अजिंक्य रहाणे मूक योद्धा, ऑस्ट्रेलिया दौरे पर दिखाई अपनी असली क्षमता : प्रवीण आमरे
नमिता
- 30 Jul 2026, 08:48 PM
- Updated: 08:48 PM
मुंबई, 30 जुलाई (भाषा) भारत के पूर्व बल्लेबाज और अजिंक्य रहाणे के पूर्व कोच प्रवीण आमरे ने बृहस्पतिवार को कहा कि रहाणे एक 'मूक योद्धा' थे जिन्होंने 2020-21 के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर अपने प्रदर्शन और नेतृत्व से अपनी असली क्षमता का शानदार परिचय दिया।
भारत के लिए अपना आखिरी मैच खेलने के तीन साल बाद 38 वर्षीय रहाणे ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास की घोषणा की। उन्होंने 2011 में पदार्पण करने के बाद 12 वर्षों से अधिक के करियर में 85 टेस्ट, 90 एकदिवसीय और 20 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले।
आमरे ने पीटीआई वीडियो से कहा, ''हम जानते हैं कि ऑस्ट्रेलिया में मेलबर्न टेस्ट में उन्होंने क्या किया था जबकि इससे पहले टीम 36 रन पर आउट हो गई थी।''
उन्होंने कहा, ''उस स्थिति से टीम को संभालना, खुद प्रदर्शन करना, आगे बढ़कर नेतृत्व करना और शतक बनाना... मेरा मानना है कि यही बल्लेबाजी की कला और नेतृत्व की असली पहचान है। जब टीम का मनोबल पूरी तरह गिर चुका था तब वहां से वापसी कर ऑस्ट्रेलिया को उसी की धरती पर हराना असाधारण उपलब्धि थी।''
आमरे ने कहा, ''अजिंक्य रहाणे हमेशा एक मूक योद्धा रहे क्योंकि उन्हें पता था कि जब भी टीम को उनकी जरूरत होगी, वह उसके लिए मौजूद रहेंगे। उनका पालन-पोषण और उनका रवैया ही ऐसा था। मुझे इस बात पर बेहद गर्व है क्योंकि उनके अधिकांश महत्वपूर्ण प्रदर्शन कठिन परिस्थितियों में आए और यही उनकी बल्लेबाजी की विशेषता थी।''
उन्होंने रहाणे के प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण को भी याद किया जब उन्होंने कराची के नेशनल स्टेडियम में कराची अर्बन के खिलाफ मुंबई की ओर से अपने पहले ही मैच में 143 रन बनाए थे।
आमरे ने कहा, ''उनका पदार्पण खास था। पाकिस्तान में पहले ही मैच में उन्होंने शतक बनाया। वहीं उन्होंने अपनी प्रतिभा की पहली झलक दिखाई। मुंबई का प्रतिनिधित्व करते हुए पहले ही मैच में शतक बनाना बहुत बड़ी बात थी।''
उन्होंने कहा, ''एक खिलाड़ी के रूप में यह बहुत महत्वपूर्ण था। उसी समय मुझे लगा था कि इस लड़के में काफी क्रिकेट है और उसमें भारत के लिए खेलने की क्षमता मौजूद है।''
आमरे के अनुसार 2014 के इंग्लैंड दौरे पर लॉर्ड्स में रहाणे की 103 रन की पारी उनके करियर की सबसे यादगार पारियों में से एक रही जिसने भारत की ऐतिहासिक जीत की नींव रखी।
रहाणे के कप्तानी करियर का सबसे बड़ा क्षण निर्विवाद रूप से 2020-21 का ऑस्ट्रेलिया दौरा रहा जब उन्होंने चोटों से जूझ रही भारतीय टीम का नेतृत्व करते हुए बोर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में 2-1 से ऐतिहासिक श्रृंखला जीत दिलाई।
आमरे ने इसकी तुलना पाकिस्तान के खिलाफ कारगिल युद्ध से करते हुए कहा कि जिस तरह भारतीय सेना ने प्रतिकूल परिस्थितियों में ऊंची चोटियों पर कब्जा जमाए दुश्मन को पराजित किया था उसी तरह भारतीय टीम ने भी मुश्किल हालात से उबरकर ऑस्ट्रेलिया में श्रृंखला जीती।
उन्होंने कहा, ''मुझे याद है कि एडीलेड टेस्ट हारने के बाद जब वह कप्तान बने तब मैंने उनसे बात की थी। मुझे व्यक्तिगत रूप से लगा कि वह बिल्कुल कारगिल जैसा क्षण था। प्रतिद्वंद्वी शीर्ष पर था, भारतीय टीम नीचे थी और वहां से उन्होंने वापसी करते हुए श्रृंखला जीत ली।''
भाषा सुधीर नमिता
नमिता
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