प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में सीसीएस की बैठक, वैश्विक सुरक्षा हालात और आपूर्ति श्रृंखला पर चर्चा
नरेश
- 30 Jul 2026, 07:45 PM
- Updated: 07:45 PM
नयी दिल्ली, 30 जुलाई (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को वरिष्ठ मंत्रियों के एक समूह के साथ वैश्विक स्तर के सुरक्षा हालात तथा होर्मुज जलडमरूमध्य, काला सागर, लाल सागर और अदन की खाड़ी सहित विभिन्न क्षेत्रों में संघर्ष की स्थिति के बावजूद आपूर्ति श्रृंखला को निर्बाध बनाए रखने के उपायों पर चर्चा की।
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीएस) की बैठक में समिति के स्थायी सदस्य रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अलावा विशेष आमंत्रित सदस्य रसायन एवं उर्वरक मंत्री जे.पी. नड्डा, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल तथा पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी शामिल हुए।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में दुनिया के विभिन्न हिस्सों में जारी संघर्षों, उनके सुरक्षा संबंधी प्रभावों तथा भारत के आयात और आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ रहे असर की व्यापक समीक्षा की गई। भारत का अधिकांश आयात इन संघर्ष प्रभावित समुद्री मार्गों से होकर आता है।
सूत्रों ने बताया कि संसद भवन परिसर में करीब दो घंटे तक चली बैठक में संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा तथा समुद्री मार्गों पर कार्यरत नाविकों (सीफेयरर्स) की सुरक्षा की भी विस्तार से समीक्षा की गई।
उन्होंने बताया कि विभिन्न मंत्रियों ने अपने-अपने मंत्रालयों की ओर से प्रस्तुतीकरण दिया और पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, उर्वरक सहित आवश्यक वस्तुओं के निर्बाध आयात को सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी।
सूत्रों के मुताबिक, अल्प सूचना पर बुलाई गई इस बैठक में वैश्विक राजनीतिक परिस्थितियों पर भी चर्चा हुई।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, देश के आर्थिक हितों की रक्षा तथा आपूर्ति श्रृंखला में उत्पन्न बाधाओं से निपटने के लिए मंत्रियों को आवश्यक निर्देश भी दिए।
सूत्रों के अनुसार, अमेरिका और इजराइल के ईरान के साथ संघर्ष शुरू होने से पहले भारत के ऊर्जा आयात का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता था। संघर्ष पूरी तरह समाप्त नहीं होने के कारण पश्चिम एशिया से भारत का ऊर्जा आयात प्रभावित हुआ है।
उन्होंने बताया कि तेल और मालवाहक जहाजों पर बीच-बीच में होने वाले हमलों के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते ऊर्जा आयात अब भी न्यूनतम स्तर पर बना हुआ है।
सूत्रों ने कहा कि पिछले सप्ताह यमन के हूती विद्रोहियों ने घोषणा की थी कि बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य से गुजरने का प्रयास करने वाले सऊदी अरब के तेल टैंकरों को निशाना बनाया जाएगा। इसके बाद समूह ने कुछ जहाजों पर हमले भी किए।
बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य लाल सागर को अदन की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है तथा यह वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य की तरह एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन दिनों में बाब-अल-मंदेब से प्रतिदिन गुजरने वाले जहाजों की औसत संख्या घटकर 31 रह गई, जबकि जुलाई के पहले पखवाड़े में यह औसतन 43 प्रतिदिन थी।
सूत्रों ने बताया कि रूस-यूक्रेन युद्ध तेज होने के कारण काला सागर के रास्ते रूस से होने वाला तेल आयात भी दबाव में है। हाल के दिनों में काला सागर से गुजरने वाले कई जहाजों पर हमले हुए हैं।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का 88 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है। देश विभिन्न स्रोतों से बड़ी मात्रा में उर्वरकों का भी आयात करता है।
पश्चिम एशिया में लगभग एक करोड़ भारतीय रह रहे हैं और काम कर रहे हैं।
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