यकर्ताओं को चंडीगढ़ के सेक्टर-2 स्थित पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के आवास की ओर मार्च करने के लिए उकसाया था।
पुलिस का आरोप था कि प्रदर्शनकारियों ने अवरोधक तोड़ने का प्रयास किया और उन पर पानी की बौछार किए जाने के बाद पथराव किया, जिससे कई पुलिसकर्मियों को मामूली चोटें आई थीं।
भाषा गोला सिम्मी
सिम्मी
3007 1309 दिल्ली